मरियम · 48/98
अनुवाद उच्चारण — सूरा मरियम
وَأَعْتَزِلُكُمْ وَمَا تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ وَأَدْعُو رَبِّي عَسَىٰ أَلَّا أَكُونَ بِدُعَاءِ رَبِّي شَقِيًّا ۝٤٨
Wa a`tazilukum wa maa tad`oona min doonil laahi wa ad`o Rabbee `asaaa allaaa akoona bidu`aaa`i Rabbee shaqiyyaa
📖 हिंदी अर्थ
(क्योंकि) बेशक वह मुझ पर बड़ा मेहरबान है और मैंने आप को (भी) और इन बुतों को (भी) जिन्हें आप लोग खुदा को छोड़कर पूजा करते हैं (सबको) छोड़ा और अपने परवरदिगार ही की इबादत करूँगा उम्मीद है कि मैं अपने परवरदिगार की इबादत से महरूम न रहूँगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَأَعْتَزِلُكُمْ: मैं तुमसे अलग हो जाता हूँ, तुम्हारा साथ छोड़ देता हूँ।
  • مَا تَدْعُونَ: जिन्हें तुम पुकारते हो (अर्थात् पूजते हो)।
  • مِن دُونِ اللهِ: अल्लाह के सिवा।
  • وَأَدْعُو رَبِّي: और मैं अपने रब को पुकारता हूँ (उसी की इबादत करता हूँ)।
  • عَسَىٰ: उम्मीद है, आशा है।
  • شَقِيًّا: अभागा, बदनसीब, वंचित।

तफ़सीर (व्याख्या):

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने अपनी क़ौम को स्पष्ट रूप से बता दिया कि वे उनके माबूदों और उनके रास्ते से बिल्कुल बेज़ार हैं। यह आयत उसी सिलसिले की कड़ी है जिसमें वे अपनी क़ौम से अलग होने का एलान कर रहे हैं। वे कहते हैं: "मैं तुमसे और उन सब चीज़ों से अलग हो रहा हूँ जिन्हें तुम अल्लाह के सिवा पुकारते हो—चाहे वे मूर्तियाँ हों, सितारे हों या कोई और। मैंने उनसे कोई वास्ता नहीं रखा।"

फिर वे अपने अकेले रब की ओर रुख करते हैं और कहते हैं: "मैं अपने रब को पुकारूँगा, उसी से माँगूँगा, उसी की इबादत करूँगा।" यह उनके ईमान की गहराई और तौहीद पर उनके अटल यक़ीन का इज़हार है। वे किसी और से उम्मीद नहीं रखते, न किसी और से डरते हैं।

"उम्मीद है कि मैं अपने रब को पुकारने (उसकी इबादत करने) के कारण अभागा न बनूँ।" यानी मुझे पूरा भरोसा है कि मेरा रब मेरी दुआ को क़बूल करेगा और मुझे निराश नहीं करेगा। यहाँ "عَسَىٰ" शब्द उम्मीद और आशा के लिए है, लेकिन यह नबी की ज़ुबान पर पक्की उम्मीद है, क्योंकि अल्लाह के नबी कभी निराश नहीं होते। दरअसल वे यह बताना चाहते हैं कि अल्लाह की इबादत और उससे दुआ करना ही सच्ची कामयाबी और ख़ुशी का ज़रिया है, और जो उससे कट जाए वही सच्चा शक़ी (अभागा) है।


दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि सच्चे मोमिन की पहचान यह है कि वह अल्लाह के सिवा हर चीज़ से बेज़ार हो जाए—चाहे उसके अपने लोग ही क्यों न हों। हज़रत इब्राहीम ने अपने बाप और अपनी क़ौम को छोड़ा, लेकिन अल्लाह ने उन्हें दुनिया और आख़िरत दोनों में बेहतरीन बदला दिया। यह हमारे लिए सबक़ है कि अगर हम अल्लाह की राह पर चलने के लिए कुछ छोड़ते हैं, तो अल्लाह हमें उससे बेहतर चीज़ देता है। जो लोग अल्लाह से जुड़ जाते हैं, वे कभी अभागे नहीं होते—चाहे दुनिया उन्हें अकेला ही क्यों न समझे। अल्लाह से दुआ और इबादत ही असली ताक़त है, और यही वह रास्ता है जो हमें दुनिया और आख़िरत की कामयाबी तक पहुँचाता है।



📜 आयत 46-50 — सूरा मरियम

46قَالَ أَرَاغِبٌ أَنتَ عَنْ آلِهَتِي يَا إِبْرَاهِيمُ ۖ لَئِن لَّمْ تَنتَهِ لَأَرْجُمَنَّكَ ۖ وَاهْجُرْنِي مَلِيًّا
(आज़र ने) कहा (क्यों) इबराहीम क्या तू मेरे माबूदों को नहीं मानता है अगर तू (इन बातों से) किसी तरह बाज़ न आएगा तो (याद रहे) मैं तुझे संगसार कर दूँगा और तू मेरे पास से हमेशा के लिए दूर हो जा
47قَالَ سَلَامٌ عَلَيْكَ ۖ سَأَسْتَغْفِرُ لَكَ رَبِّي ۖ إِنَّهُ كَانَ بِي حَفِيًّا
इबराहीम ने कहा (अच्छा तो) मेरा सलाम लीजिए (मगर इस पर भी) मैं अपने परवरदिगार से आपकी बख्शिश की दुआ करूँगा
48وَأَعْتَزِلُكُمْ وَمَا تَدْعُونَ مِن دُونِ اللَّهِ وَأَدْعُو رَبِّي عَسَىٰ أَلَّا أَكُونَ بِدُعَاءِ رَبِّي شَقِيًّا
(क्योंकि) बेशक वह मुझ पर बड़ा मेहरबान है और मैंने आप को (भी) और इन बुतों को (भी) जिन्हें आप लोग खुदा को छोड़कर पूजा करते हैं (सबको) छोड़ा और अपने परवरदिगार ही की इबादत करूँगा उम्मीद है कि मैं अपने परवरदिगार की इबादत से महरूम न रहूँगा
49فَلَمَّا اعْتَزَلَهُمْ وَمَا يَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ وَهَبْنَا لَهُ إِسْحَاقَ وَيَعْقُوبَ ۖ وَكُلًّا جَعَلْنَا نَبِيًّا
ग़रज़ इबराहीम ने उन लोगों को और जिसे ये लोग खुदा को छोड़कर परसतिश किया करते थे छोड़ा तो हमने उन्हें इसहाक़ व याकूब (सी औलाद) अता फ़रमाई और हर एक को नुबूवत के दर्जे पर फ़ायज़ किया
50وَوَهَبْنَا لَهُم مِّن رَّحْمَتِنَا وَجَعَلْنَا لَهُمْ لِسَانَ صِدْقٍ عَلِيًّا
और उन सबको अपनी रहमत से कुछ इनायत फ़रमाया और हमने उनके लिए आला दर्जे का ज़िक्रे ख़ैर (दुनिया में भी) क़रार दिया
मरियमकुरान सूची
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अनुवाद — मरियम 48

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Thursday, October 1, 2026

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