अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- يَوَدُّ: चाहता है, पसंद करता है, कामना करता है।
- أَهْلِ الْكِتَابِ: यहूदी और ईसाई।
- الْمُشْرِكِينَ: बुतपरस्त, जो अल्लाह के साथ दूसरों को साझीदार बनाते हैं।
- خَيْرٍ: भलाई, जिसमें क़ुरआन, ज्ञान, विजय, और शुभ सूचना शामिल है।
- يَخْتَصُّ بِرَحْمَتِهِ: अपनी दया (नबुव्वत, वह़ी, ईमान) से विशेष करता है।
- ذُو الْفَضْلِ الْعَظِيمِ: महान उदारता और भलाई का स्वामी।
तफ़सीर (व्याख्या):
यह आयत कुफ़्फ़ार (इनकार करने वालों) के दिलों की बुरी नीयत को उजागर करती है। यहूदी और ईसाई जो किताब वाले हैं, और मुशरिकीन (बुतपरस्त अरब) — ये सभी इस बात को कतई पसंद नहीं करते कि अल्लाह तुम पर कोई भलाई उतारे, चाहे वह क़ुरआन हो, ज्ञान हो, विजय हो या कोई शुभ सूचना। वे चाहते हैं कि तुम्हें कोई भलाई न मिले, क्योंकि उनके दिलों में ईर्ष्या और दुश्मनी भरी है। जब मुसलमान अपने यहूदी साथियों से कहते थे कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) पर ईमान लाओ, तो वे कहते थे कि यह चीज़ हमारे पास जो है उससे बेहतर नहीं है — जबकि वे झूठ बोलते थे, उनके दिल जानते थे कि यह सच्चाई है।
फिर अल्लाह ने इसका जवाब दिया कि यह मामला तुम्हारे हाथ में नहीं है, बल्कि अल्लाह अपनी दया (नबुव्वत, वह़ी और ईमान) से जिसे चाहता है विशेष करता है। वह अपनी बुद्धि और इच्छा के अनुसार जिसे चाहता है चुन लेता है। यह अल्लाह का विशेष उपकार है जो वह अपने बंदों में से जिसे चाहता है देता है। अल्लाह महान उदारता का स्वामी है — कोई भलाई उसी से मिलती है, और उसके बड़े उपकारों में से एक है रसूल का भेजा जाना और किताब का उतारा जाना।
फ़ायदे (लाभ):
- यह आयत मुसलमानों को सिखाती है कि दुश्मनों की ईर्ष्या और बुरी चाहतों की परवाह न करें, क्योंकि अल्लाह की मदद और भलाई उनकी चाहतों से नहीं रुकती।
- नबुव्वत और रिसालत अल्लाह का विशेष चुनाव है, जो उसकी बुद्धि और इच्छा पर आधारित है — यह किसी की सिफ़ारिश या कोशिश से नहीं मिलती।
- अल्लाह का فضل (उपकार) असीमित है — वह जिसे चाहता है देता है, और यही उसकी महानता और रहमत का सबूत है।
- मुसलमानों को इस आयत से तसल्ली मिलती है कि अल्लाह ने उन्हें जो दीन और क़ुरआन दिया है, वह दुनिया की किसी ताक़त से नहीं छीना जा सकता।
- यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की रहमत और भलाई की कामना करें और उसके फ़ज़ल के आगे अपनी कमज़ोरी का एहसास रखें, क्योंकि सारी भलाई उसी के हाथ में है।
📜 आयत 103-107 — अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 105
सूरा अल-बकरा आयत 105 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : ऐ रसूल अहले किताब में से जिन लोगों ने कुफ्र…सूरा आयत 105/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 103–107. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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