अल-कहफ · 4/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
وَيُنذِرَ الَّذِينَ قَالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا ۝٤
Wa yunziral lazeena qaalut takhazal laahu waladaa
📖 हिंदी अर्थ
और जो लोग इसके क़ाएल हैं कि ख़ुदा औलाद रखता है उनको (अज़ाब से) डराओ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُنذِرَ: डराना, सचेत करना, चेतावनी देना।
  • اتَّخَذَ: बनाया, ठहराया, कहा।
  • وَلَدًا: बेटा, संतान।

व्याख्या:

यह आयत उन लोगों को चेतावनी देती है जिन्होंने अल्लाह के बारे में सबसे बड़ा झूठ और सबसे गंभीर अपमान किया — यह कहा कि अल्लाह ने किसी को अपना बेटा बनाया है। यह वही बात है जो कुछ लोगों ने कही: यहूदियों ने उज़ैर (अलैहिस्सलाम) के बारे में, ईसाइयों ने ईसा (अलैहिस्सलाम) के बारे में, और कुछ अरब मुशरिकों ने फ़रिश्तों के बारे में। ये तीनों समूह अल्लाह की पवित्रता के खिलाफ यह भयानक आरोप लगाने में एक जैसे थे।

अल्लाह तआला ने इस आयत में साफ़ कर दिया कि यह क़ुरआन सिर्फ़ अच्छी खबर देने के लिए नहीं आया, बल्कि उन लोगों को डराने के लिए भी आया है जो अल्लाह के बारे में ऐसी बातें कहते हैं जो उसकी शान के लायक़ नहीं। अल्लाह हर कमी और हर दोष से पाक है — वह न तो किसी का बेटा है और न ही उसका कोई बेटा है। वह अकेला है, बेनियाज़ है, और सारी मख़लूक़ात उसकी मोहताज है।

यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की ज़ात के बारे में सोचते समय हमें पूरी तरह से उसकी पाकी और बुज़ुर्गी का ख़याल रखना चाहिए। जो लोग अल्लाह के बारे में ग़लत अक़ीदा रखते हैं, उनके लिए अल्लाह की तरफ़ से सख़्त चेतावनी है। यह चेतावनी सिर्फ़ डराने के लिए नहीं है, बल्कि उन्हें सच्चाई की तरफ़ लौटने का मौक़ा देने के लिए है, ताकि वे अपने ग़लत विश्वासों से तौबा करें और सीधे रास्ते पर आ जाएँ।

इस आयत से हमें यह भी सबक़ मिलता है कि अल्लाह के बारे में बिना इल्म के बात करना कितना बड़ा गुनाह है। एक मुसलमान को चाहिए कि वह अल्लाह की ज़ात, उसके नामों और उसकी सिफ़ात के बारे में वही बातें कहे जो क़ुरआन और सही हदीस में आई हैं, और किसी भी ऐसी बात से बचे जो अल्लाह की शान के खिलाफ़ हो। अल्लाह तआला अपने बंदों पर बहुत मेहरबान है — उसने हमें सच्चाई बताई और ग़लत रास्तों से बचाया, ताकि हम दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब हों।



📜 आयत 2-6 — सूरा अल-कहफ

2قَيِّمًا لِّيُنذِرَ بَأْسًا شَدِيدًا مِّن لَّدُنْهُ وَيُبَشِّرَ الْمُؤْمِنِينَ الَّذِينَ يَعْمَلُونَ الصَّالِحَاتِ أَنَّ لَهُمْ أَجْرًا حَسَنًا
बल्कि हर तरह से सधा ताकि जो सख्त अज़ाब ख़ुदा की बारगाह से काफिरों पर नाज़िल होने वाला है उससे लोगों को डराए और जिन मोमिनीन ने अच्छे अच्छे काम किए हैं उनको इस बात की खुशख़बरी दे की उनके लिए बहुत अच्छा अज्र (व सवाब) मौजूद है
3مَّاكِثِينَ فِيهِ أَبَدًا
जिसमें वह हमेशा (बाइत्मेनान) तमाम रहेगें
4وَيُنذِرَ الَّذِينَ قَالُوا اتَّخَذَ اللَّهُ وَلَدًا
और जो लोग इसके क़ाएल हैं कि ख़ुदा औलाद रखता है उनको (अज़ाब से) डराओ
5مَّا لَهُم بِهِ مِنْ عِلْمٍ وَلَا لِآبَائِهِمْ ۚ كَبُرَتْ كَلِمَةً تَخْرُجُ مِنْ أَفْوَاهِهِمْ ۚ إِن يَقُولُونَ إِلَّا كَذِبًا
न तो उन्हीं को उसकी कुछ खबर है और न उनके बाप दादाओं ही को थी (ये) बड़ी सख्त बात है जो उनके मुँह से निकलती है ये लोग झूठ मूठ के सिवा (कुछ और) बोलते ही नहीं
6فَلَعَلَّكَ بَاخِعٌ نَّفْسَكَ عَلَىٰ آثَارِهِمْ إِن لَّمْ يُؤْمِنُوا بِهَٰذَا الْحَدِيثِ أَسَفًا
तो (ऐ रसूल) अगर ये लोग इस बात को न माने तो यायद तुम मारे अफसोस के उनके पीछे अपनी जान दे डालोगे
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
4आयत

अनुवाद — अल-कहफ 4

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Monday, September 28, 2026

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