Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُدْخَلَ صِدْقٍ — सच्चाई और भलाई के साथ प्रवेश (ऐसा प्रवेश जो सत्य और ईमानदारी पर हो)।
- مُخْرَجَ صِدْقٍ — सच्चाई और भलाई के साथ निकास (ऐसा निकास जो सत्य और ईमानदारी पर हो)।
- سُلْطَانًا نَّصِيرًا — ऐसा प्रमाण या शक्ति जो मेरी सहायता करे (दृढ़ हुज्जत और मददगार ताकत)।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हिदायत दे रहा है कि आप दुआ करें: "ऐ मेरे रब! मुझे सच्चाई और भलाई के साथ दाखिल कर, और सच्चाई और भलाई के साथ निकाल।" यानी जहाँ भी मैं जाऊँ, जिस काम में भी प्रवेश करूँ, जिस शहर या मैदान में कदम रखूँ, वह सब कुछ तेरी रज़ा और तेरी इताअत के लिए हो। मेरा हर दाखिला और हर निकास सच्चाई, ईमानदारी और तेरी मर्ज़ी के मुताबिक हो — न कि दिखावे या मतलब के लिए। यह दुआ सिखाई गई ताकि इंसान की ज़िंदगी का हर पहलू — चाहे वह घर में दाखिल होना हो, मस्जिद में जाना हो, सफर पर निकलना हो या किसी ज़िम्मेदारी को संभालना हो — सब कुछ अल्लाह की रज़ा की तलब में हो।
फिर अल्लाह ने यह भी सिखाया कि आप दुआ करें: "ऐ मेरे रब! मुझे अपनी तरफ से एक ऐसा सुल्तान (प्रमाण और शक्ति) अता फरमा जो मेरी मदद करे।" यानी एक ऐसी दलील और हुज्जत जो मेरे दुश्मनों के मुकाबले में मेरी सहायता करे, और एक ऐसी ताकत जो सच्चाई को क़ायम करने और बातिल को मिटाने में मेरा साथ दे। यह सुल्तान सिर्फ ज़ाहिरी ताकत नहीं है, बल्कि इसमें इल्म, हिकमत, सच्चाई का जोश और अल्लाह की नुसरत सब शामिल है।
इस आयत में अल्लाह ने अपने नबी को मक्का से मदीना हिजरत के वक्त यह दुआ सिखाई — कि जब आप मक्का से निकलें तो सच्चाई के साथ निकलें, और जब मदीना में दाखिल हों तो सच्चाई के साथ दाखिल हों। यानी हर कदम पर नीयत साफ हो, मकसद सिर्फ अल्लाह की रज़ा हो, और हर अमल में सिद्क (सच्चाई) शामिल हो।
दावती पहलू:
यह दुआ हमारे लिए भी बहुत बड़ी नेमत है। अगर हम इसे अपनी ज़िंदगी में अपना लें — हर काम की शुरुआत में, हर सफर में, हर नए कदम पर — तो हमारी ज़िंदगी बरकत वाली बन जाएगी। यह दुआ हमें सिखाती है कि इंसान को चाहिए कि वह अपने हर अमल को अल्लाह की रज़ा के तहत करे, और अल्लाह से मदद माँगे। जब हम सच्चाई के साथ चलेंगे, तो अल्लाह हमें ऐसी ताकत और दलील देगा जो हमें दुनिया और आखिरत में कामयाब करेगी। यह दुआ हमें यह भी सिखाती है कि किसी भी काम में जल्दबाज़ी न करें, बल्कि अल्लाह से हिदायत और नुसरत की दुआ करें, क्योंकि कामयाबी अल्लाह के हाथ में है।
📜 आयत 78-82 — सूरा अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 80
सूरा अल-इसरा आयत 80 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये दुआ माँगा करो कि ऐ मेरे परवरदिगार मुझे…सूरा आयत 80/111 — सूरा अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-इसरा सुनें, सूरा अल-इसरा अनुवाद, सूरा अल-इसरा mp3, सूरा अल-इसरा pdf. आयत 78–82. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


