अन-नहल · 7/128
अनुवाद उच्चारण — सूरा अन-नहल
وَتَحْمِلُ أَثْقَالَكُمْ إِلَىٰ بَلَدٍ لَّمْ تَكُونُوا بَالِغِيهِ إِلَّا بِشِقِّ الْأَنفُسِ ۚ إِنَّ رَبَّكُمْ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ ۝٧
Wa tahmilu asqaalakum ilaa baladil lam takoonoo baaligheehi illaa bishiqqil anfus; inna Rabbakum la Ra`oofur Raheem
📖 हिंदी अर्थ
तो उनकी वजह से तुम्हारी रौनक़ भी है और जिन शहरों तक बग़ैर बड़ी जान ज़ोख़म में डाले बगैर के पहुँच न सकते थे वहाँ तक ये चौपाए भी तुम्हारे बोझे भी उठा लिए फिरते हैं इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बड़ा शफीक़ मेहरबान है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَثْقَالَكُمْ: तुम्हारे भारी सामान (बोझ)
  • بَلَدٍ: शहर या नगर (यहाँ मक्का या कोई दूर का स्थान)
  • بَالِغِيهِ: उस तक पहुँचने वाले
  • بِشِقِّ الْأَنفُسِ: जानों की कठिनाई और सख्त मेहनत के साथ
  • لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ: बड़ा ही दयालु और अत्यंत मेहरबान

तफसीर (व्याख्या):

ये चौपाए (ऊँट, गधे, खच्चर आदि) तुम्हारे भारी सामान और बोझ को उठाकर उस शहर तक ले जाते हैं, जहाँ तुम अकेले अपनी ताकत से नहीं पहुँच सकते थे, बल्कि बड़ी कठिनाई और जान की परेशानी के बिना वहाँ पहुँचना नामुमकिन था। यानी अगर ये जानवर न होते, तो तुम अपने भारी बोझ को दूर-दराज़ के इलाकों तक नहीं पहुँचा पाते और न ही अपनी ज़रूरतें पूरी कर पाते। अल्लाह ने इन जानवरों को तुम्हारे अधीन कर दिया है, ताकि तुम्हारा सफर आसान हो जाए और तुम अपने कामों को पूरा कर सको। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है कि उसने अपने बंदों के लिए ऐसे साधन पैदा किए, जो उनके भारी बोझ को उठाकर उनकी मुश्किलें कम कर देते हैं। बेशक तुम्हारा रब तुम पर बड़ा ही दयालु और अत्यंत मेहरबान है, क्योंकि उसने अपनी रहमत से तुम्हारे लिए ये सब सुविधाएँ मुहैया कराई हैं।

फ़ायदे (सबक):

  1. अल्लाह की नेमतों पर गौर करना चाहिए — जब हम देखते हैं कि चौपाए जानवर हमारे भारी बोझ को उठाकर दूर-दराज़ के इलाकों तक ले जाते हैं, तो यह अल्लाह की अपार कृपा का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इससे हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।
  2. अल्लाह की रहमत का एहसास — यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह अपने बंदों पर कितना दयालु है। वह हर छोटी-बड़ी ज़रूरत का ख्याल रखता है और उसके लिए साधन बनाता है।
  3. सफर और व्यापार में आसानी — इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह ने इंसानों के लिए सफर और व्यापार के ज़रिए आसान बनाए हैं, ताकि वे अपनी रोज़ी कमा सकें और अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।
  4. अल्लाह पर भरोसा — जब हमें यह यकीन हो जाए कि अल्लाह हमारी हर ज़रूरत का ख्याल रखता है, तो हमारा दिल उस पर भरोसा करता है और हम उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होते।
  5. जानवरों के साथ अच्छा व्यवहार — यह आयत हमें सिखाती है कि ये जानवर अल्लाह की अमानत हैं, इसलिए हमें उनके साथ नर्मी और रहम का बर्ताव करना चाहिए, क्योंकि वे हमारी सेवा करते हैं।


📜 आयत 5-9 — सूरा अन-नहल

5وَالْأَنْعَامَ خَلَقَهَا ۗ لَكُمْ فِيهَا دِفْءٌ وَمَنَافِعُ وَمِنْهَا تَأْكُلُونَ
उसी ने चरपायों को भी पैदा किया कि तुम्हारे लिए ऊन (ऊन की खाल और ऊन) से जाडे क़ा सामान है
6وَلَكُمْ فِيهَا جَمَالٌ حِينَ تُرِيحُونَ وَحِينَ تَسْرَحُونَ
इसके अलावा और भी फायदें हैं और उनमें से बाज़ को तुम खाते हो और जब तुम उन्हें सिरे शाम चराई पर से लाते हो जब सवेरे ही सवेरे चराई पर ले जाते हो
7وَتَحْمِلُ أَثْقَالَكُمْ إِلَىٰ بَلَدٍ لَّمْ تَكُونُوا بَالِغِيهِ إِلَّا بِشِقِّ الْأَنفُسِ ۚ إِنَّ رَبَّكُمْ لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ
तो उनकी वजह से तुम्हारी रौनक़ भी है और जिन शहरों तक बग़ैर बड़ी जान ज़ोख़म में डाले बगैर के पहुँच न सकते थे वहाँ तक ये चौपाए भी तुम्हारे बोझे भी उठा लिए फिरते हैं इसमें शक़ नहीं कि तुम्हारा परवरदिगार बड़ा शफीक़ मेहरबान है
8وَالْخَيْلَ وَالْبِغَالَ وَالْحَمِيرَ لِتَرْكَبُوهَا وَزِينَةً ۚ وَيَخْلُقُ مَا لَا تَعْلَمُونَ
और (उसी ने) घोड़ों ख़च्चरों और गधों को (पैदा किया) ताकि तुम उन पर सवार हो और (इसमें) ज़ीनत (भी) है
9وَعَلَى اللَّهِ قَصْدُ السَّبِيلِ وَمِنْهَا جَائِرٌ ۚ وَلَوْ شَاءَ لَهَدَاكُمْ أَجْمَعِينَ
(उसके अलावा) और चीज़े भी पैदा करेगा जिनको तुम नहीं जानते हो और (ख़ुश्क व तर में) सीधी राह (की हिदायत तो ख़ुदा ही के ज़िम्मे हैं और बाज़ रस्ते टेढे हैं
अन-नहलकुरान सूची
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मक्कीअवतरण स्थान
7आयत

अनुवाद — अन-नहल 7

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Monday, September 28, 2026

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