अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- جَمَالٌ: सुन्दरता, शोभा, आभूषण।
- تُرِيحُونَ: जब तुम शाम के समय जानवरों को उनके बाड़े (ठहरने की जगह) में वापस लाते हो।
- تَسْرَحُونَ: जब तुम सुबह के समय उन्हें चरने के लिए (चरागाह की ओर) छोड़ते हो।
व्याख्या:
अल्लाह तआला इस आयत में अपनी उन महान नेमतों का ज़िक्र कर रहा है जो उसने जानवरों (विशेषकर ऊँट, गाय, बकरी आदि) के रूप में इंसानों को प्रदान की हैं। पिछली आयतों में इन जानवरों से मिलने वाले लाभों (दूध, ऊन, सवारी, बोझ ढोना) का उल्लेख किया गया था, और अब यहाँ उनकी एक और खूबसूरत नेमत का वर्णन किया जा रहा है।
अल्लाह फ़रमाता है कि इन जानवरों में तुम्हारे लिए सौंदर्य और शोभा भी है। जब तुम शाम के समय उन्हें उनके बाड़े (मुराह) में वापस लाते हो, तो उनकी सुन्दरता और मोटापा देखकर तुम्हें खुशी और संतोष होता है। इसी तरह, जब तुम सुबह के समय उन्हें चरने के लिए छोड़ते हो, तो वे ताज़गी और चुस्ती के साथ निकलती हैं, जो तुम्हारी आँखों के लिए सुखद दृश्य होता है। यह दृश्य तुम्हारे लिए ज़ीनत और इज़्ज़त का कारण बनता है, क्योंकि जानवरों की बहुतायत अरबों के बीच धन और प्रतिष्ठा का प्रतीक मानी जाती थी।
इस आयत में शाम (इराहा) का ज़िक्र सुबह (सरह) से पहले किया गया है, जबकि आम तौर पर सुबह जानवरों को चरने के लिए भेजा जाता है और शाम को वापस लाया जाता है। इसका कारण यह है कि जब जानवर शाम को बाड़े में लौटते हैं, तो वे दूध से भरे होते हैं और उनकी स्थिति सबसे अच्छी होती है — वे अधिक सुन्दर, अधिक दूध देने वाले और मालिक को सबसे अधिक प्रिय होते हैं। इसलिए पहले उस समय का ज़िक्र किया गया जो अधिक आनंददायक है।
शिक्षाएँ और लाभ:
- अल्लाह की नेमतों को पहचानना और उन पर विचार करना इंसान के ईमान को मज़बूत करता है। जानवरों में भी अल्लाह ने इंसान के लिए सुन्दरता और लाभ रखा है, यह उसकी रहमत और कुदरत की निशानी है।
- इस आयत से पता चलता है कि इस्लाम केवल आध्यात्मिकता का धर्म नहीं है, बल्कि यह इंसान की दुनियावी ज़रूरतों और उसकी खुशियों का भी ख़याल रखता है। अल्लाह ने जानवरों को इंसान के लिए ज़ीनत बनाया है ताकि उसे आराम और सुकून मिले।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की दी हुई नेमतों का सही उपयोग करें और उन्हें अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए इस्तेमाल करें, साथ ही इन नेमतों पर अल्लाह का शुक्र अदा करें।
- जानवरों के साथ अच्छा व्यवहार करना और उनकी देखभाल करना भी इस आयत से समझ में आता है, क्योंकि वे इंसान के लिए सुन्दरता और लाभ का साधन हैं। यह इस्लाम की दया और करुणा का पैग़ाम है कि वह जानवरों के साथ भी नेकी करने की तालीम देता है।
- यह आयत मुसलमानों को प्रकृति की ओर ध्यान देने और अल्लाह की बनाई हुई चीज़ों में उसकी कुदरत के निशान देखने की प्रेरणा देती है, जिससे ईमान और यक़ीन में इज़ाफ़ा होता है।
📜 आयत 4-8 — अन-नहल
अनुवाद — अन-नहल 6
सूरा अन-नहल आयत 6 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : इसके अलावा और भी फायदें हैं और उनमें से बाज़…सूरा आयत 6/128 — अन-नहल النحل (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अन-नहल सुनें, अन-नहल अनुवाद, अन-नहल mp3, अन-नहल pdf. आयत 4–8. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए








