अल-मोमिनुन · 14/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
ثُمَّ خَلَقْنَا النُّطْفَةَ عَلَقَةً فَخَلَقْنَا الْعَلَقَةَ مُضْغَةً فَخَلَقْنَا الْمُضْغَةَ عِظَامًا فَكَسَوْنَا الْعِظَامَ لَحْمًا ثُمَّ أَنشَأْنَاهُ خَلْقًا آخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسَنُ الْخَالِقِينَ ۝١٤
Summa khalaqnan nutfata `alaqatan fakhalaqnal `alaqata mudghatan fakhalaq nal mudghata `izaaman fakasawnal `izaama lahman summa anshaanaahu khalqan aakhar; fatabaarakal laahu ahsanul khaaliqeen
📖 हिंदी अर्थ
फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • नुत्फ़ा (नुत्फ़तुन): मनुष्य का वीर्य (शुक्राणु)।
  • अलक़ा (अलक़तुन): जमा हुआ खून (लाल रक्त का थक्का)।
  • मुज़्ग़ा (मुज़्ग़तुन): चबाई हुई चीज़ के बराबर गोश्त का टुकड़ा।
  • कसौना (कसौना): हमने पहनाया या ढका।
  • अन्शा'नाहु: हमने उसे पैदा किया या बनाया।
  • तबारक: बहुत बरकत वाला, पवित्र और उच्च है।

तफ़सीर (व्याख्या):

फिर हमने उस नुत्फ़े (वीर्य) को, जो रहम (गर्भाशय) में ठहरता है, 'अलक़ा' (जमा हुआ खून) बना दिया। यानी चालीस दिनों के बाद वह वीर्य लाल खून के थक्के में तब्दील हो जाता है। फिर हमने उस 'अलक़ा' को 'मुज़्ग़ा' (चबाई हुई मांस की गांठ) बना दिया, जो आकार में इतना छोटा होता है जितना चबाने पर मुँह में रहता है। फिर हमने उस 'मुज़्ग़ा' (नरम गोश्त) को हड्डियों में बदल दिया, जो सख्त और मज़बूत होती हैं। फिर हमने उन हड्डियों को गोश्त (मांस) से ढक दिया, ताकि वह सुंदर और संतुलित रूप धारण करे। इसके बाद हमने उसे एक और नई रचना (खल्क़) में ढाला, यानी उसमें रूह (आत्मा) फूँकी और उसे जीवन दिया, तो वह एक जीवित, सुनने, देखने और समझने वाला इंसान बन गया।

तो बहुत बरकत वाला और पाक है अल्लाह, जो सबसे अच्छा पैदा करने वाला और आकार देने वाला है। उसकी रचना में कोई कमी नहीं, और वह हर चीज़ को बेहतरीन तरीके से बनाता है। यह आयत अल्लाह की कुदरत (शक्ति) और उसके हुनरमंदी का अद्भुत नमूना पेश करती है, जो इंसान को अपने रब की तरफ़ ध्यान देने की दावत देती है।

दावती पहलू (प्रेरक संदेश):

इस आयत में अल्लाह तआला ने इंसान की पैदाइश के मरहलों (चरणों) को बयान करके उसे अपनी कुदरत पर ग़ौर करने की तरग़ीब दी है। जब इंसान यह सोचता है कि वह एक बूँद से गुज़रता हुआ खून, फिर मांस, फिर हड्डियाँ, फिर जानदार इंसान बना, तो उसे यक़ीन हो जाता है कि यह सब करने वाला कोई और नहीं बल्कि अल्लाह है, जो हर चीज़ पर क़ादिर (सक्षम) है। यही अल्लाह मुर्दों को ज़िंदा करेगा और क़यामत के दिन हमें उठाएगा। यह आयत हमें सिखाती है कि हम अपनी पैदाइश पर ग़ौर करें, अपने रब का शुक्र अदा करें और उसकी इबादत में अपनी ज़िंदगी गुज़ारें। अल्लाह की रचना में जितना ग़ौर किया जाए, उतना ही ईमान मज़बूत होता है और दिल में उसकी मुहब्बत बढ़ती है। याद रखिए, जिस अल्लाह ने हमें इतने अच्छे तरीके से बनाया, वह हमें कभी अकेला नहीं छोड़ेगा और हमारी हर ज़रूरत को जानता है।



📜 आयत 12-16 — सूरा अल-मोमिनुन

12وَلَقَدْ خَلَقْنَا الْإِنسَانَ مِن سُلَالَةٍ مِّن طِينٍ
और हमने आदमी को गीली मिट्टी के जौहर से पैदा किया
13ثُمَّ جَعَلْنَاهُ نُطْفَةً فِي قَرَارٍ مَّكِينٍ
फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा
14ثُمَّ خَلَقْنَا النُّطْفَةَ عَلَقَةً فَخَلَقْنَا الْعَلَقَةَ مُضْغَةً فَخَلَقْنَا الْمُضْغَةَ عِظَامًا فَكَسَوْنَا الْعِظَامَ لَحْمًا ثُمَّ أَنشَأْنَاهُ خَلْقًا آخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسَنُ الْخَالِقِينَ
फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है
15ثُمَّ إِنَّكُم بَعْدَ ذَٰلِكَ لَمَيِّتُونَ
फिर इसके बाद यक़ीनन तुम सब लोगों को (एक न एक दिन) मरना है
16ثُمَّ إِنَّكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ تُبْعَثُونَ
इसके बाद कयामत के दिन तुम सब के सब कब्रों से उठाए जाओगे
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14आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 14

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Friday, October 2, 2026

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