अल-कहफ · 36/110
अनुवाद उच्चारण — अल-कहफ
وَمَا أَظُنُّ السَّاعَةَ قَائِمَةً وَلَئِن رُّدِدتُّ إِلَىٰ رَبِّي لَأَجِدَنَّ خَيْرًا مِّنْهَا مُنقَلَبًا ۝٣٦
Wa maaa azunnus Saa`ata qaaa`imatanw wa la`ir rudittu ilaa Rabbee la ajidanna khairam minhaa munqalabaa
📖 हिंदी अर्थ
और मै तो ये भी नहीं ख्याल करता कि क़यामत क़ायम होगी और (बिलग़रज़ हुई भी तो) जब मै अपने परवरदिगार की तरफ लौटाया जाऊँगा तो यक़ीनन इससे कहीं अच्छी जगह पाऊँगा
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • السَّاعَةَ قَائِمَةً – क़ियामत का आना, प्रलय का घटित होना
  • رُدِدْتُ – मैं लौटाया गया, मैं पुनर्जीवित किया गया
  • مُنْقَلَبًا – लौटने की जगह, अंतिम ठिकाना, पलटकर जाने का स्थान

व्याख्या:

यह आयत उस अमीर व्यक्ति की बात बयान कर रही है जिसने अपने बगीचे पर घमंड किया और अपने ईमानवाले साथी से झगड़ा किया। वह अपने आप पर ज़ुल्म करते हुए अपने बगीचे में दाखिल हुआ, क्योंकि उसने क़ियामत के दिन को झुठलाया और उसके आने पर शक किया। उसने कहा: "मैं नहीं समझता कि यह बगीचा कभी खत्म होगा, और न ही मैं यह मानता हूँ कि क़ियामत कभी आएगी। और अगर — जैसा तुम कहते हो — मुझे अपने रब की तरफ लौटाया गया, तो मुझे यक़ीन है कि मुझे इस बगीचे से भी बेहतर ठिकाना मिलेगा, क्योंकि मैं उसकी नज़रों में इज़्ज़त वाला हूँ।"

यह व्यक्ति दुनिया की दौलत पर इतना मगरूर था कि उसे यक़ीन था कि उसकी दुनियावी कामयाबी आख़िरत में भी उसके साथ रहेगी। उसने यह नहीं सोचा कि दुनिया की दौलत आख़िरत के इनाम की गारंटी नहीं है, बल्कि असली कामयाबी तो अल्लाह के हुक्मों पर चलने में है। उसकी यह सोच पूरी तरह ग़लत थी, क्योंकि अल्लाह ने दुनिया में जो कुछ दिया है, वह इम्तिहान के लिए है, इज़्ज़त की निशानी नहीं।

दावती पहलू:

यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि दौलत और दुनियावी चीज़ें कभी भी इंसान को अल्लाह के यहाँ बड़ाई नहीं दिला सकतीं। अल्लाह के पास असली इज़्ज़त तो ईमान, अच्छे आमाल और उसकी राह में खर्च करने से मिलती है। हमें चाहिए कि हम दुनिया की चमक-दमक पर घमंड न करें, बल्कि अल्लाह की नेमतों का शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में लगे रहें। याद रखें, क़ियामत का दिन सच है और हर इंसान को अपने अमाल का हिसाब देना है। जो लोग दुनिया में अल्लाह के साथ अच्छा रिश्ता रखते हैं, उन्हें आख़िरत में बेहतरीन इनाम मिलेगा, और जो दुनिया के धोखे में रहेंगे, उनका अंजाम बहुत बुरा होगा। अल्लाह से दुआ है कि हमें दुनिया के फरेब से बचाए और आख़िरत की भलाई अता करे।

🎧 सुनें

📜 आयत 34-38 — अल-कहफ

34وَكَانَ لَهُ ثَمَرٌ فَقَالَ لِصَاحِبِهِ وَهُوَ يُحَاوِرُهُ أَنَا أَكْثَرُ مِنكَ مَالًا وَأَعَزُّ نَفَرًا
और उसे फल मिला तो अपने साथी से जो उससे बातें कर रहा था बोल उठा कि मै तो तुझसे माल में (भी) ज्यादा हूँ और जत्थे में भी बढ़ कर हूँ
35وَدَخَلَ جَنَّتَهُ وَهُوَ ظَالِمٌ لِّنَفْسِهِ قَالَ مَا أَظُنُّ أَن تَبِيدَ هَٰذِهِ أَبَدًا
और ये बातें करता हुआ अपने बाग़ मे भी जा पहुँचा हालॉकि उसकी आदत ये थी कि (कुफ्र की वजह से) अपने ऊपर आप ज़ुल्म कर रहा था (ग़रज़ वह कह बैठा) कि मुझे तो इसका गुमान नहीं तो कि कभी भी ये बाग़ उजड़ जाए
36وَمَا أَظُنُّ السَّاعَةَ قَائِمَةً وَلَئِن رُّدِدتُّ إِلَىٰ رَبِّي لَأَجِدَنَّ خَيْرًا مِّنْهَا مُنقَلَبًا
और मै तो ये भी नहीं ख्याल करता कि क़यामत क़ायम होगी और (बिलग़रज़ हुई भी तो) जब मै अपने परवरदिगार की तरफ लौटाया जाऊँगा तो यक़ीनन इससे कहीं अच्छी जगह पाऊँगा
37قَالَ لَهُ صَاحِبُهُ وَهُوَ يُحَاوِرُهُ أَكَفَرْتَ بِالَّذِي خَلَقَكَ مِن تُرَابٍ ثُمَّ مِن نُّطْفَةٍ ثُمَّ سَوَّاكَ رَجُلًا
उसका साथी जो उससे बातें कर रहा था कहने लगा कि क्या तू उस परवरदिगार का मुन्किर है जिसने (पहले) तुझे मिट्टी से पैदा किया फिर नुत्फे से फिर तुझे बिल्कुल ठीक मर्द (आदमी) बना दिया
38لَّٰكِنَّا هُوَ اللَّهُ رَبِّي وَلَا أُشْرِكُ بِرَبِّي أَحَدًا
हम तो (कहते हैं कि) वही ख़ुदा मेरा परवरदिगार है और मै तो अपने परवरदिगार का किसी को शरीक नहीं बनाता
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीRevelation
36आयत

अनुवाद — अल-कहफ 36

सूरा अल-कहफ आयत 36 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और मै तो ये भी नहीं ख्याल करता कि क़यामत…

सूरा आयत 36/110 — अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-कहफ सुनें, अल-कहफ अनुवाद, अल-कहफ mp3, अल-कहफ pdf. आयत 34–38. हिंदी अर्थ: اردو.




पवित्र क़ुरआन


Tuesday, August 18, 2026

अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए