अल-हज · 38/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
۞ إِنَّ اللَّهَ يُدَافِعُ عَنِ الَّذِينَ آمَنُوا ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ خَوَّانٍ كَفُورٍ ۝٣٨
Innal laaha yudaafi` `anil lazeena aamanoo; innal laaha laa yuhibbu kulla khawwaanin kafoor
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) नेकी करने वालों को (हमेशा की) ख़ुशख़बरी दे दो इसमें शक नहीं कि खुदा ईमानवालों से कुफ्फ़ार को दूर दफा करता रहता है खुदा किसी बददयानत नाशुक्रे को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • يُدَافِعُ: बचाव करता है, टालता है।
  • خَوَّانٍ: बहुत अधिक ख़यानत करने वाला, विश्वासघाती।
  • كَفُورٍ: अत्यधिक कृतघ्न, नेमतों का इनकार करने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला अपने ईमानवाले बंदों पर अपनी विशेष कृपा और सुरक्षा प्रदान करता है। वह उनसे दुश्मनों के हमलों, साज़िशों और बुराइयों को दूर करता है। यह अल्लाह का वादा है कि वह मोमिनों की हिफ़ाज़त करता है, चाहे दुश्मन कितने भी ताकतवर क्यों न हों। यह सुरक्षा अल्लाह की ओर से उनके ईमान और उसकी राह में उनके संघर्ष का प्रतिफल है।

अल्लाह तआला ने यह भी बताया कि वह उन लोगों को पसंद नहीं करता जो ख़यानत (विश्वासघात) करते हैं और उसकी नेमतों का इनकार करते हैं। ऐसे लोग अल्लाह की रहमत से दूर होते हैं और उसकी नाराज़गी के पात्र बनते हैं। ख़यानत का अर्थ है अमानत में धोखा देना, और कुफ़्रान का अर्थ है अल्लाह की नेमतों को न पहचानना और उनका शुक्र न करना।

यह आयत मोमिनों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है कि अल्लाह उनकी हिफ़ाज़त करता है। जब अल्लाह किसी की सुरक्षा करता है, तो कोई ताकत उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकती। इसलिए ईमानवालों को चाहिए कि वे अल्लाह पर भरोसा रखें, उसकी आज्ञाओं का पालन करें और उसकी नेमतों के लिए शुक्र अदा करें। जो लोग अल्लाह की नेमतों को भूलकर उसकी नाफ़रमानी करते हैं, वे अपना नुकसान खुद करते हैं। अल्लाह उन्हें पसंद नहीं करता, बल्कि उनसे दूर रहता है।

यह आयत हमें सिखाती है कि ईमान और अच्छे आचरण के साथ जीवन जीने से अल्लाह की सुरक्षा मिलती है। जो लोग अल्लाह की राह में सब्र और स्थिरता दिखाते हैं, अल्लाह उनके दुश्मनों की साज़िशों को नाकाम करता है। यह एक ऐसा वादा है जो कभी टूटता नहीं, क्योंकि अल्लाह अपने वादों का पक्का है।

