अल-मोमिनुन · 80/118
अनुवाद उच्चारण — अल-मोमिनुन
وَهُوَ الَّذِي يُحْيِي وَيُمِيتُ وَلَهُ اخْتِلَافُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ ۝٨٠
Wa Huwal lazee yuhyee wa yumeetu wa lahukh tilaaful laili wannahaar; afalaa ta`qiloon
📖 हिंदी अर्थ
और वही वह (ख़ुदा) है जो जिलाता और मारता है कि और रात दिन का फेर बदल भी उसी के एख्तियार में है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • يُحْيِي (जिलाता है): जीवन प्रदान करता है, निर्जीव से सजीव बनाता है।
  • يُمِيتُ (मारता है): मृत्यु देता है, जीवन समाप्त करता है।
  • اخْتِلَافُ (अंतर/बदलाव): एक दूसरे की जगह लेना, क्रमिक परिवर्तन।
  • اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ (रात और दिन): अंधकार और प्रकाश की अवधि।

तफसीर (व्याख्या):

वही अकेला अल्लाह है जो जीवन देता है और मृत्यु देता है। उसके सिवा कोई जीवन देने वाला नहीं, और न ही उसके सिवा कोई मौत देने वाला है। यही नहीं, रात और दिन के आने-जाने का क्रम, उनकी लंबाई और छोटाई, अंधकार और प्रकाश का बदलाव—यह सब उसी के इशारे पर चलता है। कभी रात लंबी होती है तो दिन छोटा, कभी दिन लंबा होता है तो रात छोटी। यह नियमित बदलाव किसी यादृच्छिक घटना का परिणाम नहीं, बल्कि एक महान रचयिता की योजना का प्रमाण है।

क्या तुम लोग इतना भी नहीं सोचते? क्या तुम्हारी अक्ल इन स्पष्ट निशानियों को देखकर यह निष्कर्ष नहीं निकालती कि यह सब एक सर्वशक्तिमान और सर्वज्ञ प्रभु का कार्य है? जो व्यक्ति जीवन और मृत्यु पर नियंत्रण रखता है, और रात-दिन के इस विशाल तंत्र को चलाता है, वही तो पूजा के योग्य है। यह सृष्टि का प्रमाण है कि उसकी शक्ति असीम है और उसकी बुद्धि अद्वितीय है।

दावत (आमंत्रण):

ऐ इंसान! जरा अपनी आँखें खोलो और अपने चारों ओर देखो। हर सुबह और हर शाम में अल्लाह की कुदरत का एक नया सबक छिपा है। जब तुम देखते हो कि रात के बाद दिन आता है, और दिन के बाद रात, तो समझो कि यह अल्लाह ही है जो इन्हें बदल रहा है। यही अल्लाह तुम्हें जीवन देता है, और यही तुम्हें मौत देगा। फिर क्यों न तुम उसी की इबादत करो? क्यों न तुम उसी के आगे सिर झुकाओ? यह कितनी बड़ी भूल है कि इंसान इन निशानियों को देखकर भी गाफिल रहे, और उस रचयिता को भूल जाए जिसने यह सब बनाया है। अल्लाह की रहमत और कुदरत पर विश्वास करो, और उसकी इबादत में अपनी जिंदगी बिताओ—यही तुम्हारी सफलता का रास्ता है।

🎧 सुनें

📜 आयत 78-82 — अल-मोमिनुन

78وَهُوَ الَّذِي أَنشَأَ لَكُمُ السَّمْعَ وَالْأَبْصَارَ وَالْأَفْئِدَةَ ۚ قَلِيلًا مَّا تَشْكُرُونَ
हालाँकि वही वह (मेहरबान खुदा) है जिसने तुम्हारे लिए कान और ऑंखें और दिल पैदा किये (मगर) तुम लोग हो ही बहुत कम शुक्र करने वाले
79وَهُوَ الَّذِي ذَرَأَكُمْ فِي الْأَرْضِ وَإِلَيْهِ تُحْشَرُونَ
और वह वही (ख़ुदा) है जिसने तुम को रुए ज़मीन में (हर तरफ) फैला दिया और फिर (एक दिन) सब के सब उसी के सामने इकट्ठे किये जाओगे
80وَهُوَ الَّذِي يُحْيِي وَيُمِيتُ وَلَهُ اخْتِلَافُ اللَّيْلِ وَالنَّهَارِ ۚ أَفَلَا تَعْقِلُونَ
और वही वह (ख़ुदा) है जो जिलाता और मारता है कि और रात दिन का फेर बदल भी उसी के एख्तियार में है तो क्या तुम (इतना भी) नहीं समझते
81بَلْ قَالُوا مِثْلَ مَا قَالَ الْأَوَّلُونَ
(इन बातों को समझें ख़ाक नहीं) बल्कि जो अगले लोग कहते आए वैसी ही बात ये भी कहने लगे
82قَالُوا أَإِذَا مِتْنَا وَكُنَّا تُرَابًا وَعِظَامًا أَإِنَّا لَمَبْعُوثُونَ
कि जब हम मर जाएँगें और (मरकर) मिट्टी (का ढ़ेर) और हड्डियाँ हो जाएँगें तो क्या हम फिर दोबारा (क्रबों से ज़िन्दा करके) निकाले जाएँगे
अल-मोमिनुनकुरान सूची
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अनुवाद — अल-मोमिनुन 80

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सूरा आयत 80/118 — अल-मोमिनुन المؤمنون (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-मोमिनुन सुनें, अल-मोमिनुन अनुवाद, अल-मोमिनुन mp3, अल-मोमिनुन pdf. आयत 78–82. हिंदी अर्थ: اردو.




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Tuesday, August 18, 2026

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