अल-मोमिनुन · 74/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَإِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ عَنِ الصِّرَاطِ لَنَاكِبُونَ ۝٧٤
Wa innnal lazeena laa yu`minoona bil Aakhirati `anis siraati lanaakiboon
📖 हिंदी अर्थ
और इसमें शक नहीं कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वह सीधी राह से हटे हुए हैं
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • الصِّرَاطِ: सीधा रास्ता, इस्लाम का मार्ग।
  • لَنَاكِبُونَ: भटकने वाले, मुड़ जाने वाले, रास्ते से हट जाने वाले।

तफ़सीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों की स्थिति स्पष्ट करती है जो आख़िरत (परलोक) पर ईमान नहीं रखते। आख़िरत पर ईमान का अर्थ है—मृत्यु के बाद पुनर्जीवित होने, अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब होने, जन्नत और जहन्नम के अस्तित्व पर पूर्ण विश्वास। जब कोई व्यक्ति इन सत्यों को नहीं मानता, तो उसका दिल सीधे रास्ते से हट जाता है और वह जीवन के उद्देश्य को भूलकर केवल दुनिया की ख्वाहिशों में डूब जाता है।

ऐसे लोग सीधे मार्ग (इस्लाम) से भटककर टेढ़े-मेढ़े रास्तों पर चल पड़ते हैं, जो उन्हें आग (जहन्नम) की ओर ले जाते हैं। वे सत्य को देखते हुए भी उससे मुँह मोड़ लेते हैं, क्योंकि उनके दिलों में आख़िरत का भय नहीं होता और न ही उन्हें अपने कर्मों का हिसाब देने की चिंता सताती है। यही कारण है कि वे गुमराही में बढ़ते चले जाते हैं और हर अच्छे काम से दूर होते जाते हैं।

यह आयत हमें सिखाती है कि आख़िरत पर ईमान ही वह शक्ति है जो इंसान को सीधे रास्ते पर स्थिर रखती है। जिसे यकीन हो कि उसके हर अमल का हिसाब होगा, वह कभी बुराई की तरफ नहीं बढ़ता। अल्लाह तआला ने हमें इस दुनिया में भेजकर अकेला नहीं छोड़ा, बल्कि कुरआन और सुन्नत के ज़रिए सीधा रास्ता दिखाया है। यह रास्ता इंसान को दुनिया में सुकून और आख़िरत में कामयाबी तक पहुँचाता है।

प्यारे भाइयों और बहनों! हमें चाहिए कि हम अपने ईमान को मज़बूत करें और आख़िरत के दिन की तैयारी में लगे रहें। यही वह नेक रास्ता है जो हमें जन्नत की तरफ ले जाता है। अल्लाह हम सबको सीधे रास्ते पर चलने की तौफ़ीक़ दे और हमें उन लोगों में से न बनाए जो आख़िरत से ग़ाफ़िल होकर भटक जाते हैं। आमीन।

🎧 सुनें

📜 आयत 72-76 — अल-मोमिनुन

72أَمْ تَسْأَلُهُمْ خَرْجًا فَخَرَاجُ رَبِّكَ خَيْرٌ ۖ وَهُوَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ
(ऐ रसूल) क्या तुम उनसे (अपनी रिसालत की) कुछ उजरत माँगतें हों तो तुम्हारे परवरदिगार की उजरत उससे कही बेहतर है और वह तो सबसे बेहतर रोज़ी देने वाला है
73وَإِنَّكَ لَتَدْعُوهُمْ إِلَىٰ صِرَاطٍ مُّسْتَقِيمٍ
और तुम तो यक़ीनन उनको सीधी राह की तरफ बुलाते हो
74وَإِنَّ الَّذِينَ لَا يُؤْمِنُونَ بِالْآخِرَةِ عَنِ الصِّرَاطِ لَنَاكِبُونَ
और इसमें शक नहीं कि जो लोग आख़िरत पर ईमान नहीं रखते वह सीधी राह से हटे हुए हैं
75۞ وَلَوْ رَحِمْنَاهُمْ وَكَشَفْنَا مَا بِهِم مِّن ضُرٍّ لَّلَجُّوا فِي طُغْيَانِهِمْ يَعْمَهُونَ
और अगर हम उन पर तरस खायें और जो तकलीफें उनको (कुफ्र की वजह से) पहुँच रही हैं उन को दफा कर दें तो यक़ीनन ये लोग (और भी) अपनी सरकशी पर अड़ जाए और भटकते फिरें
76وَلَقَدْ أَخَذْنَاهُم بِالْعَذَابِ فَمَا اسْتَكَانُوا لِرَبِّهِمْ وَمَا يَتَضَرَّعُونَ
और हमने उनको अज़ाब में गिरफ्तार किया तो भी वे लोग न तो अपने परवरदिगार के सामने झुके और गिड़गिड़ाएँ
अल-मोमिनुनकुरान सूची
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74आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 74

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Tuesday, August 18, 2026

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