Qul atuhaaajjoonanaa fil laahi wa Huwa Rabbunaa wa Rabbukum wa lanaa a`maalunaa wa lakum a`maalukum wa nahnu lahoo mukhlisson
📖 अनुवाद (हिंदी अर्थ)
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि क्या तुम हम से खुदा के बारे झगड़ते हो हालाँकि वही हमारा (भी) परवरदिगार है (वही) तुम्हारा भी (परवरदिगार है) हमारे लिए है हमारी कारगुज़ारियाँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारसतानियाँ और हम तो निरेखरे उसी में हैं
🌐 Additional reference in اردو
🌐 اردو
(ان سے) کہو، کیا تم خدا کے بارے میں ہم سے جھگڑتے ہو، حالانکہ وہی ہمارا اور تمھارا پروردگار ہے اور ہم کو ہمارے اعمال (کا بدلہ ملے گا) اور تم کو تمھارے اعمال (کا) اور ہم خاص اسی کی عبادت کرنے والے ہیں
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि क्या तुम हम से खुदा के बारे झगड़ते हो हालाँकि वही हमारा (भी) परवरदिगार है (वही) तुम्हारा भी (परवरदिगार है) हमारे लिए है हमारी कारगुज़ारियाँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारसतानियाँ और हम तो निरेखरे उसी में हैं
📜
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
أَتُحَاجُّونَنَا: क्या तुम हमसे झगड़ते हो / हमसे तर्क-वितर्क करते हो?
مُخْلِصُونَ: हम उसी के लिए अपनी निष्ठा और भक्ति को ख़ालिस (शुद्ध) करने वाले हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) से कह दीजिए: "क्या तुम हमसे अल्लाह के दीन (धर्म) के बारे में झगड़ते हो, जबकि वही हमारा भी रब है और तुम्हारा भी रब है? वह किसी एक समुदाय का ख़ास नहीं है, बल्कि सारे जहान का पालनहार है। हमारे लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म हैं। हम अपने कर्मों के ज़िम्मेदार हैं और तुम अपने कर्मों के। हमें तुम्हारे कर्मों का हिसाब नहीं देना और न ही तुम्हें हमारे कर्मों का। और हम उसी (अल्लाह) के लिए अपनी इबादत और बंदगी को ख़ालिस करने वाले हैं — हम उसके साथ किसी को शरीक नहीं करते, न किसी और की इबादत करते हैं, न अपने अमल में किसी तरह का रिया (दिखावा) करते हैं।"
तुम जिस बात पर गर्व करते हो कि तुम्हारा दीन पुराना है और तुम्हारी किताब पहले आई है, यह तुम्हें अल्लाह के यहाँ कोई फ़ज़ीलत नहीं दे सकती। असली फ़ज़ीलत तो अल्लाह के सामने इख़्लास (शुद्ध निष्ठा) और उसकी इबादत में है। हम उसके साथ किसी को शरीक नहीं करते, जबकि तुम अपने दीन में शिर्क करते हो। इसलिए तुम्हारा यह दावा कि तुम अल्लाह के ज़्यादा करीब हो, बिल्कुल बेबुनियाद है।
फ़ायदे (सबक):
तर्क-वितर्क का सही तरीक़ा: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि जब कोई हमसे दीन के मामले में झगड़े, तो हमें सब्र और हिकमत से जवाब देना चाहिए, और ऐसी दलीलें पेश करनी चाहिए जो दिलों पर असर करें।
अल्लाह की रबूबियत में समानता: अल्लाह सबका रब है — किसी जाति, रंग या नस्ल का ख़ास नहीं। इसलिए किसी को दूसरे पर यह कहकर फ़ख़्र नहीं करना चाहिए कि हम अल्लाह के ज़्यादा करीब हैं।
हर इंसान अपने कर्मों का ज़िम्मेदार: किसी का अच्छा या बुरा अमल दूसरे के काम में नहीं आएगा। हर शख्स अपनी कमाई का फल पाएगा। यह न्याय का बहुत बड़ा सिद्धांत है जो इस्लाम ने दिया।
इख़्लास की अहमियत: अल्लाह के यहाँ वही अमल क़बूल है जो ख़ालिस उसी के लिए हो — बिना रिया और बिना शिर्क के। यही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाती है।
इस्लाम की पहचान: इस्लाम सिखाता है कि असली बड़ाई अल्लाह के सामने इख़्लास और फ़रमाँबरदारी से है, न कि किसी ख़ानदान, जाति या पुराने दीन के दावे से।
पस अगर ये लोग भी उसी तरह ईमान लाए हैं जिस तरह तुम तो अलबत्ता राहे रास्त पर आ गए और अगर वह इस तरीके से मुँह फेर लें तो बस वह सिर्फ तुम्हारी ही ज़िद पर है तो (ऐ रसूल) उन (के शर) से (बचाने को) तुम्हारे लिए खुदा काफ़ी होगा और वह (सबकी हालत) खूब जानता (और) सुनता है
(ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि क्या तुम हम से खुदा के बारे झगड़ते हो हालाँकि वही हमारा (भी) परवरदिगार है (वही) तुम्हारा भी (परवरदिगार है) हमारे लिए है हमारी कारगुज़ारियाँ और तुम्हारे लिए तुम्हारी कारसतानियाँ और हम तो निरेखरे उसी में हैं
क्या तुम कहते हो कि इबराहीम व इसमाइल व इसहाक़ व आलौदें याकूब सब के सब यहूदी या नसरानी थे (ऐ रसूल उनसे) पूछो तो कि तुम ज्यादा वाक़िफ़ हो या खुदा और उससे बढ़कर कौन ज़ालिम होगा जिसके पास खुदा की तरफ से गवाही (मौजूद) हो (कि वह यहूदी न थे) और फिर वह छिपाए और जो कुछ तुम करते हो खुदा उससे बेख़बर नहीं
सूराकुरान वेबसाइट की स्थापना पवित्र किताब और पाक सुन्नत की सेवा, अल्लाह की ओर बुलावा, और कुरान व सुन्नत के मार्ग पर धार्मिक विज्ञान को सुगम बनाने के एक विनम्र प्रयास के रूप में की गई थी। हम अल्लाह की प्रशंसा और उसके अनुग्रह के लिए धन्यवाद करते हैं, और उससे प्रार्थना करते हैं कि वह हमारे कार्यों को स्वीकार करे और उन्हें केवल उसके महान चेहरे के लिए विशुद्ध बनाए।