ताहा · 115/135
अनुवाद उच्चारण — ताहा
وَلَقَدْ عَهِدْنَا إِلَىٰ آدَمَ مِن قَبْلُ فَنَسِيَ وَلَمْ نَجِدْ لَهُ عَزْمًا ۝١١٥
Wa laqad `ahidnaaa ilaaa Aadama min qablu fanasiya wa lam najid lahoo `azmaa
📖 हिंदी अर्थ
और हमने आदम से पहले ही एहद ले लिया था कि उस दरख्त के पास न जाना तो आदम ने उसे तर्क कर दिया

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • عَهِدْنَا: हमने आदेश दिया, वसीयत की, या निर्देश दिया।
  • فَنَسِيَ: वह भूल गया (यहाँ इसका अर्थ है कि उसने वसीयत को छोड़ दिया या उस पर अमल नहीं किया)।
  • عَزْمًا: दृढ़ संकल्प, सब्र, या पक्का इरादा।

तफसीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में हज़रत आदम अलैहिस्सलाम का एक महत्वपूर्ण क़िस्सा बयान किया है, ताकि हमें सबक़ मिले। अल्लाह ने आदम को पहले ही साफ़-साफ़ वसीयत कर दी थी कि वे उस पेड़ के पास न जाएँ और उसका फल न खाएँ। यह वसीयत उन्हें बहुत पहले दी गई थी, और साथ ही उन्हें यह भी बता दिया गया था कि शैतान उनका और उनकी पत्नी का खुला दुश्मन है, और वह उन्हें जन्नत से निकलवाने की कोशिश करेगा।

लेकिन शैतान ने उन्हें धोखा दिया और उनके दिल में वसवसा डाला। आदम अलैहिस्सलाम ने उसकी बात मान ली और उस पेड़ से खा लिया। यहाँ "فَنَسِيَ" का मतलब यह है कि वे उस वसीयत को भूल गए, यानी उन्होंने उस पर अमल नहीं किया। अल्लाह फ़रमाता है कि हमने उनमें वह दृढ़ संकल्प और सब्र नहीं पाया जो उन्हें उस वसीयत पर क़ायम रखता और शैतान के बहकावे से बचाता।

यह आयत हमें बताती है कि इंसान कमज़ोर है, और शैतान का दुश्मनी भरा रास्ता हमेशा उसका इंतज़ार करता है। लेकिन साथ ही यह भी सिखाती है कि अल्लाह की वसीयतों और हिदायातों को याद रखना और उन पर पक्का इरादा रखना कितना ज़रूरी है। हमें चाहिए कि हम अपने दिल को अल्लाह की याद से जोड़े रखें, क्योंकि जो दिल अल्लाह की याद से भरा होता है, वह शैतान के वसवसों में नहीं आता।

यह क़िस्सा हमारे लिए एक नसीहत है कि हम अपनी कमज़ोरियों को पहचानें और अल्लाह से मदद माँगें। अल्लाह ने आदम को इसके बाद माफ़ भी किया और उन्हें नबुव्वत से नवाज़ा, जिससे पता चलता है कि अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है। जब हमसे कोई गलती हो जाए, तो हमें तौबा करनी चाहिए और अल्लाह की तरफ़ लौटना चाहिए, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों से मुहब्बत करता है।

याद रखिए, शैतान का हथियार भुलक्कड़पन है। वह चाहता है कि हम अल्लाह की हिदायतों को भूल जाएँ। इसलिए हमें क़ुरआन और सुन्नत को पढ़ते रहना चाहिए, और अपने ईमान को मज़बूत करते रहना चाहिए, ताकि हम शैतान के हमलों से महफूज़ रहें और अल्लाह की रहमत और जन्नत के हक़दार बनें।



📜 आयत 113-117 — ताहा

113وَكَذَٰلِكَ أَنزَلْنَاهُ قُرْآنًا عَرَبِيًّا وَصَرَّفْنَا فِيهِ مِنَ الْوَعِيدِ لَعَلَّهُمْ يَتَّقُونَ أَوْ يُحْدِثُ لَهُمْ ذِكْرًا
हमने उसको उसी तरह अरबी ज़बान का कुरान नाज़िल फ़रमाया और उसमें अज़ाब के तरह-तरह के वायदे बयान किए ताकि ये लोग परहेज़गार बनें या उनके मिजाज़ में इबरत पैदा कर दे
114فَتَعَالَى اللَّهُ الْمَلِكُ الْحَقُّ ۗ وَلَا تَعْجَلْ بِالْقُرْآنِ مِن قَبْلِ أَن يُقْضَىٰ إِلَيْكَ وَحْيُهُ ۖ وَقُل رَّبِّ زِدْنِي عِلْمًا
पस (दो जहाँ का) सच्चा बादशाह खुदा बरतर व आला है और (ऐ रसूल) कुरान के (पढ़ने) में उससे पहले कि तुम पर उसकी ''वही'' पूरी कर दी जाए जल्दी न करो और दुआ करो कि ऐ मेरे पालने वाले मेरे इल्म को और ज्यादा फ़रमा
115وَلَقَدْ عَهِدْنَا إِلَىٰ آدَمَ مِن قَبْلُ فَنَسِيَ وَلَمْ نَجِدْ لَهُ عَزْمًا
और हमने आदम से पहले ही एहद ले लिया था कि उस दरख्त के पास न जाना तो आदम ने उसे तर्क कर दिया
116وَإِذْ قُلْنَا لِلْمَلَائِكَةِ اسْجُدُوا لِآدَمَ فَسَجَدُوا إِلَّا إِبْلِيسَ أَبَىٰ
और हमने उनमें साबित व इस्तक़लाल न पाया और जब हमने फ़रिश्तों से कहा कि आदम को सजदा करो तो सबने सजदा किया मगर शैतान ने इन्कार किया
117فَقُلْنَا يَا آدَمُ إِنَّ هَٰذَا عَدُوٌّ لَّكَ وَلِزَوْجِكَ فَلَا يُخْرِجَنَّكُمَا مِنَ الْجَنَّةِ فَتَشْقَىٰ
तो मैंने (आदम से कहा) कि ऐ आदम ये यक़ीनी तुम्हारा और तुम्हारी बीवी का दुशमन है तो कहीं तुम दोनों को बेहिश्त से निकलवा न छोड़े तो तुम (दुनिया की) मुसीबत में फँस जाओ
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अनुवाद — ताहा 115

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Tuesday, August 18, 2026

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