ताहा · 6/135
अनुवाद उच्चारण — सूरा ताहा
لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَمَا تَحْتَ الثَّرَىٰ ۝٦
Lahoo maa fis samaawaati wa maa fil ardi wa maa bainahumaa wa maa tahtassaraa
📖 हिंदी अर्थ
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है और जो कुछ दोनों के बीच में है और जो कुछ ज़मीन के नीचे है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مَا فِي السَّمَاوَاتِ: जो कुछ आकाशों में है।
  • مَا فِي الْأَرْضِ: जो कुछ धरती में है।
  • مَا بَيْنَهُمَا: जो कुछ आकाश और धरती के बीच है।
  • مَا تَحْتَ الثَّرَى: जो कुछ नम मिट्टी के नीचे है (अर्थात धरती की गहराईयों में)।
  • الثَّرَى: नम मिट्टी, यहाँ धरती के अंदरूनी हिस्से का प्रतीक है।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत अल्लाह तआला की असीम शक्ति और उसके पूर्ण स्वामित्व को बयान करती है। अल्लाह ही वह हस्ती है जिसके क़ब्ज़े में आकाशों की हर चीज़ है, धरती की हर चीज़ है, और वह सब कुछ जो इन दोनों के बीच है — चाहे वह हवा में उड़ने वाले परिंदे हों, पहाड़ों की चोटियाँ हों, समुद्रों की गहराइयाँ हों, या धरती के अंदर छिपे खज़ाने और जीव-जंतु। यहाँ तक कि वह सब कुछ जो नम मिट्टी के नीचे यानी धरती की सबसे गहरी तहों में है, वह भी अल्लाह ही की मिल्कियत (स्वामित्व) में है।

यह सब कुछ अल्लाह ने पैदा किया है, और वही इसका मालिक है, और वही इसका प्रबंधन करता है। कोई भी चीज़ उसके हुक्म से बाहर नहीं है, न कोई उसकी मिल्कियत में शरीक है, और न ही उसके प्रबंधन में कोई साझेदार। यह आयत हमें सिखाती है कि जिस अल्लाह के पास इतनी विशाल कायनात है, उसके लिए कुछ भी मुश्किल नहीं है। वही हमारा रब है, वही हमारा मालिक है, और उसी की तरफ हमें लौटना है।

दावती पहलू:

यह आयत हमारे दिलों में अल्लाह की अज़मत (महानता) का नक्श बिठाती है। जब हम सोचते हैं कि यह विशाल ब्रह्मांड, ये चमकते सितारे, ये ऊँचे पहाड़, ये गहरे समुद्र — सब कुछ अल्लाह के हाथ में है, तो हमारा दिल उसके सामने झुक जाता है। यह हमें यक़ीन दिलाती है कि हमारा रब सबसे बड़ा है, सबसे शक्तिशाली है, और उसकी रहमत और मदद हर चीज़ पर हावी है। जिसके पास यह सब कुछ है, वह हमारी छोटी-छोटी ज़रूरतों को भी पूरा कर सकता है। इसलिए हमें अपनी हर ज़रूरत, हर मुश्किल में सिर्फ़ उसी से दुआ करनी चाहिए, और उसी पर भरोसा रखना चाहिए। यह आयत हमें यह भी सिखाती है कि हम इस धरती पर अल्लाह के अमानतदार हैं, और हमें उसकी पैदा की हुई चीज़ों का सही इस्तेमाल करना चाहिए — न कि उन्हें बर्बाद करें या उनमें फ़साद फैलाएँ। जब हम यह समझ लेंगे कि सब कुछ अल्लाह का है, तो हमारे अंदर नम्रता, शुक्रगुज़ारी और अल्लाह की इबादत का जज़्बा पैदा होगा, और हमारा दिल उसकी मोहब्बत से भर जाएगा।



📜 आयत 4-8 — सूरा ताहा

4تَنزِيلًا مِّمَّنْ خَلَقَ الْأَرْضَ وَالسَّمَاوَاتِ الْعُلَى
(ये) उस शख्स की तरफ़ से नाज़िल हुआ है जिसने ज़मीन और ऊँचे-ऊँचे आसमानों को पैदा किया
5الرَّحْمَٰنُ عَلَى الْعَرْشِ اسْتَوَىٰ
वही रहमान है जो अर्श पर (हुक्मरानी के लिए) आमादा व मुस्तईद है
6لَهُ مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الْأَرْضِ وَمَا بَيْنَهُمَا وَمَا تَحْتَ الثَّرَىٰ
जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है और जो कुछ दोनों के बीच में है और जो कुछ ज़मीन के नीचे है (ग़रज़ सब कुछ) उसी का है
7وَإِن تَجْهَرْ بِالْقَوْلِ فَإِنَّهُ يَعْلَمُ السِّرَّ وَأَخْفَى
और अगर तू पुकार कर बात करे (तो भी आहिस्ता करे तो भी) वह यक़ीनन भेद और उससे ज्यादा पोशीदा चीज़ को जानता है
8اللَّهُ لَا إِلَٰهَ إِلَّا هُوَ ۖ لَهُ الْأَسْمَاءُ الْحُسْنَىٰ
अल्लाह (वह माबूद है कि) उसके सिवा कोइ माबूद नहीं है (अच्छे-अच्छे) उसी के नाम हैं
ताहाकुरान सूची
135आयत
मक्कीअवतरण स्थान
6आयत

अनुवाद — ताहा 6

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Friday, October 2, 2026

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