Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- صِبْغَةَ اللهِ: अल्लाह का रंग अर्थात अल्लाह का दीन (धर्म)।
- صِبْغَةً: यहाँ 'दीन' (धर्म) के अर्थ में है, क्योंकि जिस प्रकार रंग कपड़े पर स्पष्ट दिखाई देता है, उसी प्रकार दीन का प्रभाव इंसान के आचरण और जीवन पर स्पष्ट दिखाई देना चाहिए।
- عَابِدُونَ: इबादत करने वाले, आज्ञा का पालन करने वाले।
तफसीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों को आदेश देता है कि वे अल्लाह के दीन को अपनाएँ, जो उसने अपने पैग़म्बर इब्राहीम (अलैहिस्सलाम) की शिक्षाओं के रूप में भेजा था। यही वह फ़ितरत (स्वाभाविक धर्म) है जिस पर अल्लाह ने इंसानों को पैदा किया है। अल्लाह का दीन ही सबसे उत्तम दीन है, क्योंकि यह इंसान की फ़ितरत के अनुरूप है, उसके लिए भलाइयों को जमा करता है और बुराइयों से बचाता है। इस दीन को 'रंग' (صبغة) कहा गया है, क्योंकि जिस प्रकार रंग कपड़े पर चढ़कर उसे बदल देता है, उसी प्रकार सच्चा दीन इंसान के दिल और अमल पर गहरा असर डालता है और उसकी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के रंग में रंग देता है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है: "और अल्लाह से बेहतर दीन किसका हो सकता है?" अर्थात कोई भी दीन अल्लाह के दीन जैसा उत्तम, पवित्र और सत्य नहीं है। इसलिए मुसलमानों को चाहिए कि वे इसी दीन को अपनाएँ और कहें: "हम अल्लाह ही की इबादत करने वाले हैं, उसी के आगे सिर झुकाने वाले हैं, और उसी की आज्ञा का पालन करते हैं।" हम किसी को उसका साझी नहीं बनाते, और न ही किसी और की इबादत करते हैं।
फ़ायदे (लाभ):
- इस आयत से पता चलता है कि इस्लाम ही वह सच्चा दीन है जो इंसान की फ़ितरत के अनुरूप है, इसलिए इसे अपनाना इंसान की अपनी भलाई के लिए है।
- अल्लाह का दीन ही सबसे उत्तम है; कोई दूसरा दीन या निज़ाम उसके मुक़ाबले में नहीं आ सकता।
- सच्चे दीन का असर इंसान के अंदर साफ़ दिखना चाहिए — उसके अख़लाक़, उसके व्यवहार और उसके जीवन के हर पहलू में — जैसे रंग कपड़े पर चढ़ा हुआ दिखता है।
- मुसलमान की पहचान यह है कि वह अल्लाह की इबादत करे, उसी के आगे झुके और उसी की रज़ा को अपना निशाना बनाए।
- यह आयत हमें सिखाती है कि हमें अपने दीन पर गर्व होना चाहिए और उसे पूरी दुनिया के सामने पेश करने में कोई झिझक नहीं होनी चाहिए, क्योंकि यही सबसे अच्छा और सच्चा रास्ता है।
📜 आयत 136-140 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 138
सूरा अल-बकरा आयत 138 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (मुसलमानों से कहो कि) रंग तो खुदा ही का रंग…सूरा आयत 138/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 136–140. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
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