Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- مُدْخَلًا – दाखिल होने की जगह, प्रवेश का स्थान।
- يَرْضَوْنَهُ – जिससे वे राज़ी (प्रसन्न) हों, जिसे वे पसंद करें।
- حَلِيمٌ – बहुत सहनशील, जो जल्दी सज़ा न दे, धैर्यवान।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला उन मुजाहिदीन (धर्मयुद्ध करने वालों) और सच्चे ईमानवालों से वादा कर रहा है, जिन्होंने अल्लाह की राह में अपने घर-बार छोड़े, अपनी जानें क़ुर्बान कीं और सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए निकले — कि वह उन्हें ऐसी जगह दाखिल करेगा जिससे वे खुश और राज़ी होंगे। वह जगह जन्नत है, जहाँ हर वह चीज़ मौजूद है जो दिल चाहे और आँखें लुत्फ़ उठाएँ। वहाँ की नेमतें (अनुग्रह) ऐसी हैं जिनका कोई अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता, और वहाँ का सुख-चैन हमेशा रहने वाला है। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह अपने वादे को पूरा करके ही रहता है।
फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह अलीम (सब कुछ जानने वाला) है — वह जानता है कि कौन सच्चे दिल से उसकी राह में निकला है और कौन दुनिया के माल या दिखावे के लिए। उसकी निगाह में हर नीयत (इरादा) साफ़ है। और वह हलीम (बहुत सहनशील) है — वह गुनाहगारों पर जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, बल्कि उन्हें मौका देता है, ताकि वे तौबा कर लें और अपनी ग़लतियों से बाज़ आ जाएँ। यह उसकी रहमत और करम है कि वह अपने बंदों के साथ नर्मी बरतता है।
दावती पहलू (नसीहत):
यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की राह में की गई हर क़ुर्बानी बेकार नहीं जाती। जो लोग सब्र और ईमान के साथ अल्लाह की राह में निकलते हैं, उनके लिए अल्लाह ने ऐसा इनाम तैयार किया है जो उनकी उम्मीदों से भी बढ़कर है। इसलिए हमें भी अपने जीवन में अल्लाह की राह में निकलने — चाहे वह इल्म हासिल करना हो, नेक काम करना हो, या दूसरों की मदद करना हो — को अपना निशाना बनाना चाहिए। अल्लाह की सहनशीलता हमें बताती है कि उसका दरवाज़ा तौबा के लिए हमेशा खुला है। हमें अपनी ग़लतियों पर शर्मिंदा होकर उसकी तरफ़ लौटना चाहिए, क्योंकि वह हमारी कमज़ोरियों को जानता है और फिर भी हमें मौका देता है। यही अल्लाह का प्यार और मेहरबानी है — कि वह जल्दी सज़ा नहीं देता, बल्कि हमें सुधरने का समय देता है। आओ हम अपने रब के इस करम को पहचानें और उसकी राह में अपने आप को लगा दें, ताकि हम भी उस मुकाम तक पहुँचें जहाँ हमारी आँखें ठंडी हों और दिल राज़ी हों।
📜 आयत 57-61 — सूरा अल-हज
अनुवाद — अल-हज 59
सूरा अल-हज आयत 59 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और बेशक तमाम रोज़ी देने वालों में खुदा ही सबसे…सूरा आयत 59/78 — सूरा अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-हज सुनें, सूरा अल-हज अनुवाद, सूरा अल-हज mp3, सूरा अल-हज pdf. आयत 57–61. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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