अल-मोमिनुन · 81/118
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-मोमिनुन
بَلْ قَالُوا مِثْلَ مَا قَالَ الْأَوَّلُونَ ۝٨١
Bal qaaloo misla maa qaalal awwaloon
📖 हिंदी अर्थ
(इन बातों को समझें ख़ाक नहीं) बल्कि जो अगले लोग कहते आए वैसी ही बात ये भी कहने लगे

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • بَلْ (बल): बल्कि, नहीं, अपितु — यहाँ यह इस्तिद्राक (पिछली बात को काटने) के लिए है।
  • قَالُوا (क़ालू): उन्होंने कहा।
  • مِثْلَ (मिस्ल): समान, जैसा।
  • مَا قَالَ (मा क़ाल): जो कहा।
  • الْأَوَّلُونَ (अल-अव्वलून): पिछले लोग, पूर्ववर्ती समुदाय, अर्थात काफिर पूर्वज।

विस्तृत तफ़सीर (व्याख्या):

अल्लाह तआला फ़रमाते हैं कि ये काफ़िर लोग क़ुरआन की आयात और नबी ﷺ की दावत पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र नहीं करते, बल्कि वे वही बात दोहरा रहे हैं जो उनसे पहले के काफ़िर समुदायों ने कही थी। यानी जब उन्हें मौत के बाद जी उठने (हश्र-ओ-नश्र) की ख़बर दी जाती है, तो वे उसे नामुमकिन ठहराते हैं और कहते हैं: "क्या जब हम मर जाएँगे और मिट्टी और हड्डियाँ बन जाएँगे, तो क्या हम दोबारा ज़िंदा किए जाएँगे?" — यही वही सवाल है जो आद, समूद और फ़िरऔन की क़ौम ने अपने नबियों से पूछा था।

यह आयत बताती है कि कुफ़्र और इन्कार की जड़ें पुरानी हैं। हर ज़माने के मुन्किरीन ने एक ही रास्ता अपनाया — हक़ को नकारना और पुरानी बातों को दोहराना। उनके पास कोई नई दलील नहीं होती, बस वही पुराने शुब्हात (शक) होते हैं जिन्हें वे दुहराते रहते हैं।

यहाँ अल्लाह तआला हमें सिखाता है कि हक़ की दावत हमेशा से एक जैसी रही है, और बातिल की मुख़ालफ़त भी एक जैसी। लेकिन अंजाम हमेशा हक़ वालों के हक़ में रहा। जो लोग अक़्ल और दिल से सोचते हैं, वे नबियों की दावत क़बूल करते हैं, और जो हठधर्मी और तक़लीद (अंधी पैरवी) पर अड़े रहते हैं, वे उसी अज़ाब के मुस्तहिक़ बनते हैं जो पिछले काफ़िरों को मिला।

इस आयत में हमारे लिए बड़ी नसीहत है कि हम अपने दीन को समझकर अपनाएँ, सिर्फ़ इसलिए नहीं कि हमारे बुज़ुर्गों ने ऐसा किया, बल्कि इसलिए कि यह हक़ है। और जो लोग हक़ को नकारते हैं, उनका अंजाम उन पिछली क़ौमों जैसा ही होगा — जिन्होंने नबियों को झुठलाया और अल्लाह के अज़ाब में पकड़े गए।

अल्लाह तआला हमें हिदायत दे कि हम अक़्ल से काम लें, हक़ को पहचानें और उस पर साबित-क़दम रहें। आमीन।



📜 आयत 79-83 — सूरा अल-मोमिनुन

79وَهُوَ الَّذِي ذَرَأَكُمْ فِي الْأَرْضِ وَإِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
और वह वही (ख़ुदा) है जिसने तुम को रुए ज़मीन में (हर तरफ) फैला दिया और फिर (एक दिन) सब के सब उसी के सामने इकट्ठे किये जाओगे
80وَهُوَ الَّذِي يُحْيِي وَيُمِيتُ وَلَهُ اخْتِلَافُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
और वही वह (ख़ुदा) है जो जिलाता और मारता है कि और रात दिन का फेर बदल भी उसी के एख्तियार में है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
81بَلْ قَالُوا مِثْلَ مَا قَالَ الْأَوَّلُونَ
(इन बातों को समझें ख़ाक नहीं) बल्कि जो अगले लोग कहते आए वैसी ही बात ये भी कहने लगे
82قَالُوا أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
कि जब हम मर जाएँगें और (मरकर) मिट्टी (का ढ़ेर) और हड्डियाँ हो जाएँगें तो क्या हम फिर दोबारा (क्रबों से ज़िन्दा करके) निकाले जाएँगे
83لَقَدْ وُعِدْنَا نَحْنُ وَآبَاؤُنَا هَٰذَا مِن قَبْلُ إِنْ هَٰذَا إِلَّا أَسَاطِيرُ الْأَوَّلِينَ
इसका वायदा तो हमसे और हमसे पहले हमारे बाप दादाओं से भी (बार हा) किया जा चुका है ये तो बस सिर्फ अगले लोगों के ढकोसले हैं
अल-मोमिनुनकुरान सूची
118आयत
मक्कीअवतरण स्थान
81आयत

अनुवाद — अल-मोमिनुन 81

सूरा अल-मोमिनुन आयत 81 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : (इन बातों को समझें ख़ाक नहीं) बल्कि जो अगले लोग…

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Friday, October 2, 2026

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