अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- ذَا الْقُرْبَىٰ: रिश्तेदार, नातेदार
- الْمِسْكِينَ: वह गरीब जिसके पास अपनी ज़रूरत पूरी करने के लिए कुछ न हो
- ابْنَ السَّبِيلِ: मुसाफ़िर जो अपने वतन से दूर हो और जिसके पास खर्च के लिए पैसे न हों
- لَا تُبَذِّرْ تَبْذِيرًا: फ़िज़ूल खर्ची मत करो, माल को बरबाद मत करो
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों को हिदायत देता है कि रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करो और उनका हक़ अदा करो, यानी उनसे नाता जोड़ो, उनकी मदद करो और उनके साथ भलाई करो। यह सिर्फ़ माल देने तक ही सीमित नहीं, बल्कि हर तरह की भलाई और सहायता शामिल है। इसी तरह मिस्कीन (गरीब) और मुसाफ़िर को भी उनका हक़ दो, चाहे वह ज़कात के रूप में हो या अन्य साधनों से।
फिर अल्लाह तआला फ़िज़ूल खर्ची से रोकता है और कहता है कि अपने माल को बरबाद मत करो, न अल्लाह की नाफ़रमानी में खर्च करो और न ही बेवजह इसराफ़ करो। जो व्यक्ति अपने माल को ग़लत जगह या बेहद इसराफ़ के साथ खर्च करता है, वह शैतान का भाई बन जाता है, क्योंकि शैतान इंसान को इसी तरह की बुरी आदतों की तरफ़ ले जाता है।
फ़ायदे (सबक):
- इस आयत से हमें यह सीख मिलती है कि रिश्तेदारों के साथ अच्छा व्यवहार करना और उनका हक़ अदा करना इस्लाम का एक बुनियादी सिद्धांत है। यह सिर्फ़ एक सलाह नहीं, बल्कि एक आदेश है जो हमारे दिलों को नरमी और मुहब्बत से भर देता है।
- गरीबों और मुसाफ़िरों की मदद करना हमारे ईमान की निशानी है। इससे समाज में भाईचारा और एकता पैदा होती है और अल्लाह की रहमत हासिल होती है।
- फ़िज़ूल खर्ची और इसराफ़ से बचना सिखाया गया है। यह हमें सिखाता है कि अल्लाह ने जो नेमतें दी हैं, उन्हें सही तरीके से इस्तेमाल करें और उनकी क़द्र करें। इससे हमारी ज़िंदगी में बरकत आती है और हम शैतान के जाल से बचे रहते हैं।
- यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि इस्लाम सिर्फ़ इबादत का नाम नहीं, बल्कि एक पूरा जीवन-दर्शन है जो हमारे रिश्तों, हमारे खर्च और हमारे हर काम में संतुलन और भलाई का पैग़ाम देता है।
📜 आयत 24-28 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 26
सूरा अल-इसरा आयत 26 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और क़राबतदारों और मोहताज और परदेसी को उनका हक़ दे…सूरा आयत 26/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 24–28. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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