अल-मोमिनुन · 15/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
ثُمَّ إِنَّكُم بَعْدَ ذَٰلِكَ لَمَيِّتُونَ ۝١٥
Summa innakum ba`da zaalika la maaiyitoon
📖 हिंदी अर्थ
फिर इसके बाद यक़ीनन तुम सब लोगों को (एक न एक दिन) मरना है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
M Mahmoud Khalil Al-Husary ✓
A Abdurrahman As-Sudais ✓
M Mohamed Siddiq Al-Minshawi ✓
A Abdul Basit Abdul Samad ✓
A Ali Al-Hudhaify ✓
A Ahmed ibn Ali al-Ajamy ✓
A Abu Bakr Ash-Shaatree ✓
M Muhammad Ayyoub ✓
A Abdullah Basfar ✓
A Abdullah Al-Juhani ✓
M Maher Al Muaiqly ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • لَمَيِّتُونَ: अवश्य मरने वाले हो।

तफ़सीर:

फिर इस सारी रचना प्रक्रिया के बाद, ऐ लोगों! तुम सबको एक दिन मरना है। जब तुम्हारी आयु पूरी हो जाएगी और तुम्हारा समय आ जाएगा, तो तुम इस दुनिया से चले जाओगे। यह जीवन का एक निश्चित और अपरिहार्य सत्य है। चाहे कोई कितना भी शक्तिशाली, धनी या प्रतिष्ठित क्यों न हो, मृत्यु के आगे सबको झुकना पड़ेगा।

यह आयत हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया हमारा स्थायी घर नहीं है। हम यहाँ केवल एक मुसाफिर हैं। जिस प्रकार एक बच्चा माँ के गर्भ में विभिन्न अवस्थाओं से गुज़रता है, फिर पैदा होता है, बढ़ता है, और फिर एक दिन उसे इस दुनिया से विदा लेना होता है। यही जीवन का नियम है।

इस आयत में हमारे लिए एक बड़ी सीख है कि हमें अपने जीवन को व्यर्थ नहीं गँवाना चाहिए। जिस दिन हमें मरना है, उस दिन से पहले हमें अपने अमल को सुधार लेना चाहिए। मृत्यु के बाद का जीवन अनंत है, और वहाँ हमें अपने कर्मों का हिसाब देना होगा।

इसलिए, ऐ इंसान! तू अपने रब की इबादत कर, उसके हुक्मों पर चल, और उस दिन की तैयारी कर जब तू उसके सामने खड़ा होगा। यह जीवन एक परीक्षा है, और मृत्यु उस परीक्षा का अंत नहीं, बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत है। जो लोग इस दुनिया में अच्छे कर्म करेंगे, उनके लिए आने वाला जीवन खुशियों से भरा होगा, और जो बुरे कर्म करेंगे, उनके लिए वह जीवन कठिनाइयों से भरा होगा।

अतः हमें चाहिए कि हम इस नश्वर जीवन को सही तरीके से जिएँ, अल्लाह की राह में भलाई करें, और उस दिन के लिए तैयार रहें जब हमें उसके सामने पेश होना है। यही सच्ची सफलता है।



📜 आयत 13-17 — सूरा अल-मोमिनुन

13ثُمَّ جَعَلْنَاهُ نُطْفَةً فِي قَرَارٍ مَّكِينٍ
फिर हमने उसको एक महफूज़ जगह (औरत के रहम में) नुत्फ़ा बना कर रखा
14ثُمَّ خَلَقْنَا النُّطْفَةَ عَلَقَةً فَخَلَقْنَا الْعَلَقَةَ مُضْغَةً فَخَلَقْنَا الْمُضْغَةَ عِظَامًا فَكَسَوْنَا الْعِظَامَ لَحْمًا ثُمَّ أَنشَأْنَاهُ خَلْقًا آخَرَ ۚ فَتَبَارَكَ اللَّهُ أَحْسَنُ الْخَالِقِينَ
फिर हम ही ने नुतफ़े को जमा हुआ ख़ून बनाया फिर हम ही ने मुनजमिद खून को गोश्त का लोथड़ा बनाया हम ही ने लोथडे क़ी हड्डियाँ बनायीं फिर हम ही ने हड्डियों पर गोश्त चढ़ाया फिर हम ही ने उसको (रुह डालकर) एक दूसरी सूरत में पैदा किया तो (सुबहान अल्लाह) ख़ुदा बा बरकत है जो सब बनाने वालो से बेहतर है
15ثُمَّ إِنَّكُم بَعْدَ ذَٰلِكَ لَمَيِّتُونَ
फिर इसके बाद यक़ीनन तुम सब लोगों को (एक न एक दिन) मरना है
16ثُمَّ إِنَّكُمْ يَوْمَ الْقِيَامَةِ تُبْعَثُونَ
इसके बाद कयामत के दिन तुम सब के सब कब्रों से उठाए जाओगे
17وَلَقَدْ خَلَقْنَا فَوْقَكُمْ سَبْعَ طَرَائِقَ وَمَا كُنَّا عَنِ الْخَلْقِ غَافِلِينَ
और हम ही ने तुम्हारे ऊपर तह ब तह आसमान बनाए और हम मख़लूक़ात से बेखबर नही है
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
15आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 15

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Saturday, October 3, 2026

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