अल-कहफ · 70/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
قَالَ فَإِنِ اتَّبَعْتَنِي فَلَا تَسْأَلْنِي عَن شَيْءٍ حَتَّىٰ أُحْدِثَ لَكَ مِنْهُ ذِكْرًا ۝٧٠
Qaala fa init taba`tanee falaa tas`alnee `an shai`in hattaaa uhdisa laka minhu zikraa
📖 हिंदी अर्थ
और मै आपके किसी हुक्म की नाफरमानी न करुँगा खिज्र ने कहा अच्छा तो अगर आप को मेरे साथ रहना है तो जब तक मै खुद आपसे किसी बात का ज़िक्र न छेडँ

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • فَإِنِ اتَّبَعْتَنِي: यदि तुम मेरी संगति करोगे (मेरे साथ चलोगे)।
  • فَلَا تَسْأَلْنِي: तो मुझसे सवाल मत करना।
  • حَتَّى أُحْدِثَ لَكَ مِنْهُ ذِكْرًا: जब तक कि मैं स्वयं उसके बारे में तुम्हें बताना शुरू न कर दूँ (अर्थात, जब तक मैं खुद उसका उल्लेख और व्याख्या न करूँ)।

तफ़सीर (व्याख्या):

जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने हज़रत ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) से यह अनुरोध किया कि वे उन्हें वह ज्ञान सिखाएँ जो अल्लाह ने उन्हें विशेष रूप से प्रदान किया है, तो हज़रत ख़िज़र ने एक शर्त रखी। उन्होंने कहा: "यदि तुम मेरे साथ चलना चाहते हो, तो एक बात का पक्का वादा करो—जो कुछ भी तुम मुझसे देखोगे, उसके बारे में मुझसे कोई सवाल नहीं करोगे, जब तक कि मैं स्वयं उसकी व्याख्या शुरू न कर दूँ।"

यह शर्त बहुत महत्वपूर्ण थी, क्योंकि हज़रत ख़िज़र के कार्य उस ज्ञान पर आधारित थे जो अल्लाह की ओर से ख़ास था, और उनके कार्यों का स्पष्ट अर्थ उसी समय समझ में नहीं आता था। वे चाहते थे कि हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) धैर्य रखें और जल्दबाज़ी न करें, ताकि वे स्वयं सही समय पर हर कार्य की हिकमत (गूढ़ रहस्य) समझा सकें।

इस आयत में हमारे लिए एक बहुत बड़ा सबक है—सब्र (धैर्य) और भरोसे का। कभी-कभी अल्लाह की तरफ से होने वाले मामलों में हमें तुरंत समझ नहीं आती, लेकिन जब हम सब्र करते हैं और अल्लाह पर भरोसा रखते हैं, तो सही समय पर सब कुछ स्पष्ट हो जाता है। यह हमें सिखाता है कि अपने बड़ों, उस्तादों और अल्लाह के नेक बंदों के फैसलों पर आँख बंद करके भरोसा करना चाहिए, क्योंकि उनके पास वह ज्ञान होता है जो हमें नहीं होता।

यह आयत हमें यह भी बताती है कि ज्ञान की तलाश में विनम्रता और आज्ञाकारिता आवश्यक है। हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) जैसे महान नबी ने भी सीखने के लिए यह शर्त कबूल की, तो हमें भी अपने से अधिक ज्ञान रखने वालों से सीखते समय सब्र और अदब का मार्ग अपनाना चाहिए। अल्लाह हमें सच्चा ज्ञान और सब्र अता करे। आमीन।



📜 आयत 68-72 — सूरा अल-कहफ

68وَكَيْفَ تَصْبِرُ عَلَىٰ مَا لَمْ تُحِطْ بِهِ خُبْرًا
और (सच तो ये है) जो चीज़ आपके इल्मी अहाते से बाहर हो
69قَالَ سَتَجِدُنِي إِن شَاءَ اللَّهُ صَابِرًا وَلَا أَعْصِي لَكَ أَمْرًا
उस पर आप सब्र क्योंकर कर सकते हैं मूसा ने कहा (आप इत्मिनान रखिए) अगर ख़ुदा ने चाहा तो आप मुझे साबिर आदमी पाएँगें
70قَالَ فَإِنِ اتَّبَعْتَنِي فَلَا تَسْأَلْنِي عَن شَيْءٍ حَتَّىٰ أُحْدِثَ لَكَ مِنْهُ ذِكْرًا
और मै आपके किसी हुक्म की नाफरमानी न करुँगा खिज्र ने कहा अच्छा तो अगर आप को मेरे साथ रहना है तो जब तक मै खुद आपसे किसी बात का ज़िक्र न छेडँ
71فَانطَلَقَا حَتَّىٰ إِذَا رَكِبَا فِي السَّفِينَةِ خَرَقَهَا ۖ قَالَ أَخَرَقْتَهَا لِتُغْرِقَ أَهْلَهَا لَقَدْ جِئْتَ شَيْئًا إِمْرًا
आप मुझसे किसी चीज़ के बारे में न पूछियेगा ग़रज़ ये दोनो (मिलकर) चल खड़े हुए यहाँ तक कि (एक दरिया में) जब दोनों कश्ती में सवार हुए तो ख़िज्र ने कश्ती में छेद कर दिया मूसा ने कहा (आप ने तो ग़ज़ब कर दिया) क्या कश्ती में इस ग़रज़ से सुराख़ किया है
72قَالَ أَلَمْ أَقُلْ إِنَّكَ لَن تَسْتَطِيعَ مَعِيَ صَبْرًا
कि लोगों को डुबा दीजिए ये तो आप ने बड़ी अजीब बात की है-ख़िज्र ने कहा क्या मैने आप से (पहले ही) न कह दिया था
अल-कहफकुरान सूची
110आयत
मक्कीअवतरण स्थान
70आयत

अनुवाद — अल-कहफ 70

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Thursday, October 1, 2026

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