अल-इसरा · 69/111
अनुवाद उच्चारण — अल-इसरा
أَمْ أَمِنتُمْ أَن يُعِيدَكُمْ فِيهِ تَارَةً أُخْرَىٰ فَيُرْسِلَ عَلَيْكُمْ قَاصِفًا مِّنَ الرِّيحِ فَيُغْرِقَكُم بِمَا كَفَرْتُمْ ۙ ثُمَّ لَا تَجِدُوا لَكُمْ عَلَيْنَا بِهِ تَبِيعًا ۝٦٩
Am amintum any yu`eedakum feehi taaratan ukhraa fa yursila `alaikum qaasifam minar reehi fa yugh riqakum bimaa kafartum summa laa tajidoo lakum `alainaa bihee tabee`aa
📖 हिंदी अर्थ
या तुमको इसका भी इत्मेनान हो गया कि फिर तुमको दोबारा इसी समन्दर में ले जाएगा उसके बाद हवा का एक ऐसा झोका जो (जहाज़ के) परख़चे उड़ा दे तुम पर भेजे फिर तुम्हें तुम्हारे कुफ्र की सज़ा में डुबा मारे फिर तुम किसी को (ऐसा हिमायती) न पाओगे जो हमारा पीछा करे और (तुम्हें छोड़ा जाए)

🎧 सुनें
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • क़ासिफ़न मिन अर-रीह: वह अत्यंत प्रचंड हवा जो चीज़ों को तोड़-फोड़ कर रख दे, ज़ोरदार तूफ़ान।
  • तबी'अन: कोई मददगार, बदला लेने वाला, या तुम्हारी ओर से हमसे पूछताछ करने वाला।

तफ़सीर:

ऐ लोगों! क्या तुम इस बात से निडर हो गए हो कि अल्लाह तुम्हें दोबारा समुद्र में लौटा दे, जैसा उसने पहले किया था? फिर वह तुम पर एक ऐसी प्रचंड आँधी भेजे जो चीज़ों को चूर-चूर कर दे, और तुम्हें तुम्हारे कुफ़्र (अस्वीकार) और अहसान-फ़रामोशी की सज़ा में डुबो दे? और जब ऐसा हो जाए, तो तुम्हें अपने लिए कोई ऐसा सहायक या बदला लेने वाला न मिले जो हमसे तुम्हारे पक्ष में पूछताछ कर सके या तुम्हारा हक़ वापस दिला सके।

यह अल्लाह तआला का अपने बंदों के प्रति अत्यंत दयालु होना है कि वह उन्हें खतरे से बचाकर सूखी ज़मीन पर पहुँचाता है, फिर भी इंसान अपने रब की नेअमतों को भूल जाता है और उसकी नाफ़रमानी पर उतारू हो जाता है। अल्लाह ने यहाँ अपनी क़ुदरत और अपने अज़ाब से डराते हुए बंदों को समझाया है कि वह जब चाहे तुम्हें सज़ा दे सकता है, और कोई तुम्हें उसके अज़ाब से नहीं बचा सकता।

याद रखो, अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है। जब वह किसी क़ौम को पकड़ता है, तो कोई उसे रोक नहीं सकता। इसलिए ऐ इंसान! अपने रब की नेअमतों का शुक्र अदा कर, उसकी नाफ़रमानी से बच, और यह न समझ कि समुद्र से बच निकलने के बाद तू पूरी तरह सुरक्षित हो गया है। अल्लाह की पकड़ से बचने के लिए सिर्फ एक ही रास्ता है—उसकी ओर रुजू करना, उससे माफ़ी माँगना और उसकी इबादत पर स्थिर रहना। यही सच्ची कामयाबी है, और यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत दोनों की बेहतरी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 67-71 — अल-इसरा

