अल-मोमिनुन · 13/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
ثُمَّ جَعَلْنَاهُ نُطْفَةً فِي قَرَارٍ مَّكِينٍ ۝١٣
Summa ja`alnaahu nutfatan fee qaraarim makeen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नुत्फ़ा (نُطْفَةً): मनी (वीर्य) की एक बूँद, जो पुरुष के शरीर से निकलती है।
  • क़रार (قَرَارٍ): ठहरने की जगह, स्थिर स्थान।
  • मकीन (مَكِينٍ): मज़बूत, सुरक्षित और अच्छी तरह से संभाले हुए।

तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला ने इस आयत में इंसान की पैदाइश के दूसरे मरहले का ज़िक्र फ़रमाया है। पहले उसने आदम (अलैहिस्सलाम) को मिट्टी से पैदा किया, फिर उनकी नस्ल को एक क़तरे (नुत्फ़ा) से जारी किया। यह नुत्फ़ा पुरुष की पीठ (सुल्ब) से निकलता है और औरत के रहम (गर्भाशय) में पहुँचता है। अल्लाह ने इस नुत्फ़े के लिए एक बेहतरीन और महफ़ूज़ जगह मुक़र्रर की — जिसे "क़रार मकीन" कहा गया — यानी रहम (गर्भ), जो हर तरह के ख़तरे से उसे बचाता है। यह जगह इतनी मज़बूत और सुरक्षित है कि बच्चा वहाँ नौ महीने तक पलता-बढ़ता है, और बाहरी झटकों, गर्मी-सर्दी और हर तरह की आफ़त से महफ़ूज़ रहता है।

यह अल्लाह की कुदरत का अज़ीमुश्शान नमूना है कि एक छोटी सी बूँद से इंसान की तख़लीक़ होती है। जो लोग अपनी पैदाइश पर ग़ौर करें, वे समझ सकते हैं कि यह सब किसी हाकिम और दाना की कारीगरी के बग़ैर मुमकिन नहीं। यही वजह है कि अल्लाह तआला इंसान को दावत देता है कि वह अपनी तख़लीक़ पर ग़ौर करे — ताकि उसे अपने रब की कुदरत और उसकी वहदानियत का यक़ीन हो।

दावती पहलू (प्रेरणादायक संदेश):

यह आयत हमें सिखाती है कि इंसान की पैदाइश कोई इत्तिफ़ाक़ या अंधी प्रक्रिया नहीं, बल्कि अल्लाह की मुकम्मल तदबीर और हिकमत का नतीजा है। जब हम सोचते हैं कि हमारा आग़ाज़ एक क़तरे से हुआ, तो हमें ग़ुरूर और घमंड नहीं करना चाहिए। यह हमें अज्ज़त (विनम्रता) सिखाता है और अल्लाह के सामने सर झुकाने की तरफ़ ले जाता है। जिस रब ने हमें इस तरह पैदा किया, वही हमें दोबारा ज़िंदा करने पर भी क़ादिर है। यही अकेला रब हमारी इबादत का हक़दार है। हमें चाहिए कि हम अपनी पैदाइश के इस निज़ाम पर ग़ौर करें और अपने रब का शुक्र अदा करें, क्योंकि उसने हमें बेहतरीन शक्ल और सूरत अता की और हमें इस क़ाबिल बनाया कि हम उसे पहचानें और उसकी इबादत करें।



📜 आयत 11-15 — अल-मोमिनुन

11الَّذِينَ يَرِثُونَ الْفِرْدَوْسَ هُمْ فِيهَا خَالِدُونَ
जो बेहश्त बरी का हिस्सा लेंगे (और) यही लोग इसमें हमेशा (जिन्दा) रहेंगे
12وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن سُلَالَةٍ مِّن طِينٍ
और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया
13ثُمَّ جَعَلْنَاهُ نُطْفَةً فِي قَرَارٍ مَّكِينٍ
फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा
14ثُمَّ خَلَقْنَا النُّطْفَةَ عَلَقَةً فَخَلَقْنَا الْعَلَقَةَ مُضْغَةً فَخَلَقْنَا الْمُضْغَةَ عِظَامًا فَكَسَوْنَا الْعِظَامَ لَحْمًا ثُمَّ أَنشَأْنَاهُ خَلْقًا آخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسَنُ الْخَالِقِينَ
फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है
15ثُمَّ إِنَّكُم بَعْدَ ذَٰلِكَ لَمَيِّتُونَ
फिर इसके बाद यक़ीनन तुम सब लोगों को (एक न एक दिन) मरना है
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 13

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Tuesday, August 18, 2026

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