अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- لَن يَنَالَ اللَّهَ: अल्लाह तक नहीं पहुँचेगा, न ही उसके पास ऊपर उठेगा।
- لُحُومُهَا: इन (क़ुर्बानी के जानवरों) का गोश्त।
- وَلَا دِمَاؤُهَا: और न ही इनका ख़ून।
- التَّقْوَىٰ: अल्लाह का डर, नेकनीयती, और ख़ालिस इरादा।
- سَخَّرَهَا: उन्हें (जानवरों को) तुम्हारे लिए वश में किया।
- لِتُكَبِّرُوا اللَّهَ: ताकि तुम अल्लाह की बड़ाई करो।
- الْمُحْسِنِينَ: नेकी करने वाले, जो अल्लाह की इबादत में और लोगों के साथ भलाई में पूर्णता दिखाते हैं।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में हमें एक बहुत बड़ी हक़ीक़त समझा रहे हैं कि क़ुर्बानी के जानवरों का गोश्त और ख़ून अल्लाह तक नहीं पहुँचता, न ही उसके पास ऊपर उठता है। अल्लाह को न तो गोश्त की ज़रूरत है और न ख़ून की, वह तो बेनियाज़ है। अल्लाह तक जो चीज़ पहुँचती है, वह तुम्हारा तक़वा है—यानी तुम्हारी नेकनीयती, तुम्हारा ख़ालिस इरादा, और अल्लाह का डर। असल मक़सद यह है कि तुम क़ुर्बानी सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए करो, उसका नाम लेकर, उसी की इबादत के तौर पर, और उसी की बड़ाई के लिए।
ज़ाहिर है कि अल्लाह ने इन जानवरों को तुम्हारे लिए वश में किया है—वे तुम्हारे हुक्म में हैं, तुम उन्हें जब चाहो और जिस तरह चाहो क़ुर्बानी के लिए तैयार कर सकते हो। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है कि उसने इन जानवरों को तुम्हारे क़ाबू में कर दिया, ताकि तुम उसकी बड़ाई करो और उसका शुक्र अदा करो, क्योंकि उसने तुम्हें सीधा रास्ता दिखाया और हिदायत दी। यह हिदायत ही सबसे बड़ी नेमत है, और इसी नेमत के एहतिराम में क़ुर्बानी की जाती है।
इस आयत में अल्लाह तआला अपने नबी ﷺ को हुक्म दे रहे हैं कि वे उन लोगों को ख़ुशख़बरी सुनाएँ जो मुहसिन हैं—यानी जो अल्लाह की इबादत में पूर्णता दिखाते हैं, उसकी रज़ा के लिए सब कुछ करते हैं, और अपने बंदों के साथ भलाई करते हैं। उनके लिए हर भलाई, हर कामयाबी और जन्नत की ख़ुशख़बरी है।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह के दीन में शक्ल-सूरत से ज़्यादा दिल की हालत अहम है। क़ुर्बानी का असल मक़सद सिर्फ़ जानवर काटना नहीं, बल्कि अल्लाह की रज़ा और उसकी बड़ाई है। जब हम क़ुर्बानी करें तो दिल में यही इरादा हो कि हम अल्लाह के करीब हो रहे हैं, उसकी नेमतों का शुक्र अदा कर रहे हैं, और उसकी राह में अपनी सबसे प्यारी चीज़ क़ुर्बान करने की तैयारी दिखा रहे हैं। यही तक़वा हमें अल्लाह के करीब लाता है और हमारे आमाल को क़बूल करवाता है। अल्लाह हमें सच्चे दिल से इबादत करने और मुहसिन बनने की तौफ़ीक़ दे। आमीन।
📜 आयत 35-39 — अल-हज
अनुवाद — अल-हज 37
सूरा अल-हज आयत 37 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : खुदा तक न तो हरगिज़ उनके गोश्त ही पहुँचेगे और…सूरा आयत 37/78 — अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हज सुनें, अल-हज अनुवाद, अल-हज mp3, अल-हज pdf. आयत 35–39. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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