अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- صَرَّفْنَا: हमने विभिन्न प्रकार से प्रस्तुत किया, अर्थात् भिन्न-भिन्न शैलियों और तरीकों से बयान किया।
- لِيَذَّكَّرُوا: ताकि वे शिक्षा ग्रहण करें, सीखें और चेतावनी पाएँ।
- نُفُورًا: दूर भागना, विमुख होना, क्रोध और घृणा के साथ पलायन करना।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने इस पवित्र कुरआन में अपने बंदों की भलाई के लिए अपनी बातों को विभिन्न रूपों और शैलियों में प्रस्तुत किया है। कभी आदेशों के रूप में, कभी निषेधों के रूप में, कभी उपदेशों और सीखों के रूप में, कभी दृष्टांतों (मिसालों) के रूप में, कभी डराने-धमकाने के रूप में, और कभी प्रलोभन और आशा देने के रूप में। इसका उद्देश्य यह है कि लोग इस पर गहराई से विचार करें, अपने लाभ की चीज़ों को अपनाएँ और हानिकारक चीज़ों से बचें, तथा अपने रब की ओर लौट आएँ।
लेकिन जिन लोगों की फ़ितरत (स्वाभाविक प्रवृत्ति) विकृत हो चुकी है और जिनके दिलों पर अहंकार और हठधर्मिता हावी है, उनके लिए यह स्पष्टीकरण और विस्तार किसी काम नहीं आता। इसके विपरीत, जब भी वे कुरआन की कोई आयत सुनते हैं, तो उनका सत्य से विमुख होना और घृणा और बढ़ जाती है। वे सत्य से दूर भागते हैं और उसे स्वीकार करने से और अधिक कतराते हैं। यह उनके अपने हठ और अहंकार का परिणाम है, क्योंकि कुरआन तो हिदायत और रहमत है, लेकिन जिसने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया, उसके लिए यही कुरआन उसकी गुमराही और दूरी का कारण बन जाता है।
फ़ायदे (लाभ):
- कुरआन में बातों को विभिन्न शैलियों में प्रस्तुत करना अल्लाह की ओर से अपने बंदों पर विशेष कृपा और दया है, ताकि हर इंसान अपनी समझ के अनुसार उससे लाभ उठा सके।
- कुरआन का असली उद्देश्य लोगों को जागरूक करना और उन्हें सीधे मार्ग पर लाना है, न कि केवल पढ़ने या सुनने की रस्म अदा करना।
- हिदायत पाना अल्लाह की मर्ज़ी पर निर्भर करता है; जिसके दिल में सच्चाई की तलाश होती है, कुरआन उसके लिए रहमत बन जाता है, और जो अहंकारी और हठधर्मी होता है, उसके लिए वही कुरआन उसकी दूरी का कारण बन जाता है।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने दिलों को नम्र और सीखने के लिए तैयार रखना चाहिए, ताकि अल्लाह की आयतें हमारे लिए हिदायत का ज़रिया बनें, न कि हम उनसे दूर भागें।
- इस आयत में उन लोगों के लिए चेतावनी है जो कुरआन की आयतों को सुनकर भी उनसे मुँह मोड़ लेते हैं — उनका यह रवैया उन्हें और अधिक गुमराही में डाल देता है।
📜 आयत 39-43 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 41
सूरा अल-इसरा आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने तो इसी क़ुरान में तरह तरह से बयान…सूरा आयत 41/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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