अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- يَتَخَافَتُونَ – वे आपस में धीमी आवाज़ में बात करेंगे (कानाफूसी करेंगे)।
- لَبِثْتُمْ – तुम रुके / ठहरे।
- عَشْرًا – दस (दिन या रातें)।
तफ़सीर (व्याख्या):
क़यामत के दिन का हाल देखकर लोगों की हालत ऐसी हो जाएगी कि वे एक-दूसरे से डरते-डरते, बहुत धीमी आवाज़ में कानाफूसी करेंगे। उस वक़्त उनकी ज़ुबान पर सिर्फ़ यही बात होगी कि "तुम दुनिया में (या बरज़ख़ में) केवल दस दिन ही ठहरे हो।" यानी दुनिया की ज़िंदगी, जो उन्हें बहुत लंबी लगती थी, उस दिन उन्हें बहुत थोड़ी और मामूली नज़र आएगी।
यह आयत हमें सिखाती है कि दुनिया की ज़िंदगी चाहे कितनी भी लंबी क्यों न हो, आख़िरत के सामने वह बिल्कुल थोड़ी है। इसलिए हमें चाहिए कि इस छोटी सी ज़िंदगी को अल्लाह की इबादत में, उसकी रज़ा के कामों में गुज़ारें। जो लोग दुनिया में अल्लाह की नाफ़रमानी में मशगूल रहे, उन्हें क़यामत के दिन पछतावा होगा कि हमने इतनी कम ज़िंदगी में भी अच्छे काम क्यों नहीं किए।
अल्लाह तआला हमें तौफ़ीक़ दे कि हम दुनिया की इस मुख़्तसर (छोटी) ज़िंदगी को उसकी रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारें और आख़िरत की सफलता हासिल करें। आमीन।
📜 आयत 101-105 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 103
सूरा ताहा आयत 103 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (और) आपस में चुपके-चुपके कहते होंगे कि (दुनिया या क़ब्र…सूरा आयत 103/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 101–105. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, September 8, 2026
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