अल-इसरा · 79/111
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-इसरा
وَمِنَ اللَّيْلِ فَتَهَجَّدْ بِهِ نَافِلَةً لَّكَ عَسَىٰ أَن يَبْعَثَكَ رَبُّكَ مَقَامًا مَّحْمُودًا ۝٧٩
Wa minal laili fatahajjad bihee naafilatal laka `asaaa any yab`asaka Rabbuka Maqaamam Mahmoodaa
📖 हिंदी अर्थ
और रात के ख़ास हिस्से में नमाजे तहज्जुद पढ़ा करो ये सुन्नत तुम्हारी खास फज़ीलत हैं क़रीब है कि क़यामत के दिन ख़ुदा तुमको मक़ामे महमूद तक पहुँचा दे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • تَهَجَّدْ: रात को नींद से उठकर नमाज़ पढ़ना। यह विशेष रूप से उस नमाज़ के लिए है जो सोने के बाद रात में पढ़ी जाए।
  • نَافِلَةً: अतिरिक्त (नफ़्ल) इबादत, जो फ़र्ज़ (अनिवार्य) नमाज़ों के अलावा हो।
  • مَقَامًا مَّحْمُودًا: वह प्रशंसित स्थान (मुक़ाम-ए-महमूद), जिसका अर्थ है शफ़ाअत (सिफ़ारिश) का महान पद।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! रात के कुछ हिस्से में नींद से उठो और क़ुरआन पढ़ते हुए नमाज़ अदा करो। यह रात की नमाज़ (तहज्जुद) तुम्हारे लिए अतिरिक्त (नफ़्ल) इबादत है, जो तुम्हारे दर्जे को बुलंद करने और तुम्हारी शान बढ़ाने का ज़रिया है। यह नमाज़ तुम्हारे लिए ख़ास है, क्योंकि यह तुम्हारे रुत्बे को और ऊँचा करती है। अल्लाह तआला का वादा है कि वह तुम्हें क़यामत के दिन ऐसे प्रशंसित स्थान पर खड़ा करेगा, जहाँ हर कोई—पहले और आख़िरी के लोग—तुम्हारी तारीफ़ करेंगे। वह दिन होगा जब सारे लोग मुसीबत में होंगे और हर नबी शफ़ाअत से इनकार कर देगा, लेकिन तुम्हें वह महान अधिकार दिया जाएगा कि तुम लोगों की सिफ़ारिश करो और उन्हें उस भयानक दिन की तकलीफ़ों से राहत दिलाओ। यही वह मुक़ाम-ए-महमूद है, जिसकी वजह से तुम्हें सारी मख़लूक़ात से बढ़कर इज़्ज़त हासिल होगी।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि रात की नमाज़ (तहज्जुद) कितनी बड़ी फज़ीलत रखती है। यह सिर्फ़ नबी ﷺ के लिए ख़ास नहीं थी, बल्कि हर मोमिन के लिए एक बेहतरीन अमल है जो अल्लाह से क़ुर्बत का ज़रिया बनती है। जब हम रात को उठकर अल्लाह से बातें करते हैं, तो हमारा दिल साफ़ होता है, हमारे गुनाह माफ़ होते हैं और हमारे दर्जे बुलंद होते हैं। यह वह समय है जब अल्लाह अपने बंदों के क़रीब होता है और उनकी दुआएँ क़बूल करता है। आइए, हम भी इस सुन्नत को अपनाएँ और रात की नमाज़ को अपनी ज़िंदगी का हिस्सा बनाएँ, ताकि हम भी उस प्रशंसित स्थान के क़रीब हो सकें और अल्लाह की रहमत के हक़दार बन सकें। याद रखें, अल्लाह ने अपने नबी ﷺ से वादा किया है, और अल्लाह का वादा हमेशा सच्चा होता है।



📜 आयत 77-81 — सूरा अल-इसरा

77سُنَّةَ مَن قَدْ أَرْسَلْنَا قَبْلَكَ مِن رُّسُلِنَا ۖ وَلَا تَجِدُ لِسُنَّتِنَا تَحْوِيلًا
तुमसे पहले जितने रसूल हमने भेजे हैं उनका बराबर यही दस्तूर रहा है और जो दस्तूर हमारे (ठहराए हुए) हैं उनमें तुम तग्य्युर तबद्दुल (रद्दो बदल) न पाओगे
78أَقِمِ الصَّلَاةَ لِدُلُوكِ الشَّمْسِ إِلَىٰ غَسَقِ اللَّيْلِ وَقُرْآنَ الْفَجْرِ ۖ إِنَّ قُرْآنَ الْفَجْرِ كَانَ مَشْهُودًا
(ऐ रसूल) सूरज के ढलने से रात के अंधेरे तक नमाज़े ज़ोहर, अस्र, मग़रिब, इशा पढ़ा करो और नमाज़ सुबह (भी) क्योंकि सुबह की नमाज़ पर (दिन और रात दोनों के फरिश्तों की) गवाही होती है
79وَمِنَ اللَّيْلِ فَتَهَجَّدْ بِهِ نَافِلَةً لَّكَ عَسَىٰ أَن يَبْعَثَكَ رَبُّكَ مَقَامًا مَّحْمُودًا
और रात के ख़ास हिस्से में नमाजे तहज्जुद पढ़ा करो ये सुन्नत तुम्हारी खास फज़ीलत हैं क़रीब है कि क़यामत के दिन ख़ुदा तुमको मक़ामे महमूद तक पहुँचा दे
80وَقُل رَّبِّ أَدْخِلْنِي مُدْخَلَ صِدْقٍ وَأَخْرِجْنِي مُخْرَجَ صِدْقٍ وَاجْعَل لِّي مِن لَّدُنكَ سُلْطَانًا نَّصِيرًا
और ये दुआ माँगा करो कि ऐ मेरे परवरदिगार मुझे (जहाँ) पहुँचा अच्छी तरह पहुँचा और मुझे (जहाँ से निकाल) तो अच्छी तरह निकाल और मुझे ख़ास अपनी बारगाह से एक हुकूमत अता फरमा जिस से (हर क़िस्म की) मदद पहुँचे
81وَقُلْ جَاءَ الْحَقُّ وَزَهَقَ الْبَاطِلُ ۚ إِنَّ الْبَاطِلَ كَانَ زَهُوقًا
और (ऐ रसूल) कह दो कि (दीन) हक़ आ गया और बातिल नेस्तनाबूद हुआ इसमें शक़ नहीं कि बातिल मिटने वाला ही था
अल-इसराकुरान सूची
111आयत
मक्कीअवतरण स्थान
79आयत

अनुवाद — अल-इसरा 79

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Thursday, October 1, 2026

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