अल-मोमिनुन · 73/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَإِنَّكَ لَتَدْعُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ ۝٧٣
Wa innaka latad`oohum ilaa Siraatim Mustaqeem
📖 हिंदी अर्थ
और तुम तो यक़ीनन उनको सीधी राह की तरफ बुलाते हो

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • لَتَدْعُوهُمْ: तुम निश्चित रूप से उन्हें बुला रहे हो।
  • صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ: सीधा मार्ग, जिसमें कोई टेढ़ापन न हो।

तफ़सीर:

ऐ नबी! तुम निश्चित रूप से अपनी क़ौम और दूसरे लोगों को एक ऐसे सीधे रास्ते की ओर बुला रहे हो, जिसमें कोई कमी, टेढ़ापन या भटकाव नहीं है। यह वही रास्ता है जो अल्लाह ने अपने बंदों के लिए चुना है — और वह है इस्लाम का रास्ता। यह वह मार्ग है जो इंसान को दुनिया और आख़िरत की भलाई तक पहुँचाता है, उसे अल्लाह की रज़ा और जन्नत की तरफ ले जाता है।

यह आयत नबी ﷺ के मिशन की सच्चाई और उनके दावत के सही होने की गवाही देती है। अल्लाह तआला खुद अपने नबी की तस्दीक़ कर रहे हैं कि आप जिस राह की तरफ बुला रहे हैं, वही सीधी और सच्ची राह है। यह उन लोगों के लिए बड़ी खुशखबरी है जो इस दावत को क़बूल करते हैं — कि वे सच्चे मार्ग पर हैं।

इस आयत से हमें यह सबक मिलता है कि इस्लाम ही वह सीधा रास्ता है जिसे अल्लाह ने अपने बंदों के लिए पसंद किया है। यह रास्ता इंसान की फ़ितरत के अनुकूल है, उसकी अक्ल को संतुष्ट करता है, उसके दिल को सुकून देता है और उसकी ज़िंदगी को दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाब बनाता है।

ऐ अल्लाह के बंदो! यही वह रास्ता है जिस पर चलकर हमारे पहले के नेक लोग चले, और यही वह रास्ता है जो हमें अल्लाह की मोहब्बत, उसकी मग़फिरत और जन्नत तक पहुँचाएगा। अल्लाह ने अपने नबी को इसी रास्ते की तरफ बुलाने के लिए भेजा, और यही रास्ता हमारी नजात का ज़रिया है। आओ, हम इस सीधे रास्ते को अपनाएँ, अपनी ज़िंदगी को इस पर चलाएँ, और उस खुशी को हासिल करें जो अल्लाह ने अपने मोमिन बंदों के लिए तैयार की है।



📜 आयत 71-75 — अल-मोमिनुन

71وَلَوِ اتَّبَعَ الْحَقُّ أَهْوَاءَهُمْ لَفَسَدَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ وَمَن فِيهِنَّ ۚ بَلْ أَتَيْنَاهُم بِذِكْرِهِمْ فَهُمْ عَن ذِكْرِهِم مُّعْرِضُونَ
और अगर कहीं हक़ उनकी नफसियानी ख्वाहिश की पैरवी करता है तो सारे आसमान व ज़मीन और जो लोग उनमें हैं (सबके सब) बरबाद हो जाते बल्कि हम तो उन्हीं के तज़किरे (जिबरील के वास्ते से) उनके पास लेकर आए तो यह लोग अपने ही तज़किरे से मुँह मोड़तें हैं
72أَمْ تَسْأَلُهُمْ خَرْجًا فَخَرَاجُ رَبِّكَ خَيْرٌ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
(ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (अपनी रिसालत की) कुछ उजरत माँगतें हों तो तुम्हारे परवरदिगार की उजरत उससे कही बेहतर है और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देने वाला है
73وَإِنَّكَ لَتَدْعُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और तुम तो यक़ीनन उनको सीधी राह की तरफ बुलाते हो
74وَإِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ عَنِ الصِّرَاطِ لَنَاكِبُونَ
और इसमें शक नहीं कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वह सीधी राह से हटे हुए हैं
75۞ وَلَوْ رَحِمْنَاهُمْ وَكَشَفْنَا مَا بِهِم مِّن ضُرٍّ لَّلَجُّوا فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ
और अगर हम उन पर तरस खायें और जो तकलीफें उनको (कुफ्र की वजह से) पहुँच रही हैं उन को दफा कर दें तो यक़ीनन ये लोग (और भी) अपनी सरकशी पर अड़ जाए और भटकते फिरें
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीRevelation
73आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 73

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Tuesday, August 18, 2026

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