अल-मोमिनुन · 72/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
أَمْ تَسْأَلُهُمْ خَرْجًا فَخَرَاجُ رَبِّكَ خَيْرٌ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ ۝٧٢
Am tas`aluhum kharjan fakharaaju Rabbika khairunw wa Huwa khairur raaziqeen
📖 हिंदी अर्थ
(ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (अपनी रिसालत की) कुछ उजरत माँगतें हों तो तुम्हारे परवरदिगार की उजरत उससे कही बेहतर है और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देने वाला है

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • خَرْجًا (ख़राजन): भेंट, पारिश्रमिक, या कोई मूल्य जो किसी काम के बदले में दिया जाए।
  • خَرَاجُ رَبِّكَ (ख़राजु रब्बिक): तुम्हारे रब का दिया हुआ (इनाम, रोज़ी और बदला)।
  • خَيْرُ الرَّازِقِينَ (ख़ैरुर्राज़िक़ीन): सबसे अच्छा रोज़ी देने वाला।

तफ़सीर (व्याख्या):

ऐ नबी! क्या इन लोगों ने ईमान लाने से इसलिए इनकार किया कि तुम उनसे कोई मेहनताना या पारिश्रमिक माँगते हो? क्या तुमने उनसे कोई भेंट या माल का लालच किया जिसके बदले में वे तुम्हारी बात मानने से बचते हों? हरगिज़ नहीं! तुमने तो उनसे कुछ भी नहीं माँगा। तुम्हारा काम तो सिर्फ़ अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाना है।

अगर तुमने उनसे कुछ माँगा भी होता, तो भी अल्लाह का दिया हुआ इनाम और उसका ख़ज़ाना उनके दिए हुए से कहीं बेहतर है। अल्लाह ही सबसे अच्छा रोज़ी देने वाला है — वह अपने बंदों को बिना किसी शर्त के रोज़ी देता है, और उसका दिया हुआ धन, बरकत और स्थायी है। उसकी देन कभी ख़त्म नहीं होती, जबकि दुनिया वालों की देन फ़ानी और अधूरी है।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम की तब्लीग़ (प्रचार) में किसी दुनियावी मतलब या मुआवज़े की गुंजाइश नहीं। जो लोग अल्लाह के दीन की तरफ़ बुलाते हैं, उन्हें सिर्फ़ अल्लाह की रज़ा और उसका इनाम चाहिए। यही नबी की सुन्नत है। और जो लोग दुनिया के माल के लालच में दीन को नहीं अपनाते, उन्हें समझना चाहिए कि अल्लाह का ख़ज़ाना किसी इंसान के ख़ज़ाने से कहीं बड़ा है। अल्लाह तआला अपने नेक बंदों को दुनिया में भी रोज़ी देता है और आख़िरत में भी सबसे उत्तम बदला देगा। इसलिए हमें अपनी नीयत को ख़ालिस रखना चाहिए और दुनिया की कमाई से बढ़कर अल्लाह की दी हुई रोज़ी पर भरोसा करना चाहिए। याद रखिए, जो अल्लाह के लिए देता है, अल्लाह उसे उससे कहीं बेहतर देता है।



📜 आयत 70-74 — सूरा अल-मोमिनुन

70أَمْ يَقُولُونَ بِهِ جِنَّةٌ ۚ بَلْ جَاءَهُم بِالْحَقِّ وَأَكْثَرُهُمْ لِلْحَقِّ كَارِهُونَ
या कहते हैं कि इसको जुनून हो गया है (हरगिज़ उसे जुनून नहीं) बल्कि वह तो उनके पास हक़ बात लेकर आया है और उनमें के अक्सर हक़ बात से नफरत रखते हैं
71وَلَوِ اتَّبَعَ الْحَقُّ أَهْوَاءَهُمْ لَفَسَدَتِ السَّمَاوَاتُ وَالْأَرْضُ وَمَن فِيهِنَّ ۚ بَلْ أَتَيْنَاهُم بِذِكْرِهِمْ فَهُمْ عَن ذِكْرِهِم مُّعْرِضُونَ
और अगर कहीं हक़ उनकी नफसियानी ख्वाहिश की पैरवी करता है तो सारे आसमान व ज़मीन और जो लोग उनमें हैं (सबके सब) बरबाद हो जाते बल्कि हम तो उन्हीं के तज़किरे (जिबरील के वास्ते से) उनके पास लेकर आए तो यह लोग अपने ही तज़किरे से मुँह मोड़तें हैं
72أَمْ تَسْأَلُهُمْ خَرْجًا فَخَرَاجُ رَبِّكَ خَيْرٌ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
(ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (अपनी रिसालत की) कुछ उजरत माँगतें हों तो तुम्हारे परवरदिगार की उजरत उससे कही बेहतर है और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देने वाला है
73وَإِنَّكَ لَتَدْعُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और तुम तो यक़ीनन उनको सीधी राह की तरफ बुलाते हो
74وَإِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ عَنِ الصِّرَاطِ لَنَاكِبُونَ
और इसमें शक नहीं कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वह सीधी राह से हटे हुए हैं
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
72आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 72

सूरा अल-मोमिनुन आयत 72 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (अपनी रिसालत की) कुछ उजरत…

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Wednesday, September 30, 2026

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