अल-बकरा · 47/286
अनुवाद उच्चारण — अल-बकरा
يَٰبَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتِيَ ٱلَّتِيٓ أَنۡعَمۡتُ عَلَيۡكُمۡ وَأَنِّي فَضَّلۡتُكُمۡ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ  ۝٤٧
Yaa Baneee Israaa`eelaz kuroo ni`matiyal lateee an`amtu `alaikum wa annee faddaltukum `alal `aalameen
📖 हिंदी अर्थ
ऐ बनी इसराइल मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंने पहले तुम्हें दी और ये (भी तो सोचो) कि हमने तुमको सारे जहान के लोगों से बढ़ा दिया
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يَا بَنِي إِسْرَائِيلَ: ऐ इसराईल (याकूब अलैहिस्सलाम) की संतानो!
  • اذْكُرُوا: याद करो, स्मरण करो।
  • نِعْمَتِيَ: मेरी उन नेअमतों (उपकारों) को।
  • أَنْعَمْتُ عَلَيْكُمْ: जो मैंने तुम पर कीं।
  • فَضَّلْتُكُمْ: मैंने तुम्हें श्रेष्ठता दी, विशेषता प्रदान की।
  • الْعَالَمِينَ: अपने समय के संसार के लोगों पर।

विस्तृत तफसीर:

अल्लाह तआला बनी इसराईल (हज़रत याकूब अलैहिस्सलाम की संतान) को सम्बोधित करते हुए फ़रमाता है कि ऐ इसराईल की संतानो! मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंने तुम पर प्रदान कीं। यह याद दिलाना उन्हें शुक्र अदा करने की तरफ़ बुलाना है, क्योंकि नेअमत को याद करना और उसे पहचानना शुक्र की बुनियाद है। अल्लाह ने बनी इसराईल पर अनेकों दीनी और दुनियावी नेअमतें कीं — उनमें से एक बड़ी नेअमत यह थी कि उनके बीच बहुत से पैग़म्बर भेजे गए, उन पर आसमानी किताबें (तौरात, इंजील) उतारी गईं, और उन्हें अपने ज़माने की दुनिया के लोगों पर श्रेष्ठता प्रदान की गई। यह श्रेष्ठता उनके पूर्वजों (बुज़ुर्गों) के ज़रिये उन्हें मिली, लेकिन इसका शरफ़ उनकी आने वाली नस्लों को भी हासिल है। अल्लाह उन्हें यह याद दिला रहा है ताकि वे इन नेअमतों की क़द्र करें, अल्लाह की इताअत (आज्ञाकारिता) करें और उसके दिए हुए दीन पर साबित क़दम रहें। यहाँ "الْعَالَمِينَ" से मुराद उनके समय के लोग हैं, यानी उनके ज़माने की दुनिया के सभी लोगों पर उन्हें फ़ज़ीलत दी गई थी।


फ़ायदे (सबक़):

  1. नेअमतों की याद शुक्र का ज़रिया है — जब इंसान अल्लाह की दी हुई नेअमतों को याद करता है, तो उसका दिल अल्लाह की मोहब्बत से भर जाता है और वह शुक्र अदा करने की तरफ़ बढ़ता है। शुक्र अदा करने से अल्लाह नेअमतों में और इज़ाफ़ा करता है।
  2. अल्लाह की नेअमतें असंख्य हैं — अल्लाह ने इंसान पर दीनी और दुनियावी दोनों तरह की नेअमतें की हैं। हमें चाहिए कि इन्हें पहचानें और इनका सही इस्तेमाल करें।
  3. श्रेष्ठता का मतलब बड़ाई नहीं, बल्कि ज़िम्मेदारी है — जिसे अल्लाह फ़ज़ीलत देता है, उस पर अल्लाह की इताअत की ज़्यादा ज़िम्मेदारी होती है। बनी इसराईल को दी गई श्रेष्ठता उनके लिए इम्तिहान थी, न कि घमंड का सबब।
  4. पूर्वजों की नेअमतें आने वाली नस्लों के लिए शरफ़ हैं — अल्लाह की नेअमतें सिर्फ़ एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहतीं, बल्कि उनका असर और शरफ़ आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचता है। इसलिए हमें अपने पूर्वजों की नेअमतों को याद करके अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए।
  5. क़ुरआन हमें अल्लाह की नेअमतों की याद दिलाता है — यह आयत हमें सिखाती है कि क़ुरआन सिर्फ़ अहकाम (आदेशों) की किताब नहीं, बल्कि अल्लाह की नेअमतों को याद दिलाने वाली किताब भी है, ताकि हमारा दिल अल्लाह की तरफ़ झुके और हम उसके शुक्रगुज़ार बनें।
🎧 सुनें

