Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- أَتُحَاجُّونَنَا: क्या तुम हमसे झगड़ते हो / हमसे तर्क-वितर्क करते हो?
- مُخْلِصُونَ: हम उसी के लिए अपनी निष्ठा और भक्ति को ख़ालिस (शुद्ध) करने वाले हैं।
तफ़सीर (व्याख्या):
ऐ नबी! आप इन अहले-किताब (यहूदियों और ईसाइयों) से कह दीजिए: "क्या तुम हमसे अल्लाह के दीन (धर्म) के बारे में झगड़ते हो, जबकि वही हमारा भी रब है और तुम्हारा भी रब है? वह किसी एक समुदाय का ख़ास नहीं है, बल्कि सारे जहान का पालनहार है। हमारे लिए हमारे कर्म हैं और तुम्हारे लिए तुम्हारे कर्म हैं। हम अपने कर्मों के ज़िम्मेदार हैं और तुम अपने कर्मों के। हमें तुम्हारे कर्मों का हिसाब नहीं देना और न ही तुम्हें हमारे कर्मों का। और हम उसी (अल्लाह) के लिए अपनी इबादत और बंदगी को ख़ालिस करने वाले हैं — हम उसके साथ किसी को शरीक नहीं करते, न किसी और की इबादत करते हैं, न अपने अमल में किसी तरह का रिया (दिखावा) करते हैं।"
तुम जिस बात पर गर्व करते हो कि तुम्हारा दीन पुराना है और तुम्हारी किताब पहले आई है, यह तुम्हें अल्लाह के यहाँ कोई फ़ज़ीलत नहीं दे सकती। असली फ़ज़ीलत तो अल्लाह के सामने इख़्लास (शुद्ध निष्ठा) और उसकी इबादत में है। हम उसके साथ किसी को शरीक नहीं करते, जबकि तुम अपने दीन में शिर्क करते हो। इसलिए तुम्हारा यह दावा कि तुम अल्लाह के ज़्यादा करीब हो, बिल्कुल बेबुनियाद है।
फ़ायदे (सबक):
- तर्क-वितर्क का सही तरीक़ा: इस आयत से हमें सीख मिलती है कि जब कोई हमसे दीन के मामले में झगड़े, तो हमें सब्र और हिकमत से जवाब देना चाहिए, और ऐसी दलीलें पेश करनी चाहिए जो दिलों पर असर करें।
- अल्लाह की रबूबियत में समानता: अल्लाह सबका रब है — किसी जाति, रंग या नस्ल का ख़ास नहीं। इसलिए किसी को दूसरे पर यह कहकर फ़ख़्र नहीं करना चाहिए कि हम अल्लाह के ज़्यादा करीब हैं।
- हर इंसान अपने कर्मों का ज़िम्मेदार: किसी का अच्छा या बुरा अमल दूसरे के काम में नहीं आएगा। हर शख्स अपनी कमाई का फल पाएगा। यह न्याय का बहुत बड़ा सिद्धांत है जो इस्लाम ने दिया।
- इख़्लास की अहमियत: अल्लाह के यहाँ वही अमल क़बूल है जो ख़ालिस उसी के लिए हो — बिना रिया और बिना शिर्क के। यही वह चीज़ है जो इंसान को अल्लाह के करीब लाती है।
- इस्लाम की पहचान: इस्लाम सिखाता है कि असली बड़ाई अल्लाह के सामने इख़्लास और फ़रमाँबरदारी से है, न कि किसी ख़ानदान, जाति या पुराने दीन के दावे से।
📜 आयत 137-141 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 139
सूरा अल-बकरा आयत 139 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) तुम उनसे पूछो कि क्या तुम हम से…सूरा आयत 139/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 137–141. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Wednesday, September 30, 2026
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