अल-कहफ · 37/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
قَالَ لَهُ صَاحِبُهُ وَهُوَ يُحَاوِرُهُ أَكَفَرْتَ بِالَّذِي خَلَقَكَ مِن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ سَوَّاكَ رَجُلًا ۝٣٧
Qaala lahoo saahibuhoo wa huwa yuhaawiruhooo akafarta billazee khalaqaka min turaabin summa min nutfatin summa sawwaaka rajulaa
📖 हिंदी अर्थ
उसका साथी जो उससे बातें कर रहा था कहने लगा कि क्या तू उस परवरदिगार का मुन्किर है जिसने (पहले) तुझे मिट्टी से पैदा किया फिर नुत्फे से फिर तुझे बिल्कुल ठीक मर्द (आदमी) बना दिया
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • صَاحِبُهُ (उसका साथी): उसका मोमिन साथी।
  • يُحَاوِرُهُ (उससे बातचीत कर रहा था): उससे वार्तालाप और बहस कर रहा था।
  • أَكَفَرْتَ (क्या तूने कुफ्र किया): क्या तूने इनकार किया।
  • مِن تُرَابٍ (मिट्टी से): तेरे मूल की शुरुआत मिट्टी से हुई।
  • نُطْفَةٍ (नुत्फ़ा): पुरुष और स्त्री का वीर्य/बूंद।
  • سَوَّاكَ (तुझे बनाया/संवारा): तुझे सही आकार और संतुलन दिया।
  • رَجُلًا (पुरुष): पूर्ण इंसान, नर।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह वह दृश्य है जब वह धनवान व्यक्ति अपने गर्व और घमंड में अपने मोमिन साथी से कह रहा था कि मेरा धन और ताकत तेरे ईमान से बेहतर है। उसका साथी, जो अल्लाह पर ईमान रखता था, उसे नसीहत करते हुए कहता है: "क्या तूने उस अल्लाह का इनकार कर दिया जिसने तुझे मिट्टी से पैदा किया, फिर नुत्फ़े (वीर्य की बूंद) से, फिर तुझे एक पूर्ण और संतुलित इंसान बनाया?"

यानी, उस मोमिन साथी ने उसे उसकी अपनी पैदाइश की याद दिलाई — कि तू कितना कमज़ोर और असमर्थ था। पहले तू मिट्टी था, फिर एक छोटी सी बूंद, फिर अल्लाह ने तुझे इस खूबसूरत और सही आकार में ढाला। तुझे हाथ, पैर, आँखें, कान, दिमाग और समझ दी। क्या वही अल्लाह, जो तुझे इस तरह बनाने पर क़ादिर था, तुझे दोबारा ज़िंदा करके हिसाब लेने पर क़ादिर नहीं है?

यह बात उस मोमिन ने इसलिए कही ताकि उस धनवान को उसके घमंड से निकाले और उसे यक़ीन दिलाए कि अल्लाह की क़ुदरत (शक्ति) के आगे तेरा धन और तेरी औलाद कुछ भी नहीं। जो अल्लाह पहली बार पैदा कर सकता है, वह दोबारा पैदा करने पर भी पूरी तरह क़ादिर है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को कभी अपने धन, रुतबे या ताकत पर घमंड नहीं करना चाहिए। हमारी पैदाइश की शुरुआत एक बेहद कमज़ोर चीज़ से हुई थी — मिट्टी और एक बूंद। यह हमारे लिए अल्लाह की क़ुदरत की सबसे बड़ी निशानी है। जब हम अपनी पैदाइश पर ग़ौर करेंगे, तो हमें यक़ीन होगा कि अल्लाह हर चीज़ पर क़ादिर है, और उसी की तरफ हमें लौटकर जाना है। यह ईमान की मज़बूती और अल्लाह के प्रति विनम्रता का सबसे अच्छा ज़रिया है। आइए, हम अपने रब की नेमतों को याद करें और उसके आगे सिर झुकाएँ — क्योंकि वही हमारा ख़ालिक़ (पैदा करने वाला) और रिज़्क़ देने वाला है।

🎧 सुनें

📜 आयत 35-39 — अल-कहफ

35وَدَخَلَ جَنَّتَهُ وَهُوَ ظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ قَالَ مَا أَظُنُّ أَن تَبِيدَ هَٰذِهِ أَبَدًا
और ये बातें करता हुआ अपने बाग़ मे भी जा पहुँचा हालॉकि उसकी आदत ये थी कि (कुफ्र की वजह से) अपने ऊपर आप ज़ुल्म कर रहा था (ग़रज़ वह कह बैठा) कि मुझे तो इसका गुमान नहीं तो कि कभी भी ये बाग़ उजड़ जाए
36وَمَا أَظُنُّ السَّاعَةَ قَائِمَةً وَلَئِن رُّدِدتُّ إِلَىٰ رَبِّي لَأَجِدَنَّ خَيْرًا مِّنْهَا مُنقَلَبًا
और मै तो ये भी नहीं ख्याल करता कि क़यामत क़ायम होगी और (बिलग़रज़ हुई भी तो) जब मै अपने परवरदिगार की तरफ लौटाया जाऊँगा तो यक़ीनन इससे कहीं अच्छी जगह पाऊँगा
37قَالَ لَهُ صَاحِبُهُ وَهُوَ يُحَاوِرُهُ أَكَفَرْتَ بِالَّذِي خَلَقَكَ مِن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ سَوَّاكَ رَجُلًا
उसका साथी जो उससे बातें कर रहा था कहने लगा कि क्या तू उस परवरदिगार का मुन्किर है जिसने (पहले) तुझे मिट्टी से पैदा किया फिर नुत्फे से फिर तुझे बिल्कुल ठीक मर्द (आदमी) बना दिया
38لَّٰكِنَّا هُوَ اللَّهُ رَبِّي وَلَا أُشْرِكُ بِرَبِّي أَحَدًا
हम तो (कहते हैं कि) वही ख़ुदा मेरा परवरदिगार है और मै तो अपने परवरदिगार का किसी को शरीक नहीं बनाता
39وَلَوْلَا إِذْ دَخَلْتَ جَنَّتَكَ قُلْتَ مَا شَاءَ اللَّهُ لَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ ۚ إِن تَرَنِ أَنَا أَقَلَّ مِنكَ مَالًا وَوَلَدًا
और जब तू अपने बाग़ में आया तो (ये) क्यों न कहा कि ये सब (माशा अल्लाह ख़ुदा ही के चाहने से हुआ है (मेरा कुछ भी नहीं क्योंकि) बग़ैर ख़ुदा की (मदद) के (किसी में) कुछ सकत नहीं अगर माल और औलाद की राह से तू मुझे कम समझता है
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अनुवाद — अल-कहफ 37

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Tuesday, August 18, 2026

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