🎧 सुनें

📜 आयत 36-40 — अल-हज

36وَالْبُدْنَ جَعَلْنَاهَا لَكُم مِّن شَعَائِرِ اللَّهِ لَكُمْ فِيهَا خَيْرٌ ۖ فَاذْكُرُوا اسْمَ اللَّهِ عَلَيْهَا صَوَافَّ ۖ فَإِذَا وَجَبَتْ جُنُوبُهَا فَكُلُوا مِنْهَا وَأَطْعِمُوا الْقَانِعَ وَالْمُعْتَرَّ ۚ كَذَٰلِكَ سَخَّرْنَاهَا لَكُمْ لَعَلَّكُمْ تَشْكُرُونَ
और कुरबानी (मोटे गदबदे) ऊँट भी हमने तुम्हारे वास्ते खुदा की निशानियों में से क़रार दिया है इसमें तुम्हारी बहुत सी भलाईयाँ हैं फिर उनका तांते का तांता बाँध कर ज़िबाह करो और उस वक्त उन पर खुदा का नाम लो फिर जब उनके दस्त व बाजू काटकर गिर पड़े तो उन्हीं से तुम खुद भी खाओ और केनाअत पेशा फक़ीरों और माँगने वाले मोहताजों (दोनों) को भी खिलाओ हमने यूँ इन जानवरों को तुम्हारा ताबेए कर दिया ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो
37لَن يَنَالَ اللَّهَ لُحُومُهَا وَلَا دِمَاؤُهَا وَلَٰكِن يَنَالُهُ التَّقْوَىٰ مِنكُمْ ۚ كَذَٰلِكَ سَخَّرَهَا لَكُمْ لِتُكَبِّرُوا اللَّهَ عَلَىٰ مَا هَدَاكُمْ ۗ وَبَشِّرِ الْمُحْسِنِينَ
खुदा तक न तो हरगिज़ उनके गोश्त ही पहुँचेगे और न खून मगर (हाँ) उस तक तुम्हारी परहेज़गारी अलबत्ता पहुँचेगी ख़ुदा ने जानवरों को (इसलिए) यूँ तुम्हारे क़ाबू में कर दिया है ताकि जिस तरह खुदा ने तुम्हें बनाया है उसी तरह उसकी बड़ाई करो
38۞ إِنَّ اللَّهَ يُدَافِعُ عَنِ الَّذِينَ آمَنُوا ۗ إِنَّ اللَّهَ لَا يُحِبُّ كُلَّ خَوَّانٍ كَفُورٍ
और (ऐ रसूल) नेकी करने वालों को (हमेशा की) ख़ुशख़बरी दे दो इसमें शक नहीं कि खुदा ईमानवालों से कुफ्फ़ार को दूर दफा करता रहता है खुदा किसी बददयानत नाशुक्रे को हरगिज़ दोस्त नहीं रखता
39أُذِنَ لِلَّذِينَ يُقَاتَلُونَ بِأَنَّهُمْ ظُلِمُوا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ عَلَىٰ نَصْرِهِمْ لَقَدِيرٌ
जिन (मुसलमानों) से (कुफ्फ़ार) लड़ते थे चूँकि वह (बहुत) सताए गए उस वजह से उन्हें भी (जिहाद) की इजाज़त दे दी गई और खुदा तो उन लोगों की मदद पर यक़ीनन क़ादिर (वत वाना) है
40الَّذِينَ أُخْرِجُوا مِن دِيَارِهِم بِغَيْرِ حَقٍّ إِلَّا أَن يَقُولُوا رَبُّنَا اللَّهُ ۗ وَلَوْلَا دَفْعُ اللَّهِ النَّاسَ بَعْضَهُم بِبَعْضٍ لَّهُدِّمَتْ صَوَامِعُ وَبِيَعٌ وَصَلَوَاتٌ وَمَسَاجِدُ يُذْكَرُ فِيهَا اسْمُ اللَّهِ كَثِيرًا ۗ وَلَيَنصُرَنَّ اللَّهُ مَن يَنصُرُهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَقَوِيٌّ عَزِيزٌ
ये वह (मज़लूम हैं जो बेचारे) सिर्फ इतनी बात कहने पर कि हमारा परवरदिगार खुदा है (नाहक़) अपने-अपने घरों से निकाल दिए गये और अगर खुदा लोगों को एक दूसरे से दूर दफा न करता रहता तो गिरजे और यहूदियों के इबादत ख़ाने और मजूस के इबादतख़ाने और मस्जिद जिनमें कसरत से खुदा का नाम लिया जाता है कब के कब ढहा दिए गए होते और जो शख्स खुदा की मदद करेगा खुदा भी अलबत्ता उसकी मदद ज़रूर करेगा बेशक खुदा ज़रूर ज़बरदस्त ग़ालिब है
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अनुवाद — अल-हज 38

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Tuesday, August 18, 2026

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