अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- الْحَقُّ (अल-हक़्क़): सत्य, इस्लाम, वह चीज़ जो स्थिर और क़ायम हो।
- زَهَقَ (ज़हक़ा): नष्ट हो गया, मिट गया, जाता रहा।
- الْبَاطِلُ (अल-बातिल): असत्य, शिर्क, कुफ़्र, वह चीज़ जो टिकने वाली न हो।
- زَهُوقًا (ज़हूक़न): नष्ट होने वाला, मिट जाने वाला, जिसका कोई ठिकाना न हो।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन मुशरिकों से कह दीजिए कि "सत्य आ गया" — यानी इस्लाम का नूर फैल गया, ईमान की रोशनी ने दिलों को मुनव्वर कर दिया, और अल्लाह का वादा पूरा हो गया जो उसने अपने नबी से किया था। और "असत्य मिट गया" — यानी शिर्क और कुफ़्र का अंधेरा छंट गया, बुतों की पूजा का दौर खत्म हुआ, और बातिल की जड़ें उखड़ गईं।
फिर अल्लाह तआला इस हक़ीक़त को एक आम क़ानून के तौर पर बयान करते हैं: "बेशक बातिल मिटने वाला ही है।" यानी असत्य की फ़ितरत ही यह है कि वह टिकाऊ नहीं होता। जिस तरह झाग पानी की सतह पर कुछ देर के लिए उभरता है और फिर ग़ायब हो जाता है, उसी तरह बातिल चाहे कितना भी तूफ़ान खड़ा कर ले, आख़िरकार उसे मिटना ही है। लेकिन सत्य — यानी अल्लाह का दीन — पानी की तरह है जो ज़मीन को सींचता है और हमेशा बहता रहता है। सत्य की मिसाल उस ज़मीन जैसी है जो फ़ायदा पहुँचाती है और बाक़ी रहती है, जबकि बातिल उस झाग जैसा है जो जल्द ही ग़ायब हो जाता है।
यह आयत हमें सिखाती है कि सत्य की जीत तय है, चाहे कितनी ही देर क्यों न लगे। इतिहास गवाह है कि हर ज़माने में बातिल ने पूरी ताक़त लगाई, लेकिन आख़िरकार हारा। और सत्य — चाहे उसके पैरोकार कम हों — हमेशा सरबुलंद रहा। यही अल्लाह का क़ानून है जो कभी नहीं बदलता।
दावती पहलू:
इस आयत में मोमिन के लिए बड़ी ख़ुशख़बरी और तसल्ली है। जब आप देखते हैं कि बुराई और फ़साद बढ़ रहा है, तो निराश न हों। याद रखें — बातिल चाहे कितना भी शोर मचाए, उसका अंजाम मिटना ही है। सत्य की रोशनी चाहे कितनी ही देर से फैले, उसे फैलना ही है। इसलिए हमें सत्य पर डटे रहना चाहिए, क़ुरआन और सुन्नत को थामे रहना चाहिए, और यक़ीन रखना चाहिए कि अल्लाह का वादा सच्चा है। जो लोग सत्य का साथ देते हैं, वही कामयाब हैं, और जो बातिल से चिपके रहते हैं, वे आख़िरकार नुक़सान उठाते हैं। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हम अपने अंदर के बातिल — यानी बुराइयों और गुनाहों — को भी मिटाएँ और सत्य — यानी ईमान और नेकी — को अपने दिलों में जगह दें। जब सच्चाई दिल में उतरती है, तो झूठ और धोखा अपने आप निकल जाता है।
📜 आयत 79-83 — अल-इसरा
अनुवाद — अल-इसरा 81
सूरा अल-इसरा आयत 81 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) कह दो कि (दीन) हक़ आ गया…सूरा आयत 81/111 — अल-इसरा الإسراء (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-इसरा सुनें, अल-इसरा अनुवाद, अल-इसरा mp3, अल-इसरा pdf. आयत 79–83. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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