Mishary Rashid Alafasy
✓
Mahmoud Khalil Al-Husary
✓
Abdurrahman As-Sudais
✓
Mohamed Siddiq Al-Minshawi
✓
Abdul Basit Abdul Samad
✓
Ali Al-Hudhaify
✓
Ahmed ibn Ali al-Ajamy
✓
Abu Bakr Ash-Shaatree
✓
Muhammad Ayyoub
✓
Abdullah Basfar
✓
Abdullah Al-Juhani
✓
Maher Al Muaiqly
✓
अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- آتَيْنَا: हमने दिया
- الْكِتَابَ: तौरात
- قَفَّيْنَا: पीछे-पीछे भेजा
- الْبَيِّنَاتِ: स्पष्ट चमत्कार और प्रमाण
- أَيَّدْنَاهُ: हमने उसे शक्ति प्रदान की
- رُوحِ الْقُدُسِ: जिब्रील अलैहिस्सलाम
- تَهْوَى: चाहती है, पसंद करती है
- اسْتَكْبَرْتُمْ: तुमने घमंड किया
- فَرِيقًا: एक समूह
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला अपने बंदों पर अपनी महान कृपा और एहसान का ज़िक्र कर रहे हैं। उन्होंने हज़रत मूसा (अलैहिस्सलाम) को तौरात जैसी महान किताब प्रदान की, जो उनकी उम्मत के लिए मार्गदर्शन और प्रकाश थी। फिर उनके बाद अल्लाह ने लगातार कई पैग़म्बर भेजे, जो बनी इस्राईल को सीधे रास्ते पर लाने के लिए आते रहे। यह अल्लाह की असीम दया थी कि उसने हर युग में मार्गदर्शक भेजे।
इसके बाद अल्लाह ने हज़रत ईसा (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र किया, जो मरियम (अलैहिस्सलाम) के बेटे थे। उन्हें अल्लाह ने स्पष्ट चमत्कार दिए — जैसे मुर्दों को ज़िंदा करना, जन्म से अंधे को ठीक करना, कोढ़ी को शिफ़ा देना — ये सब उनके सच्चे पैग़म्बर होने के प्रमाण थे। और अल्लाह ने उन्हें जिब्रील (अलैहिस्सलाम) के माध्यम से शक्ति प्रदान की।
फिर अल्लाह तआला बनी इस्राईल को उनके कुकर्मों पर टोकते हुए कहते हैं: "क्या जब भी कोई पैग़म्बर तुम्हारे पास ऐसा संदेश लेकर आया जो तुम्हारी मनमर्ज़ी के ख़िलाफ़ था, तो तुमने घमंड किया? तुमने कुछ पैग़म्बरों को झुठलाया और कुछ को क़त्ल कर दिया?" यह उनकी सबसे बड़ी बुराई थी कि वे सत्य को अपनी इच्छाओं पर नहीं, बल्कि अपनी इच्छाओं को सत्य पर प्राथमिकता देते थे।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान को अपनी नफ़्स की इच्छाओं को हक़ (सत्य) के आगे झुकाना चाहिए, न कि हक़ को अपनी इच्छाओं के आगे। जो लोग अपनी मनमर्ज़ी को दीन पर तरजीह देते हैं, वे कभी हिदायत नहीं पा सकते। यह हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि हम अपने अहंकार और घमंड को छोड़कर अल्लाह के हुक्मों के सामने झुकें। अल्लाह ने हर युग में रहमत भेजी, और आज हमारे पास क़ुरआन और सुन्नत है — हमें इसे अपनाना चाहिए और उन लोगों की तरह नहीं बनना चाहिए जिन्होंने अल्लाह के रसूलों का विरोध किया। याद रखें, अल्लाह की रहमत उन्हीं पर होती है जो विनम्रता से सत्य को स्वीकार करते हैं।
📜 आयत 85-89 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 87
सूरा अल-बकरा आयत 87 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और ये हक़ीक़ी बात है कि हमने मूसा को किताब…सूरा आयत 87/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 85–89. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Monday, September 28, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