📜 आयत 45-49 — अल-बकरा

45وَٱسۡتَعِينُواْ بِٱلصَّبۡرِ وَٱلصَّلَوٰةِۚ وَإِنَّهَا لَكَبِيرَةٌ إِلَّا عَلَى ٱلۡخَٰشِعِينَ 
और (मुसीबत के वक्त) सब्र और नमाज़ का सहारा पकड़ो और अलबत्ता नमाज़ दूभर तो है मगर उन ख़ाक़सारों पर (नहीं) जो बख़ूबी जानते हैं
46ٱلَّذِينَ يَظُنُّونَ أَنَّهُم مُّلَٰقُواْ رَبِّهِمۡ وَأَنَّهُمۡ إِلَيۡهِ رَٰجِعُونَ 
कि वह अपने परवरदिगार की बारगाह में हाज़िर होंगे और ज़रूर उसकी तरफ लौट जाएँगे
47يَٰبَنِيٓ إِسۡرَٰٓءِيلَ ٱذۡكُرُواْ نِعۡمَتِيَ ٱلَّتِيٓ أَنۡعَمۡتُ عَلَيۡكُمۡ وَأَنِّي فَضَّلۡتُكُمۡ عَلَى ٱلۡعَٰلَمِينَ 
ऐ बनी इसराइल मेरी उन नेअमतों को याद करो जो मैंने पहले तुम्हें दी और ये (भी तो सोचो) कि हमने तुमको सारे जहान के लोगों से बढ़ा दिया
48وَٱتَّقُواْ يَوۡمًا لَّا تَجۡزِي نَفۡسٌ عَن نَّفۡسٍ شَيۡـًٔا وَلَا يُقۡبَلُ مِنۡهَا شَفَٰعَةٌ وَلَا يُؤۡخَذُ مِنۡهَا عَدۡلٌ وَلَا هُمۡ يُنصَرُونَ 
और उस दिन से डरो (जिस दिन) कोई शख्स किसी की तरफ से न फिदिया हो सकेगा और न उसकी तरफ से कोई सिफारिश मानी जाएगी और न उसका कोई मुआवज़ा लिया जाएगा और न वह मदद पहुँचाए जाएँगे
49وَإِذۡ نَجَّيۡنَٰكُم مِّنۡ ءَالِ فِرۡعَوۡنَ يَسُومُونَكُمۡ سُوٓءَ ٱلۡعَذَابِ يُذَبِّحُونَ أَبۡنَآءَكُمۡ وَيَسۡتَحۡيُونَ نِسَآءَكُمۡۚ وَفِي ذَٰلِكُم بَلَآءٌ مِّن رَّبِّكُمۡ عَظِيمٌ 
और (उस वक्त क़ो याद करो) जब हमने तुम्हें (तुम्हारे बुर्ज़गो को) फिरऔन (के पन्जे) से छुड़ाया जो तुम्हें बड़े-बड़े दुख दे के सताते थे तुम्हारे लड़कों पर छुरी फेरते थे और तुम्हारी औरतों को (अपनी ख़िदमत के लिए) ज़िन्दा रहने देते थे और उसमें तुम्हारे परवरदिगार की तरफ से (तुम्हारे सब्र की) सख्त आज़माइश थी
अल-बकराकुरान सूची
286आयत
मदनीRevelation
47आयत

अनुवाद — अल-बकरा 47

सूरा आयत 47/286 — अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-बकरा सुनें, अल-बकरा अनुवाद, अल-बकरा mp3, अल-बकरा pdf. आयत 45–49. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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