Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- غُلْفٌ (ग़ुल्फ़): ढके हुए, आवरण में लिपटे हुए, जिसमें कोई बात प्रवेश न कर सके।
- لَعَنَهُمُ (ला'नहुम): उन्हें रहमत से दूर कर दिया, फटकारा।
- فَقَلِيلًا مَا يُؤْمِنُونَ (फ़क़लीलन मा यु'मिनून): वे बहुत कम ईमान लाते हैं, यानी उनका ईमान नाममात्र का है जो उन्हें कोई लाभ नहीं देता।
तफ़सीर (व्याख्या):
यहूदियों ने अल्लाह के रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) से कहा: "हमारे दिल बंद और ढके हुए हैं, उन पर परदा पड़ा है, इसलिए आपकी बात हमारे दिलों तक नहीं पहुँचती और न ही हम उसे समझ पाते हैं।" उन्होंने यह बहाना बनाया कि उनके दिल सीलबंद हैं, इसलिए वे आपका संदेश स्वीकार नहीं कर सकते। लेकिन अल्लाह ने उनके इस दावे को झूठा बताया और फ़रमाया: "ऐसा नहीं है जैसा वे कहते हैं, बल्कि अल्लाह ने उन्हें उनके कुफ़्र (इनकार) के कारण अपनी रहमत से दूर कर दिया और उन पर लानत भेजी।" यानी उनके दिलों की सख्ती और अंधापन अल्लाह की ओर से उनके लिए सज़ा है, क्योंकि उन्होंने सच्चाई को जानते हुए भी उसे ठुकरा दिया। नतीजा यह हुआ कि वे बहुत कम ईमान लाते हैं — यानी उनमें से जो ईमान लाता भी है, उसका ईमान अधूरा और बेकार है, या फिर उनका ईमान सिर्फ़ ज़ुबानी है, दिल से नहीं। उनका यह कथन कि "हमारे दिल ढके हुए हैं" वास्तव में उनकी ज़िद और हठधर्मिता को दर्शाता है, न कि किसी वास्तविक बाधा को।
फ़ायदे (शिक्षाएँ):
- अल्लाह की रहमत से दूर होने का सबसे बड़ा कारण कुफ़्र और सच्चाई का इनकार है। जो व्यक्ति सत्य को जानकर उसे ठुकराता है, उसका दिल धीरे-धीरे सख्त हो जाता है और वह हिदायत से महरूम हो जाता है।
- बहाने बनाना और अपनी ग़लतियों को छिपाना ईमान की कमज़ोरी की निशानी है। सच्चा मुसलमान वह है जो सच्चाई सुनते ही उसे क़बूल कर ले, चाहे वह उसकी अपनी राय के ख़िलाफ़ ही क्यों न हो।
- यह आयत हमें सिखाती है कि दिल की सफ़ाई और नम्रता अल्लाह की तरफ़ से एक बड़ी नेमत है। हमें दुआ करनी चाहिए कि अल्लाह हमारे दिलों को सच्चाई क़बूल करने की तौफ़ीक़ दे और उन्हें सख्ती और अंधेपन से बचाए।
- ईमान सिर्फ़ ज़ुबान से कहने का नाम नहीं, बल्कि दिल से यक़ीन और अमल से साबित होता है। जो ईमान अमल के साथ न हो, वह अल्लाह के यहाँ बेकार है।
📜 आयत 86-90 — सूरा अल-बकरा
अनुवाद — अल-बकरा 88
सूरा अल-बकरा आयत 88 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और कहने लगे कि हमारे दिलों पर ग़िलाफ चढ़ा हुआ…सूरा आयत 88/286 — सूरा अल-बकरा البقرة (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-बकरा सुनें, सूरा अल-बकरा अनुवाद, सूरा अल-बकरा mp3, सूरा अल-बकरा pdf. आयत 86–90. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 29, 2026
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