अल-कहफ · 77/110
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-कहफ
فَانطَلَقَا حَتَّىٰ إِذَا أَتَيَا أَهْلَ قَرْيَةٍ اسْتَطْعَمَا أَهْلَهَا فَأَبَوْا أَن يُضَيِّفُوهُمَا فَوَجَدَا فِيهَا جِدَارًا يُرِيدُ أَن يَنقَضَّ فَأَقَامَهُ ۖ قَالَ لَوْ شِئْتَ لَتَّخَذْتَ عَلَيْهِ أَجْرًا ۝٧٧
Fantalaqaa hattaaa izaaa atayaaa ahla qaryatinis tat`amaaa ahlahaa fa abaw any yudaiyifoohumaa fawajadaa feehaa jidaarany yureedu any yanqadda fa aqaamah; qaala law shi`ta lattakhazta `alaihi ajraa
📖 हिंदी अर्थ
ग़रज़ (ये सब हो हुआ कर फिर) दोनों आगे चले यहाँ तक कि जब एक गाँव वालों के पास पहुँचे तो वहाँ के लोगों से कुछ खाने को माँगा तो उन लोगों ने दोनों को मेहमान बनाने से इन्कार कर दिया फिर उन दोनों ने उसी गाँव में एक दीवार को देखा कि गिरा ही चाहती थी तो खिज्र ने उसे सीधा खड़ा कर दिया उस पर मूसा ने कहा अगर आप चाहते तो (इन लोगों से) इसकी मज़दूरी ले सकते थे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • اسْتَطْعَمَا: उन्होंने खाना माँगा।
  • فَأَبَوْا: उन्होंने इनकार किया।
  • يُضَيِّفُوهُمَا: उन्हें अतिथि के रूप में सम्मानित करें।
  • جِدَارًا: दीवार।
  • يُرِيدُ أَنْ يَنقَضَّ: जो गिरने के करीब थी (झुकी हुई)।
  • فَأَقَامَهُ: उसने उसे सीधा कर दिया।
  • لَتَّخَذْتَ عَلَيْهِ أَجْرًا: तुम इस पर मेहनताना ले लेते।

तफसीर (व्याख्या):

फिर मूसा (अलैहिस्सलाम) और ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) आगे बढ़े, यहाँ तक कि वे एक गाँव के निवासियों के पास पहुँचे। उन्होंने वहाँ के लोगों से खाना माँगा, लेकिन उन लोगों ने उन्हें अतिथि के रूप में सम्मानित करने से साफ़ इनकार कर दिया। यह बहुत ही निराशाजनक था कि एक गाँव के लोग दो नेक पैग़म्बरों को भूखा रखें। फिर उन्होंने वहाँ एक दीवार देखी जो झुकी हुई थी और गिरने के कगार पर थी। ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) ने उसे सीधा कर दिया। यह देखकर मूसा (अलैहिस्सलाम) ने कहा: "यदि आप चाहते, तो इस काम पर मेहनताना ले सकते थे, क्योंकि हमें खाने की सख्त ज़रूरत है और इन लोगों ने हमें कुछ नहीं दिया।"

इस आयत में हमें सिखाया गया है कि मुसीबत और ज़रूरत के समय भी इंसान को सब्र और अक्लमंदी से काम लेना चाहिए। मूसा (अलैहिस्सलाम) की यह बात स्वाभाविक थी, लेकिन ख़िज़र (अलैहिस्सलाम) के पास अल्लाह की ओर से विशेष ज्ञान था। यह हमें बताता है कि कभी-कभी हमारी समझ से परे अल्लाह के कुछ फ़ैसले होते हैं, जिनमें बड़ी भलाई छिपी होती है। हमें अपने जीवन में भी अल्लाह पर भरोसा रखना चाहिए और हर परिस्थिति में उसकी रज़ा पर राज़ी रहना चाहिए। यह क़िस्सा हमें सिखाता है कि नेकी और भलाई का काम करते समय दुनियावी मेहनताने की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए, बल्कि अल्लाह की ख़ुशी को सामने रखना चाहिए। अल्लाह हमें सब्र और शुक्र की तौफ़ीक़ अता करे। आमीन।



📜 आयत 75-79 — सूरा अल-कहफ

75۞ قَالَ أَلَمْ أَقُل لَّكَ إِنَّكَ لَن تَسْتَطِيعَ مَعِيَ صَبْرًا
खिज्र ने कहा कि मैंने आपसे (मुक़र्रर) न कह दिया था कि आप मेरे साथ हरगिज़ नहीं सब्र कर सकेगें
76قَالَ إِن سَأَلْتُكَ عَن شَيْءٍ بَعْدَهَا فَلَا تُصَاحِبْنِي ۖ قَدْ بَلَغْتَ مِن لَّدُنِّي عُذْرًا
मूसा ने कहा (ख़ैर जो हुआ वह हुआ) अब अगर मैं आप से किसी चीज़ के बारे में पूछगछ करूँगा तो आप मुझे अपने साथ न रखियेगा बेशक आप मेरी तरफ से माज़रत (की हद को) पहुँच गए
77فَانطَلَقَا حَتَّىٰ إِذَا أَتَيَا أَهْلَ قَرْيَةٍ اسْتَطْعَمَا أَهْلَهَا فَأَبَوْا أَن يُضَيِّفُوهُمَا فَوَجَدَا فِيهَا جِدَارًا يُرِيدُ أَن يَنقَضَّ فَأَقَامَهُ ۖ قَالَ لَوْ شِئْتَ لَتَّخَذْتَ عَلَيْهِ أَجْرًا
ग़रज़ (ये सब हो हुआ कर फिर) दोनों आगे चले यहाँ तक कि जब एक गाँव वालों के पास पहुँचे तो वहाँ के लोगों से कुछ खाने को माँगा तो उन लोगों ने दोनों को मेहमान बनाने से इन्कार कर दिया फिर उन दोनों ने उसी गाँव में एक दीवार को देखा कि गिरा ही चाहती थी तो खिज्र ने उसे सीधा खड़ा कर दिया उस पर मूसा ने कहा अगर आप चाहते तो (इन लोगों से) इसकी मज़दूरी ले सकते थे
78قَالَ هَٰذَا فِرَاقُ بَيْنِي وَبَيْنِكَ ۚ سَأُنَبِّئُكَ بِتَأْوِيلِ مَا لَمْ تَسْتَطِع عَّلَيْهِ صَبْرًا
(ताकि खाने का सहारा होता) खिज्र ने कहा मेरे और आपके दरमियान छुट्टम छुट्टा अब जिन बातों पर आप से सब्र न हो सका मैं अभी आप को उनकी असल हक़ीकत बताए देता हूँ
79أَمَّا السَّفِينَةُ فَكَانَتْ لِمَسَاكِينَ يَعْمَلُونَ فِي الْبَحْرِ فَأَرَدتُّ أَنْ أَعِيبَهَا وَكَانَ وَرَاءَهُم مَّلِكٌ يَأْخُذُ كُلَّ سَفِينَةٍ غَصْبًا
(लीजिए सुनिये) वह कश्ती (जिसमें मैंने सुराख़ कर दिया था) तो चन्द ग़रीबों की थी जो दरिया में मेहनत करके गुज़ारा करते थे मैंने चाहा कि उसे ऐबदार बना दूँ (क्योंकि) उनके पीछे-पीछे एक (ज़ालिम) बादशाह (आता) था कि तमाम कश्तियां ज़बरदस्ती बेगार में पकड़ लेता था
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मक्कीअवतरण स्थान
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अनुवाद — अल-कहफ 77

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Thursday, October 1, 2026

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