Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَثْقَالَكُمْ: तुम्हारे भारी सामान (बोझ)
- بَلَدٍ: शहर या नगर (यहाँ मक्का या कोई दूर का स्थान)
- بَالِغِيهِ: उस तक पहुँचने वाले
- بِشِقِّ الْأَنفُسِ: जानों की कठिनाई और सख्त मेहनत के साथ
- لَرَءُوفٌ رَّحِيمٌ: बड़ा ही दयालु और अत्यंत मेहरबान
तफसीर (व्याख्या):
ये चौपाए (ऊँट, गधे, खच्चर आदि) तुम्हारे भारी सामान और बोझ को उठाकर उस शहर तक ले जाते हैं, जहाँ तुम अकेले अपनी ताकत से नहीं पहुँच सकते थे, बल्कि बड़ी कठिनाई और जान की परेशानी के बिना वहाँ पहुँचना नामुमकिन था। यानी अगर ये जानवर न होते, तो तुम अपने भारी बोझ को दूर-दराज़ के इलाकों तक नहीं पहुँचा पाते और न ही अपनी ज़रूरतें पूरी कर पाते। अल्लाह ने इन जानवरों को तुम्हारे अधीन कर दिया है, ताकि तुम्हारा सफर आसान हो जाए और तुम अपने कामों को पूरा कर सको। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है कि उसने अपने बंदों के लिए ऐसे साधन पैदा किए, जो उनके भारी बोझ को उठाकर उनकी मुश्किलें कम कर देते हैं। बेशक तुम्हारा रब तुम पर बड़ा ही दयालु और अत्यंत मेहरबान है, क्योंकि उसने अपनी रहमत से तुम्हारे लिए ये सब सुविधाएँ मुहैया कराई हैं।
फ़ायदे (सबक):
- अल्लाह की नेमतों पर गौर करना चाहिए — जब हम देखते हैं कि चौपाए जानवर हमारे भारी बोझ को उठाकर दूर-दराज़ के इलाकों तक ले जाते हैं, तो यह अल्लाह की अपार कृपा का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इससे हमें अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।
- अल्लाह की रहमत का एहसास — यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह अपने बंदों पर कितना दयालु है। वह हर छोटी-बड़ी ज़रूरत का ख्याल रखता है और उसके लिए साधन बनाता है।
- सफर और व्यापार में आसानी — इस आयत से पता चलता है कि अल्लाह ने इंसानों के लिए सफर और व्यापार के ज़रिए आसान बनाए हैं, ताकि वे अपनी रोज़ी कमा सकें और अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।
- अल्लाह पर भरोसा — जब हमें यह यकीन हो जाए कि अल्लाह हमारी हर ज़रूरत का ख्याल रखता है, तो हमारा दिल उस पर भरोसा करता है और हम उसकी रहमत से कभी निराश नहीं होते।
- जानवरों के साथ अच्छा व्यवहार — यह आयत हमें सिखाती है कि ये जानवर अल्लाह की अमानत हैं, इसलिए हमें उनके साथ नर्मी और रहम का बर्ताव करना चाहिए, क्योंकि वे हमारी सेवा करते हैं।
📜 आयत 5-9 — सूरा अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 7
सूरा अन-नहल आयत 7 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो उनकी वजह से तुम्हारी रौनक़ भी है और जिन…सूरा आयत 7/128 — सूरा अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अन-नहल सुनें, सूरा अन-नहल अनुवाद, सूरा अन-नहल mp3, सूरा अन-नहल pdf. आयत 5–9. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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