अल-हज · 59/78
अनुवाद उच्चारण — अल-हज
لَيُدْخِلَنَّهُم مُّدْخَلًا يَرْضَوْنَهُ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَعَلِيمٌ حَلِيمٌ ۝٥٩
La yudkhilan nahum mud khalany yardawnah; wa innal laaha la `Aleemun Haleem
📖 हिंदी अर्थ
और बेशक तमाम रोज़ी देने वालों में खुदा ही सबसे बेहतर है वह उन्हें ज़रूर ऐसी जगह (बेहिश्त) पहुँचा देगा जिससे वह निहाल हो जाएँगे

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • مُدْخَلًا – दाखिल होने की जगह, प्रवेश का स्थान।
  • يَرْضَوْنَهُ – जिससे वे राज़ी (प्रसन्न) हों, जिसे वे पसंद करें।
  • حَلِيمٌ – बहुत सहनशील, जो जल्दी सज़ा न दे, धैर्यवान।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला उन मुजाहिदीन (धर्मयुद्ध करने वालों) और सच्चे ईमानवालों से वादा कर रहा है, जिन्होंने अल्लाह की राह में अपने घर-बार छोड़े, अपनी जानें क़ुर्बान कीं और सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा के लिए निकले — कि वह उन्हें ऐसी जगह दाखिल करेगा जिससे वे खुश और राज़ी होंगे। वह जगह जन्नत है, जहाँ हर वह चीज़ मौजूद है जो दिल चाहे और आँखें लुत्फ़ उठाएँ। वहाँ की नेमतें (अनुग्रह) ऐसी हैं जिनका कोई अंदाज़ा नहीं लगाया जा सकता, और वहाँ का सुख-चैन हमेशा रहने वाला है। यह अल्लाह का वादा है, और अल्लाह अपने वादे को पूरा करके ही रहता है।

फिर अल्लाह तआला फ़रमाता है कि वह अलीम (सब कुछ जानने वाला) है — वह जानता है कि कौन सच्चे दिल से उसकी राह में निकला है और कौन दुनिया के माल या दिखावे के लिए। उसकी निगाह में हर नीयत (इरादा) साफ़ है। और वह हलीम (बहुत सहनशील) है — वह गुनाहगारों पर जल्दी अज़ाब नहीं भेजता, बल्कि उन्हें मौका देता है, ताकि वे तौबा कर लें और अपनी ग़लतियों से बाज़ आ जाएँ। यह उसकी रहमत और करम है कि वह अपने बंदों के साथ नर्मी बरतता है।

दावती पहलू (नसीहत):

यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की राह में की गई हर क़ुर्बानी बेकार नहीं जाती। जो लोग सब्र और ईमान के साथ अल्लाह की राह में निकलते हैं, उनके लिए अल्लाह ने ऐसा इनाम तैयार किया है जो उनकी उम्मीदों से भी बढ़कर है। इसलिए हमें भी अपने जीवन में अल्लाह की राह में निकलने — चाहे वह इल्म हासिल करना हो, नेक काम करना हो, या दूसरों की मदद करना हो — को अपना निशाना बनाना चाहिए। अल्लाह की सहनशीलता हमें बताती है कि उसका दरवाज़ा तौबा के लिए हमेशा खुला है। हमें अपनी ग़लतियों पर शर्मिंदा होकर उसकी तरफ़ लौटना चाहिए, क्योंकि वह हमारी कमज़ोरियों को जानता है और फिर भी हमें मौका देता है। यही अल्लाह का प्यार और मेहरबानी है — कि वह जल्दी सज़ा नहीं देता, बल्कि हमें सुधरने का समय देता है। आओ हम अपने रब के इस करम को पहचानें और उसकी राह में अपने आप को लगा दें, ताकि हम भी उस मुकाम तक पहुँचें जहाँ हमारी आँखें ठंडी हों और दिल राज़ी हों।



📜 आयत 57-61 — अल-हज

57وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो यही वह (कम्बख्त) लोग हैं
58وَالَّذِينَ هَاجَرُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ قُتِلُوا أَوْ مَاتُوا لَيَرْزُقَنَّهُمُ اللَّهُ رِزْقًا حَسَنًا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
जिनके लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है जिन लोगों ने खुदा की राह में अपने देस छोडे फ़िर शहीद किए गए या (आप अपनी मौत से) मर गए खुदा उन्हें (आख़िरत में) ज़रूर उम्दा रोज़ी अता फ़रमाएगा
59لَيُدْخِلَنَّهُم مُّدْخَلًا يَرْضَوْنَهُ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَعَلِيمٌ حَلِيمٌ
और बेशक तमाम रोज़ी देने वालों में खुदा ही सबसे बेहतर है वह उन्हें ज़रूर ऐसी जगह (बेहिश्त) पहुँचा देगा जिससे वह निहाल हो जाएँगे
60۞ ذَٰلِكَ وَمَنْ عَاقَبَ بِمِثْلِ مَا عُوقِبَ بِهِ ثُمَّ بُغِيَ عَلَيْهِ لَيَنصُرَنَّهُ اللَّهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌ
और खुदा तो बेशक बड़ा वाक़िफकार बुर्दवार है यही (ठीक) है और जो शख्स (अपने दुश्मन को) उतना ही सताए जितना ये उसके हाथों से सताया गया था उसके बाद फिर (दोबारा दुशमन की तरफ़ से) उस पर ज्यादती की जाए तो खुदा उस मज़लूम की ज़रूर मदद करेगा
61ذَٰلِكَ بِأَنَّ اللَّهَ يُولِجُ اللَّيْلَ فِي النَّهَارِ وَيُولِجُ النَّهَارَ فِي اللَّيْلِ وَأَنَّ اللَّهَ سَمِيعٌ بَصِيرٌ
बेशक खुदा बड़ा माफ करने वाला बख़शने वाला है ये (मदद) इस वजह से दी जाएगी कि खुदा (बड़ा क़ादिर है वही) तो रात को दिन में दाख़िल करता है और दिन को रात में दाख़िल करता है और इसमें भी शक नहीं कि खुदा सब कुछ जानता है
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीRevelation
59आयत

अनुवाद — अल-हज 59

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Tuesday, August 18, 2026

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