67وَإِذَا مَسَّكُمُ الضُّرُّ فِي الْبَحْرِ ضَلَّ مَن تَدْعُونَ إِلَّا إِيَّاهُ ۖ فَلَمَّا نَجَّاكُمْ إِلَى الْبَرِّ أَعْرَضْتُمْ ۚ وَكَانَ الْإِنسَانُ كَفُورًا
और जब समन्दर में कभी तुम को कोई तकलीफ पहुँचे तो जिनकी तुम इबादत किया करते थे ग़ायब हो गए मगर बस वही (एक ख़ुदा याद रहता है) उस पर भी जब ख़ुदा ने तुम को छुटकारा देकर खुशकी तक पहुँचा दिया तो फिर तुम इससे मुँह मोड़ बैठें और इन्सान बड़ा ही नाशुक्रा है
68أَفَأَمِنتُمْ أَن يَخْسِفَ بِكُمْ جَانِبَ الْبَرِّ أَوْ يُرْسِلَ عَلَيْكُمْ حَاصِبًا ثُمَّ لَا تَجِدُوا لَكُمْ وَكِيلًا
तो क्या तुम उसको इस का भी इत्मिनान हो गया कि वह तुम्हें खुश्की की तरफ (ले जाकर) (क़ारुन की तरह) ज़मीन में धंसा दे या तुम पर (क़ौम) लूत की तरह पत्थरों का मेंह बरसा दे फिर (उस वक्त) तुम किसी को अपना कारसाज़ न पाओगे
69أَمْ أَمِنتُمْ أَن يُعِيدَكُمْ فِيهِ تَارَةً أُخْرَىٰ فَيُرْسِلَ عَلَيْكُمْ قَاصِفًا مِّنَ الرِّيحِ فَيُغْرِقَكُم بِمَا كَفَرْتُمْ ۙ ثُمَّ لَا تَجِدُوا لَكُمْ عَلَيْنَا بِهِ تَبِيعًا
या तुमको इसका भी इत्मेनान हो गया कि फिर तुमको दोबारा इसी समन्दर में ले जाएगा उसके बाद हवा का एक ऐसा झोका जो (जहाज़ के) परख़चे उड़ा दे तुम पर भेजे फिर तुम्हें तुम्हारे कुफ्र की सज़ा में डुबा मारे फिर तुम किसी को (ऐसा हिमायती) न पाओगे जो हमारा पीछा करे और (तुम्हें छोड़ा जाए)
70۞ وَلَقَدْ كَرَّمْنَا بَنِي آدَمَ وَحَمَلْنَاهُمْ فِي الْبَرِّ وَالْبَحْرِ وَرَزَقْنَاهُم مِّنَ الطَّيِّبَاتِ وَفَضَّلْنَاهُمْ عَلَىٰ كَثِيرٍ مِّمَّنْ خَلَقْنَا تَفْضِيلًا
और हमने यक़ीनन आदम की औलाद को इज्ज़त दी और खुश्की और तरी में उनको (जानवरों कश्तियों के ज़रिए) लिए लिए फिरे और उन्हें अच्छी अच्छी चीज़ें खाने को दी और अपने बहुतेरे मख़लूक़ात पर उनको अच्छी ख़ासी फज़ीलत दी
71يَوْمَ نَدْعُو كُلَّ أُنَاسٍ بِإِمَامِهِمْ ۖ فَمَنْ أُوتِيَ كِتَابَهُ بِيَمِينِهِ فَأُولَٰئِكَ يَقْرَءُونَ كِتَابَهُمْ وَلَا يُظْلَمُونَ فَتِيلًا
उस दिन (को याद करो) जब हम तमाम लोगों को उन पेशवाओं के साथ बुलाएँगें तो जिसका नामए अमल उनके दाहिने हाथ में दिया जाएगा तो वह लोग (खुश खुश) अपना नामए अमल पढ़ने लगेगें और उन पर रेशा बराबर ज़ुल्म नहीं किया जाएगा
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीRevelation
69आयत

अनुवाद — अल-इसरा 69

सूरा अल-इसरा आयत 69 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : या तुमको इसका भी इत्मेनान हो गया कि फिर तुमको…

सूरा आयत 69/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 67–71. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए