अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- هَاجَرُوا (हाजरू): अपने वतन और घर-बार को छोड़कर अल्लाह की राह में निकल जाना।
- فِي سَبِيلِ اللَّهِ (फी सबीलिल्लाह): अल्लाह की राह में, उसकी रज़ा और दीन की मदद के लिए।
- قُتِلُوا (कुतिलू): शहीद कर दिए गए, जंग में मारे गए।
- مَاتُوا (मातू): प्राकृतिक मौत मरे, बिना जंग के।
- رِزْقًا حَسَنًا (रिज़्क़न हसनन): अच्छा और पाक रिज़्क़, यानी जन्नत की ऐसी नेमतें जो कभी खत्म न हों।
तफ़सीर:
यह आयत उन मुबारक लोगों के बारे में है जिन्होंने अल्लाह की राह में अपने वतन, अपने घर, अपने रिश्तेदारों और अपनी सारी चीज़ों को छोड़ दिया। उन्होंने यह क़ुर्बानी सिर्फ अल्लाह की रज़ा हासिल करने के लिए दी, और अपने दीन की इज़्ज़त और मदद के लिए हिजरत की। फिर उनमें से कुछ ने जिहाद के दौरान शहादत पाई, और कुछ अपनी प्राकृतिक मौत मरे — लेकिन दोनों ही सूरतों में अल्लाह ने उनके लिए एक ऐसा वादा किया है जो कभी टूटने वाला नहीं।
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि ऐसे लोगों को वह "रिज़्क़न हसनन" यानी बेहतरीन रिज़्क़ अता करेगा। यह रिज़्क़ दुनिया का नहीं, बल्कि जन्नत का है — वह नेमतें जो कभी खत्म नहीं होतीं, वह सुख जो कभी दुख में नहीं बदलता, वह आराम जो कभी परेशानी में नहीं बदलता। यह एक ऐसा रिज़्क़ है जो हमेशा रहेगा, कभी घटेगा नहीं, और न ही कभी समाप्त होगा। कुछ मुफ़स्सिरीन ने कहा है कि "हसनन" का मतलब यह भी है कि वह रिज़्क़ पाक और हलाल होगा — जिसमें कोई गंदगी, कोई कमी या कोई बुराई नहीं होगी।
फिर अल्लाह तआला अपनी बड़ाई बयान करते हुए फ़रमाता है: "और बेशक अल्लाह ही सबसे बेहतर रिज़्क़ देने वाला है।" यानी दुनिया में चाहे जितने भी देने वाले हों, लेकिन असली रिज़्क़ देने वाला सिर्फ अल्लाह है। वह अपने बंदों को बिना हिसाब के देता है, और उसका देना किसी के रोकने से रुक नहीं सकता। जब अल्लाह किसी को देने का फैसला कर ले, तो कोई ताकत उसे रोक नहीं सकती।
दावती पहलू:
प्यारे भाइयों और बहनों! यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह की राह में की गई कुर्बानी कभी जाया नहीं जाती। जो लोग दुनिया की चीज़ों को अल्लाह की राह में छोड़ते हैं, अल्लाह उन्हें उससे कहीं बेहतर चीज़ें देता है। आज अगर आप अपने वतन, अपने घर, अपनी नौकरी या अपने रिश्तेदारों को अल्लाह और उसके दीन की खातिर छोड़ने पर मजबूर हैं, तो याद रखिए — अल्लाह आपके लिए जन्नत का ऐसा घर तैयार कर रहा है जो इन सब चीज़ों से कहीं ज्यादा बेहतर है। यह आयत उन लोगों के लिए एक बड़ी खुशखबरी है जो अल्लाह की राह में मुसीबतें झेलते हैं, और यह हमें सब्र और इस्तिक़ामत की तालीम देती है। अल्लाह से दुआ है कि वह हमें भी अपनी राह में कुर्बानी देने की तौफ़ीक़ अता करे, और हमें भी उस "रिज़्क़न हसनन" से नवाज़े। आमीन।
📜 आयत 56-60 — अल-हज
अनुवाद — अल-हज 58
सूरा अल-हज आयत 58 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिनके लिए ज़लील करने वाला अज़ाब है जिन लोगों ने…सूरा आयत 58/78 — अल-हज الحج (मदनी). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-हज सुनें, अल-हज अनुवाद, अल-हज mp3, अल-हज pdf. आयत 56–60. हिंदी अर्थ: اردو.
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Tuesday, August 18, 2026
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