अनुवाद — Tafsir
शब्दों के अर्थ:
- رَسُولًا مِّنْهُمْ: उन्हीं में से एक रसूल (संदेशवाहक)।
- أَنِ اعْبُدُوا اللَّهَ: यानी यह आदेश दिया गया कि केवल अल्लाह की इबादत करो।
- مَا لَكُم مِّنْ إِلَٰهٍ غَيْرُهُ: तुम्हारे लिए उसके अलावा कोई सच्चा पूज्य नहीं है।
- أَفَلَا تَتَّقُونَ: क्या तुम अल्लाह के अज़ाब से नहीं डरते?
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला ने अपनी रहमत और हिकमत से हर क़ौम की ओर उन्हीं में से एक रसूल भेजा, ताकि वह उनकी भाषा और उनके हालात को समझ सके और उन्हें सीधे रास्ते की ओर बुला सके। इस आयत में हज़रत हूद (अलैहिस्सलाम) का ज़िक्र है, जिन्हें आद क़ौम की ओर भेजा गया। उन्होंने अपनी क़ौम से कहा: "अल्लाह की इबादत करो, उसके सिवा तुम्हारा कोई सच्चा माबूद नहीं है।" यही तौहीद का पैग़ाम है जो हर नबी लेकर आया। उन्होंने अपनी क़ौम को डराया कि क्या तुम अल्लाह के अज़ाब से नहीं डरते? क्या तुम उसकी नाफ़रमानी से बाज़ नहीं आओगे? यह नसीहत थी, जो उनके दिलों को नर्म करने और उन्हें हक़ की तरफ लाने के लिए थी।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि अल्लाह तआला ने हर ज़माने में अपने बंदों की हिदायत के लिए रसूल भेजे, और हर रसूल का पैग़ाम एक ही था—अल्लाह की इबादत और उसके अज़ाब से डरना। यह हमारे लिए बहुत बड़ी रहमत है कि अल्लाह ने हमें किताब और सुन्नत के ज़रिए राह दिखाई। हमें चाहिए कि हम अपनी ज़िंदगी में तौहीद को मज़बूत करें, सिर्फ़ अल्लाह से डरें और उसी से उम्मीद रखें। यही सच्ची कामयाबी का रास्ता है। अल्लाह का डर हमें गुनाहों से रोकता है और नेकी की तरफ ले जाता है। आओ, हम अपने दिलों को अल्लाह की इबादत से रौशन करें और उसकी रहमत के तलबगार बनें।
📜 आयत 30-34 — अल-मोमिनुन
अनुवाद — अल-मोमिनुन 32
सूरा अल-मोमिनुन आयत 32 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने उनही में से (एक आदमी सालेह को) रसूल…सूरा आयत 32/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 30–34. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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