Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- بَعْدَهَا: इसके बाद (इस घटना के पश्चात)
- فَلَا تُصَاحِبْنِي: तो मेरा साथ छोड़ दो, मुझसे अलग हो जाओ
- مِن لَّدُنِّي: मेरी ओर से, मेरे पास से
- عُذْرًا: बहाना, स्पष्ट कारण (जिससे तुम निर्दोष ठहरो)
तफसीर:
जब हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) ने देखा कि ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) ने उस नाव को छेद दिया, जिसमें सवार लोग मासूम और ग़रीब थे, तो वे इस अप्रत्याशित कार्य को सहन न कर सके और उन्होंने एतराज़ किया। ख़िज़र ने उन्हें याद दिलाया कि मैंने पहले ही कहा था कि आप मेरे साथ सब्र नहीं कर पाएँगे। यह दूसरी बार था जब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने सब्र नहीं किया। तब मूसा (अलैहिस्सलाम) ने स्वयं ही कहा: "अगर मैं इसके बाद किसी भी चीज़ के बारे में आपसे सवाल करूँ, तो आप मेरा साथ छोड़ दें। आप मेरी ओर से पूरी तरह निर्दोष हैं, क्योंकि आपने मुझे पहले ही आगाह कर दिया था कि मैं सब्र नहीं कर पाऊँगा।"
यह वाक्य हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) की महानता, नम्रता और इंसाफ़ को दर्शाता है। उन्होंने अपनी ग़लती स्वीकार की और ख़िज़र को बरी कर दिया। यह हमें सिखाता है कि इंसान को चाहिए कि वह अपनी कमियों को माने और दूसरों पर इल्ज़ाम लगाने के बजाय खुद को ज़िम्मेदार ठहराए।
इस आयत से हमें यह भी सबक मिलता है कि इल्म (ज्ञान) के सफ़र में सब्र बहुत ज़रूरी है। कई बार अल्लाह के बंदों के काम हमें अजीब लगते हैं, लेकिन उनके पीछे हिकमत (गहरी समझ) होती है। हमें जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए और अल्लाह के फ़ैसलों पर भरोसा रखना चाहिए। यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि इल्म हासिल करने के लिए अदब, तवाज़ु (विनम्रता) और सब्र तीनों ज़रूरी हैं।
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह के नेक बंदों की ज़िंदगी में हर काम हिकमत से भरा होता है, भले ही वह हमें पहली नज़र में बुरा या अजीब क्यों न लगे। हमें चाहिए कि हम अल्लाह पर भरोसा रखें और उसके फ़ैसलों पर सब्र करें। जो लोग सब्र करते हैं, अल्लाह उन्हें ऐसी हिकमत और समझ देता है जो दुनिया के किसी भी ख़ज़ाने से बेहतर है। आइए, हम अपनी ज़िंदगी में सब्र और शुक्र को अपनाएँ और अल्लाह से हिदायत की दुआ करें।
📜 आयत 74-78 — सूरा अल-कहफ
अनुवाद — अल-कहफ 76
सूरा अल-कहफ आयत 76 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : मूसा ने कहा (ख़ैर जो हुआ वह हुआ) अब अगर…सूरा आयत 76/110 — सूरा अल-कहफ الكهف (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-कहफ सुनें, सूरा अल-कहफ अनुवाद, सूरा अल-कहफ mp3, सूरा अल-कहफ pdf. आयत 74–78. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


