अल-मोमिनुन · 12/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن سُلَالَةٍ مِّن طِينٍ ۝١٢
Wa laqad khalaqnal insaana min sulaalatim minteen
📖 हिंदी अर्थ
और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
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A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • सुलाला (سُلالَة): किसी चीज़ का सार या निचोड़, जो निकाला गया हो। अरबी भाषा में इसका प्रयोग उस शुद्ध और चुने हुए भाग के लिए होता है जो किसी चीज़ से अलग किया जाए।
  • त़ीन (طِين): मिट्टी, जो पानी के साथ मिली हुई हो।

तफ़सीर (व्याख्या):

इस आयत में अल्लाह तआला अपनी महान शक्ति और कुदरत का बयान करते हुए फ़रमाता है कि हमने इंसान को मिट्टी के सार (निचोड़) से पैदा किया। यहाँ "इंसान" से मुराद हज़रत आदम अलैहिस्सलाम हैं, जो इंसानी नस्ल के पहले पिता हैं। उन्हें अल्लाह ने मिट्टी से बनाया, और वह मिट्टी पूरी ज़मीन से इकट्ठा करके लाई गई थी। यह मिट्टी पानी के साथ मिलाकर गूंथी गई, फिर उसका सार निकाला गया और उससे आदम का पुतला बनाया गया।

यह बात इंसान को अपनी हैसियत याद दिलाती है कि उसकी शुरुआत मिट्टी से हुई है, जो कोई क़द्र-ओ-मंज़िलत वाली चीज़ नहीं। फिर अल्लाह ने उसे अपनी रूह फूंककर इज़्ज़त बख्शी और उसे ज़मीन का ख़लीफ़ा बनाया। यह अल्लाह की रहमत और करम की दलील है कि उसने मिट्टी जैसी चीज़ से इंसान को इतनी खूबसूरत शक्ल और अक्ल-ओ-समझ अता की।

इस आयत में इंसान के लिए बड़ी नसीहत है कि वह घमंड न करे, क्योंकि उसकी असल जड़ मिट्टी है। जब उसकी शुरुआत मिट्टी से हुई, तो उसे अपने रब के सामने झुकना चाहिए और उसकी नेअमतों का शुक्र अदा करना चाहिए। यह भी याद रखने की बात है कि जिस अल्लाह ने मिट्टी से इंसान को बनाकर इतनी तरक़्क़ी दी, वह उसे दोबारा ज़िंदा करके हिसाब लेने पर ज़रूर क़ादिर है। इसलिए इंसान को चाहिए कि वह अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ गुज़ारे, ताकि आख़िरत में कामयाब हो सके।

यह आयत हमें अल्लाह की कुदरत पर ग़ौर करने की दावत देती है कि हम अपनी पैदाइश के बारे में सोचें और समझें कि हमारा पैदा करने वाला कितना महान है। जो मिट्टी को इंसान बना सकता है, वह हर चीज़ पर क़ादिर है। यही वजह है कि हमें अपने रब से मुहब्बत करनी चाहिए और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी बितानी चाहिए।



📜 आयत 10-14 — सूरा अल-मोमिनुन

10أُولَٰئِكَ هُمُ الْوَارِثُونَ
(आदमी की औलाद में) यही लोग सच्चे वारिस है
11الَّذِينَ يَرِثُونَ الْفِرْدَوْسَ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जो बेहश्त बरी का हिस्सा लेंगे (और) यही लोग इसमें हमेशा (जिन्दा) रहेंगे
12وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن سُلَالَةٍ مِّن طِينٍ
और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया
13ثُمَّ جَعَلْنَاهُ نُطْفَةً فِي قَرَارٍ مَّكِينٍ
फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा
14ثُمَّ خَلَقْنَا النُّطْفَةَ عَلَقَةً فَخَلَقْنَا الْعَلَقَةَ مُضْغَةً فَخَلَقْنَا الْمُضْغَةَ عِظَامًا فَكَسَوْنَا الْعِظَامَ لَحْمًا ثُمَّ أَنشَأْنَاهُ خَلْقًا آخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسَنُ الْخَالِقِينَ
फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
12आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 12

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Friday, October 2, 2026

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