ताहा · 104/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ إِذْ يَقُولُ أَمْثَلُهُمْ طَرِيقَةً إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا يَوْمًا ۝١٠٤
nahnu a`lamu bimaa yaqooloona iz yaqoolu amsaluhum tareeqatan illabistum illaa yawmaa
📖 हिंदी अर्थ
जो कुछ ये लोग (उस दिन) कहेंगे हम खूब जानते हैं कि जो इनमें सबसे ज्यादा होशियार होगा बोल उठेगा कि तुम बस (बहुत से बहुत) एक दिन ठहरे होगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • أَمْثَلُهُمْ طَرِيقَةً — उनमें से सबसे अधिक समझदार, सबसे बुद्धिमान और सबसे सही राय वाला।
  • لَبِثْتُمْ — तुम ठहरे / रहे।
  • إِلَّا يَوْمًا — केवल एक दिन।

तफ़सीर:

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हम उन सब बातों को भली-भाँति जानते हैं जो क़यामत के दिन ये लोग आपस में धीमी आवाज़ में कहेंगे या अपने दिलों में छिपाएँगे। उस वक़्त उनमें से सबसे अक्लमंद और सबसे बेहतर सोच वाला शख्स — जिसे लोग अपनी तरफ से सबसे समझदार समझेंगे — वह कहेगा: "तुम दुनिया या बरज़ख़ में केवल एक दिन ही ठहरे हो।"

यानी जब वे क़यामत के उन भयानक हालात और लंबे हिसाब को देखेंगे, तो उन्हें दुनिया की पूरी ज़िंदगी — चाहे वह सैकड़ों साल ही क्यों न रही हो — बिल्कुल एक दिन के बराबर महसूस होगी। उनकी नज़र में दुनिया की मुद्दत इतनी छोटी और बेहद कम हो जाएगी कि वे उसे एक दिन से ज़्यादा नहीं समझेंगे। यह इसलिए कि आख़िरत के अज़ाब और हौलनाक मंज़रों के मुक़ाबले में दुनिया की सारी उम्र बहुत ही थोड़ी और मामूली लगेगी।

यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि यह दुनिया कितनी छोटी और फ़ानी है। जो लोग इस दुनिया में अल्लाह की इबादत से ग़ाफ़िल रहते हैं और सिर्फ दुनिया की ख्वाहिशों में डूबे रहते हैं, वे क़यामत के दिन पछताएँगे और समझेंगे कि उनकी ज़िंदगी तो बस एक पल थी।

अल्लाह तआला हमें यह तालीम देता है कि हम इस छोटी सी ज़िंदगी को अल्लाह की इताअत, नेकी और अच्छे आमाल में गुज़ारें, ताकि क़यामत के दिन हम उन लोगों में से न हों जो पछतावा करेंगे, बल्कि उन लोगों में से हों जिनका चेहरा खुशी से चमक रहा होगा। याद रखिए, यह दुनिया एक दिन के बराबर है — इसे अल्लाह की रज़ा के लिए खर्च कर दीजिए, और आख़िरत की हमेशा की ज़िंदगी को कामयाब कीजिए।



📜 आयत 102-106 — सूरा ताहा

102يَوْمَ يُنفَخُ فِي الصُّورِ ۚ وَنَحْشُرُ الْمُجْرِمِينَ يَوْمَئِذٍ زُرْقًا
जिस दिन सूर फूँका जाएगा और हम उस दिन गुनाहगारों को (उनकी) ऑंखें पुतली (अन्धी) करके (आमने-सामने) जमा करेंगे
103يَتَخَافَتُونَ بَيْنَهُمْ إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا عَشْرًا
(और) आपस में चुपके-चुपके कहते होंगे कि (दुनिया या क़ब्र में) हम लोग (बहुत से बहुत) नौ दस दिन ठहरे होंगे
104نَّحْنُ أَعْلَمُ بِمَا يَقُولُونَ إِذْ يَقُولُ أَمْثَلُهُمْ طَرِيقَةً إِن لَّبِثْتُمْ إِلَّا يَوْمًا
जो कुछ ये लोग (उस दिन) कहेंगे हम खूब जानते हैं कि जो इनमें सबसे ज्यादा होशियार होगा बोल उठेगा कि तुम बस (बहुत से बहुत) एक दिन ठहरे होगे
105وَيَسْأَلُونَكَ عَنِ الْجِبَالِ فَقُلْ يَنسِفُهَا رَبِّي نَسْفًا
(और ऐ रसूल) तुम से लोग पहाड़ों के बारे में पूछा करते हैं (कि क़यामत के रोज़ क्या होगा)
106فَيَذَرُهَا قَاعًا صَفْصَفًا
तो तुम कह दो कि मेरा परवरदिगार बिल्कुल रेज़ा रेज़ा करके उड़ा डालेगा और ज़मीन को एक चटियल मैदान कर छोड़ेगा
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
104आयत

अनुवाद — ताहा 104

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Friday, October 2, 2026

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