अल-इसरा · 25/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
رَّبُّكُمْ أَعْلَمُ بِمَا فِي نُفُوسِكُمْ ۚ إِن تَكُونُوا صَالِحِينَ فَإِنَّهُ كَانَ لِلْأَوَّابِينَ غَفُورًا ۝٢٥
Rabbukum a`lamu bimaa fee nufoosikum; in takoonoo saaliheena fa innahoo kaana lil awwaabeena Ghafoooraa
📖 हिंदी अर्थ
इसी तरह तू भी इन पर रहम फरमा तुम्हारे दिल की बात तुम्हारा परवरदिगार ख़ूब जानता है अगर तुम (वाक़ई) नेक होगे और भूले से उनकी ख़ता की है तो वह तुमको बख्श देगा क्योंकि वह तो तौबा करने वालों का बड़ा बख़शने वाला है
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • أَوَّابِينَ (अव्वाबीन): बार-बार अल्लाह की ओर लौटने वाले, तौबा करने वाले।

व्याख्या:

हे लोगो! तुम्हारा रब उस बात को भली-भाँति जानता है जो तुम्हारे दिलों में है—चाहे वह अच्छाई हो या बुराई। वह तुम्हारे माता-पिता के प्रति तुम्हारे दिल में छिपे प्रेम, आदर, नेकी या उनकी नाफ़रमानी के इरादे को भी खूब जानता है। यदि तुम्हारी नीयतें सच्ची हों, तुम्हारे दिल अल्लाह की रज़ा और उसकी आज्ञाकारिता की ओर झुके हों, और तुम अपने माता-पिता के साथ भलाई करने के इच्छुक हो, तो याद रखो कि अल्लाह उन लोगों को क्षमा करने वाला है जो अपनी गलतियों से तौबा करके उसकी ओर बार-बार लौटते हैं। यदि तुमसे पहले कोई कमी या भूल हुई हो—चाहे वह माता-पिता के हक़ में हो या अल्लाह के किसी आदेश के पालन में—तो जब तुम सच्चे दिल से अल्लाह की ओर पलटोगे और अपनी नीयत को सुधारोगे, तो वह तुम्हारे उन पिछले क़ुसूर (कमियों) को माफ़ कर देगा। अल्लाह उन लोगों के लिए बड़ा क्षमाशील है जो अपनी भूलों से सीखकर उसकी ओर रुजू करते हैं, और वह उनके छोटे-छोटे गुनाहों को भी अपनी रहमत से ढक देता है, क्योंकि यह मानवीय स्वभाव का हिस्सा है कि इंसान से कभी-कभी भूलें हो जाती हैं।

फ़ायदे:

  1. अल्लाह तआला हर इंसान के दिल के भेद को जानता है, इसलिए हमें अपनी नीयतों को साफ़ और सच्चा रखना चाहिए, क्योंकि अल्लाह सिर्फ़ ज़ाहिरी अमल ही नहीं बल्कि बातिनी इरादों को भी देखता है।
  2. इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि अल्लाह की रहमत बहुत विशाल है—वह उन लोगों को माफ़ कर देता है जो अपनी गलतियों से तौबा करके उसकी ओर लौटते हैं, चाहे उनसे कितनी ही भूलें क्यों न हुई हों।
  3. यह आयत हमें निराशा से बचाती है—अगर हमसे कोई कमी हो जाए, तो हमें अल्लाह की रहमत से मायूस नहीं होना चाहिए, बल्कि सच्चे दिल से तौबा करके उसकी ओर पलटना चाहिए।
  4. माता-पिता के साथ भलाई और उनके प्रति दिल में सच्ची मुहब्बत रखना अल्लाह को बहुत पसंद है, और यही नेकी का रास्ता है जो अल्लाह की मग़फिरत का ज़रिया बनता है।
🎧 सुनें

📜 आयत 23-27 — अल-इसरा

23۞ وَقَضَىٰ رَبُّكَ أَلَّا تَعْبُدُوا إِلَّا إِيَّاهُ وَبِالْوَالِدَيْنِ إِحْسَانًا ۚ إِمَّا يَبْلُغَنَّ عِندَكَ الْكِبَرَ أَحَدُهُمَا أَوْ كِلَاهُمَا فَلَا تَقُل لَّهُمَا أُفٍّ وَلَا تَنْهَرْهُمَا وَقُل لَّهُمَا قَوْلًا كَرِيمًا
और तुम्हारे परवरदिगार ने तो हुक्म ही दिया है कि उसके सिवा किसी दूसरे की इबादत न करना और माँ बाप से नेकी करना अगर उनमें से एक या दोनों तेरे सामने बुढ़ापे को पहुँचे (और किसी बात पर खफा हों) तो (ख़बरदार उनके जवाब में उफ तक) न कहना और न उनको झिड़कना और जो कुछ कहना सुनना हो तो बहुत अदब से कहा करो
24وَاخْفِضْ لَهُمَا جَنَاحَ الذُّلِّ مِنَ الرَّحْمَةِ وَقُل رَّبِّ ارْحَمْهُمَا كَمَا رَبَّيَانِي صَغِيرًا
और उनके सामने नियाज़ (रहमत) से ख़ाकसारी का पहलू झुकाए रखो और उनके हक़ में दुआ करो कि मेरे पालने वाले जिस तरह इन दोनों ने मेरे छोटेपन में मेरी मेरी परवरिश की है
25رَّبُّكُمْ أَعْلَمُ بِمَا فِي نُفُوسِكُمْ ۚ إِن تَكُونُوا صَالِحِينَ فَإِنَّهُ كَانَ لِلْأَوَّابِينَ غَفُورًا
इसी तरह तू भी इन पर रहम फरमा तुम्हारे दिल की बात तुम्हारा परवरदिगार ख़ूब जानता है अगर तुम (वाक़ई) नेक होगे और भूले से उनकी ख़ता की है तो वह तुमको बख्श देगा क्योंकि वह तो तौबा करने वालों का बड़ा बख़शने वाला है
26وَآتِ ذَا الْقُرْبَىٰ حَقَّهُ وَالْمِسْكِينَ وَابْنَ السَّبِيلِ وَلَا تُبَذِّرْ تَبْذِيرًا
और क़राबतदारों और मोहताज और परदेसी को उनका हक़ दे दो और ख़बरदार फुज़ूल ख़र्ची मत किया करो
27إِنَّ الْمُبَذِّرِينَ كَانُوا إِخْوَانَ الشَّيَاطِينِ ۖ وَكَانَ الشَّيْطَانُ لِرَبِّهِ كَفُورًا
क्योंकि फुज़ूलख़र्ची करने वाले यक़ीनन शैतानों के भाई है और शैतान अपने परवरदिगार का बड़ा नाशुक्री करने वाला है
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अनुवाद — अल-इसरा 25

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Tuesday, August 18, 2026

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