अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- ख़स्फ़ (خسف): धरती में धँस जाना, धरती का फटकर किसी को निगल लेना।
- जानिबुल बर्र (جانب البر): ज़मीन का किनारा, सूखी ज़मीन का हिस्सा।
- हासिब (حاصب): वह तेज़ हवा या आँधी जो छोटे-छोटे पत्थरों को उड़ाकर लाए, या आसमान से बरसाए जाने वाले पत्थर।
- वकील (وكيل): रक्षक, सहारा देने वाला, काम संभालने वाला।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला इस आयत में अपने बंदों को उस एहसान की याद दिलाते हुए उन्हें सावधान कर रहे हैं। जब इंसान समुद्र में सफ़र करता है और खतरे में पड़ता है, तो वह अल्लाह को पुकारता है, और जब अल्लाह उसे बचाकर सूखी ज़मीन (किनारे) तक पहुँचा देता है, तो वह अपने रब को भूल जाता है और निश्चिंत हो जाता है। अल्लाह फ़रमाता है: क्या तुम उस अल्लाह के अज़ाब से बेख़ौफ़ हो गए हो जिसने अभी-अभी तुम्हें समुद्र के खतरे से बचाया है? क्या तुमने ये समझ लिया कि अब तुम उसकी पकड़ से निकल गए?
अल्लाह तआला फ़रमाता है: “क्या तुम इस बात से निडर हो गए हो कि वह तुम्हें सूखी ज़मीन पर ही धँसा दे (यानी ज़मीन तुम्हें निगल जाए), जैसा उसने क़ारून के साथ किया था? या वह तुम पर पत्थर बरसाने वाली आँधी भेज दे, जैसा उसने क़ौमे लूत के साथ किया था? फिर उस वक़्त तुम्हें कोई रक्षक, कोई सहारा देने वाला, कोई पनाह देने वाला न मिलेगा जो तुम्हें उस अज़ाब से बचा सके।”
ये आयत उन लोगों के लिए बड़ी चेतावनी है जो अल्लाह की नेअमतों को भूलकर अपनी ताक़त और साधनों पर इतराते हैं। इंसान चाहे कितना ही ताक़तवर क्यों न हो, अल्लाह की पकड़ से बच नहीं सकता। जिस अल्लाह ने समुद्र में तुम्हें बचाया, वही ज़मीन पर भी तुम्हें पकड़ सकता है। इसलिए हर हाल में उसी की तरफ़ रुजू करना चाहिए, उसी से डरना चाहिए और उसी पर भरोसा रखना चाहिए।
ये आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की पकड़ से बचने का कोई रास्ता नहीं, और न ही उसके अज़ाब से बचाने वाला कोई वकील और मददगार है। अगर अल्लाह किसी पर अज़ाब भेजना चाहे, तो न ज़मीन उसे बचा सकती है, न आसमान, न कोई इंसान, न कोई ताक़त। इसलिए ईमानवाले को चाहिए कि वह हर वक़्त अल्लाह से डरे, उसकी नेअमतों का शुक्र अदा करे और उसकी नाफ़रमानी से बचे। अल्लाह की रहमत और मग़फ़िरत उन्हीं के लिए है जो उसके आगे झुकते हैं, उसकी पनाह चाहते हैं और उसके दीन पर साबित क़दम रहते हैं।
📜 आयत 66-70 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 68
सूरा अल-इसरा आयत 68 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : तो क्या तुम उसको इस का भी इत्मिनान हो गया…सूरा आयत 68/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 66–70. हिंदी अर्थ: اردو.
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Wednesday, August 19, 2026
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