अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آتَتْ أُكُلَهَا: अपना फल दिया, अर्थात भरपूर फल प्रदान किया।
- وَلَمْ تَظْلِمْ: और कमी नहीं की, अर्थात किसी भी प्रकार की कमी नहीं हुई।
- وَفَجَّرْنَا: और हमने फोड़कर बहाया, अर्थात ज़मीन को चीरकर निकाला।
- خِلَالَهُمَا: दोनों के बीच में, अर्थात दोनों बागों के मध्य से।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत उस व्यक्ति के दो बागों का वर्णन करती है जिसे अल्लाह ने अपार धन-दौलत और भरपूर फल-फूल दिए थे। अल्लाह तआला फरमाता है कि उन दोनों बागों में से हर एक ने अपना फल पूरा-पूरा दिया, और उसमें कोई कमी नहीं हुई। यानी खजूर, अंगूर, अनाज और अन्य फल इतनी प्रचुर मात्रा में पैदा हुए कि किसी चीज़ की कमी नज़र नहीं आई। फिर अल्लाह ने अपनी कुदरत से दोनों बागों के बीच एक नहर जारी कर दी, जो उन्हें सींचती थी, ताकि पानी की कोई कमी न हो और बागों की रौनक और खूबसूरती और बढ़ जाए।
यह अल्लाह की अपने बंदे पर असीम मेहरबानी का प्रतीक है कि उसने उसे न सिर्फ़ ज़मीन दी, बल्कि उसमें फल पैदा करने की ताक़त भी दी, और पानी का इंतज़ाम भी किया। यह उस इंसान के लिए एक बड़ी नेमत थी, लेकिन अफ़सोस कि उसने इस नेमत का शुक्र अदा नहीं किया और अपने रब की नेमतों पर घमंड कर बैठा।
इस आयत से हमें सबक मिलता है कि अल्लाह की दी हुई नेमतें हमारे लिए इम्तिहान हैं। हमें चाहिए कि जब अल्लाह हमें धन, फल, पानी और सुख-सुविधाएँ दे, तो हम उसका शुक्र अदा करें, उसकी नेमतों को अपने अहंकार का ज़रिया न बनाएँ, बल्कि उसे अल्लाह की देन समझकर उसके हुक्म के मुताबिक इस्तेमाल करें। याद रखें, जो शख्स अल्लाह का शुक्र अदा करता है, अल्लाह उसे और नेमतें देता है, और जो कृतघ्न होता है, वह अपनी नेमतें खो बैठता है। अल्लाह हमें शुक्रगुज़ार बंदे बनाए, आमीन।
📜 आयत 31-35 — अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 33
सूरा अल-कहफ आयत 33 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : वह दोनों बाग़ खूब फल लाए और फल लाने में…सूरा आयत 33/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 31–35. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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