Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- فَتَعَالَى – अत्यंत उच्च एवं पवित्र है।
- الْمَلِكُ الْحَقُّ – सच्चा बादशाह, जिसका अस्तित्व, वचन और न्याय सब सत्य है।
- لَا تَعْجَلْ – जल्दी मत करो।
- أَن يُقْضَىٰ – पूरा किया जाए, समाप्त किया जाए।
- زِدْنِي عِلْمًا – मुझे और अधिक ज्ञान प्रदान कर।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला उस हर चीज़ से बहुत ऊँचा और पाक है जो मुशरिकीन उसके बारे में कहते हैं। वही सच्चा बादशाह है, जिसकी सत्ता के आगे हर बादशाह और हर ज़ालिम की सत्ता बेबस है। वह सच्चा है, उसका वादा सच्चा है, उसकी धमकी सच्ची है, और उसका हर फ़ैसला सच्चाई पर आधारित है। वह हर कमी और हर ऐब से पाक है।
फिर अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को नसीहत करता है कि ऐ रसूल! क़ुरआन पढ़ने में जल्दी न करो। जब जिब्रील अमीन वही लेकर आते थे, तो आप ﷺ उनके साथ-साथ पढ़ने की कोशिश करते थे, ताकि कोई शब्द न छूट जाए। अल्लाह ने फ़रमाया: ऐ नबी! जिब्रील के वही पूरी करने से पहले जल्दी मत करो, बल्कि जब वे पूरी तरह पढ़ चुकें, तब तुम पढ़ो। यह आपके लिए एक तरबियती हिदायत है कि सब्र और इत्मिनान के साथ इल्म हासिल करो।
और साथ ही अल्लाह ने आपको सिखाया कि यह दुआ पढ़ो: "रब्बी ज़िदनी इल्मा" – ऐ मेरे रब! मुझे और ज्ञान बढ़ा दे। यह दुआ सिर्फ़ नबी ﷺ के लिए नहीं थी, बल्कि हर मुसलमान के लिए है कि वह अल्लाह से लगातार ज्ञान में बढ़ोतरी की दुआ माँगे। यह इस बात की भी तालीम है कि इल्म की कोई अंतिम सीमा नहीं, और इंसान को हमेशा सीखते रहना चाहिए।
यह आयत हमें सिखाती है कि ज्ञान पाने के लिए सब्र और अदब ज़रूरी है। जो चीज़ जल्दी में मिलती है, वह अक्सर अधूरी रह जाती है। इसलिए क़ुरआन सीखते समय, इल्म हासिल करते समय, और हर अच्छे काम में हमें सब्र और इत्मिनान से काम लेना चाहिए। साथ ही, हमें हमेशा यह दुआ करनी चाहिए कि अल्लाह हमें सही समझ और सही अमल की तौफ़ीक़ दे। यह दुआ इल्म की बरकत का ज़रिया है, और यही वह चीज़ है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब बनाती है।
📜 आयत 112-116 — सूरा ताहा
अनुवाद — ताहा 114
सूरा ताहा आयत 114 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : पस (दो जहाँ का) सच्चा बादशाह खुदा बरतर व आला…सूरा आयत 114/135 — सूरा ताहा طه (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा ताहा सुनें, सूरा ताहा अनुवाद, सूरा ताहा mp3, सूरा ताहा pdf. आयत 112–116. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा ताहा
पवित्र क़ुरआन
Saturday, October 3, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


