अल-हज · 58/78
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-हज
وَالَّذِينَ هَاجَرُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ قُتِلُوا أَوْ مَاتُوا لَيَرْزُقَنَّهُمُ اللَّهُ رِزْقًا حَسَنًا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ ۝٥٨
Wallazeena haajaroo fee sabeelil laahi summa qutilooo law maatoo la yarzuqan nahumul laahu rizqan hasanaa; wa innal laaha la Huwa khairur raaziqeen
📖 हिंदी अर्थ
जिनके लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है जिन लोगों ने खुदा की राह में अपने देस छोडे फ़िर शहीद किए गए या (आप अपनी मौत से) मर गए खुदा उन्हें (आख़िरत में) ज़रूर उम्दा रोज़ी अता फ़रमाएगा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • هَاجَرُوا (हाजरू): अपने वतन और घर-बार को छोड़कर अल्लाह की राह में निकल जाना।
  • فِي سَبِيلِ اللَّهِ (फी सबीलिल्लाह): अल्लाह की राह में, उसकी रज़ा और दीन की मदद के लिए।
  • قُتِلُوا (कुतिलू): शहीद कर दिए गए, जंग में मारे गए।
  • مَاتُوا (मातू): प्राकृतिक मौत मरे, बिना जंग के।
  • رِزْقًا حَسَنًا (रिज़्क़न हसनन): अच्छा और पाक रिज़्क़, यानी जन्नत की ऐसी नेमतें जो कभी खत्म न हों।

तफ़सीर:

यह आयत उन मुबारक लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह की राह में अपने वतन, अपने घर, अपने रिश्तेदारों और अपनी सारी चीज़ों को छोड़ दिया। उन्होंने यह क़ुर्बानी सिर्फ अल्लाह की रज़ा हासिल करने के लिए दी, और अपने दीन की इज़्ज़त और मदद के लिए हिजरत की। फिर उनमें से कुछ ने जिहाद के दौरान शहादत पाई, और कुछ अपनी प्राकृतिक मौत मरे — लेकिन दोनों ही सूरतों में अल्लाह ने उनके लिए एक ऐसा वादा किया है जो कभी टूटने वाला नहीं।

अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों को वह "रिज़्क़न हसनन" यानी बेहतरीन रिज़्क़ अता करेगा। यह रिज़्क़ दुनिया का नहीं, बल्कि जन्नत का है — वह नेमतें जो कभी खत्म नहीं होतीं, वह सुख जो कभी दुख में नहीं बदलता, वह आराम जो कभी परेशानी में नहीं बदलता। यह एक ऐसा रिज़्क़ है जो हमेशा रहेगा, कभी घटेगा नहीं, और न ही कभी समाप्त होगा। कुछ मुफ़स्सिरीन ने कहा है कि "हसनन" का मतलब यह भी है कि वह रिज़्क़ पाक और हलाल होगा — जिसमें कोई गंदगी, कोई कमी या कोई बुराई नहीं होगी।

फिर अल्लाह तआला अपनी बड़ाई बयान करते हुए फ़रमाता है: "और बेशक अल्लाह ही सबसे बेहतर रिज़्क़ देने वाला है।" यानी दुनिया में चाहे जितने भी देने वाले हों, लेकिन असली रिज़्क़ देने वाला सिर्फ अल्लाह है। वह अपने बंदों को बिना हिसाब के देता है, और उसका देना किसी के रोकने से रुक नहीं सकता। जब अल्लाह किसी को देने का फैसला कर ले, तो कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती।


दावती पहलू:

प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में की गई कुर्बानी कभी जाया नहीं जाती। जो लोग दुनिया की चीज़ों को अल्लाह की राह में छोड़ते हैं, अल्लाह उन्हें उससे कहीं बेहतर चीज़ें देता है। आज अगर आप अपने वतन, अपने घर, अपनी नौकरी या अपने रिश्तेदारों को अल्लाह और उसके दीन की खातिर छोड़ने पर मजबूर हैं, तो याद रखिए — अल्लाह आपके लिए जन्नत का ऐसा घर तैयार कर रहा है जो इन सब चीज़ों से कहीं ज्यादा बेहतर है। यह आयत उन लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो अल्लाह की राह में मुसीबतें झेलते हैं, और यह हमें सब्र और इस्तिक़ामत की तालीम देती है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें भी अपनी राह में कुर्बानी देने की तौफ़ीक़ अता करे, और हमें भी उस "रिज़्क़न हसनन" से नवाज़े। आमीन।



📜 आयत 56-60 — सूरा अल-हज

56الْمُلْكُ يَوْمَئِذٍ لِّلَّهِ يَحْكُمُ بَيْنَهُمْ ۚ فَالَّذِينَ آمَنُوا وَعَمِلُوا الصَّالِحَاتِ فِي جَنَّاتِ النَّعِيمِ
उस दिन की हुकूमत तो ख़ास खुदा ही की होगी वह लोगों (के बाहमी एख्तेलाफ) का फ़ैसला कर देगा तो जिन लोगों ने ईमान कुबूल किया और अच्छे काम किए हैं वह नेअमतों के (भरे) हुए बाग़ात (बेहश्त) में रहेंगे
57وَالَّذِينَ كَفَرُوا وَكَذَّبُوا بِآيَاتِنَا فَأُولَٰئِكَ لَهُمْ عَذَابٌ مُّهِينٌ
और जिन लोगों ने कुफ्र एख्तियार किया और हमारी आयतों को झुठलाया तो यही वह (कम्बख्त) लोग हैं
58وَالَّذِينَ هَاجَرُوا فِي سَبِيلِ اللَّهِ ثُمَّ قُتِلُوا أَوْ مَاتُوا لَيَرْزُقَنَّهُمُ اللَّهُ رِزْقًا حَسَنًا ۚ وَإِنَّ اللَّهَ لَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
जिनके लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है जिन लोगों ने खुदा की राह में अपने देस छोडे फ़िर शहीद किए गए या (आप अपनी मौत से) मर गए खुदा उन्हें (आख़िरत में) ज़रूर उम्दा रोज़ी अता फ़रमाएगा
59لَيُدْخِلَنَّهُم مُّدْخَلًا يَرْضَوْنَهُ ۗ وَإِنَّ اللَّهَ لَعَلِيمٌ حَلِيمٌ
और बेशक तमाम रोज़ी देने वालों में खुदा ही सबसे बेहतर है वह उन्हें ज़रूर ऐसी जगह (बेहिश्त) पहुँचा देगा जिससे वह निहाल हो जाएँगे
60۞ ذَٰلِكَ وَمَنْ عَاقَبَ بِمِثْلِ مَا عُوقِبَ بِهِ ثُمَّ بُغِيَ عَلَيْهِ لَيَنصُرَنَّهُ اللَّهُ ۗ إِنَّ اللَّهَ لَعَفُوٌّ غَفُورٌ
और खुदा तो बेशक बड़ा वाक़िफकार बुर्दवार है यही (ठीक) है और जो शख्स (अपने दुश्मन को) उतना ही सताए जितना ये उसके हाथों से सताया गया था उसके बाद फिर (दोबारा दुशमन की तरफ़ से) उस पर ज्यादती की जाए तो खुदा उस मज़लूम की ज़रूर मदद करेगा
अल-हजकुरान सूची
78आयत
मदनीअवतरण स्थान
58आयत

अनुवाद — अल-हज 58

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Monday, September 28, 2026

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