अल-फुरकान · 23/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
وَقَدِمْنَا إِلَىٰ مَا عَمِلُوا مِنْ عَمَلٍ فَجَعَلْنَاهُ هَبَاءً مَّنثُورًا ۝٢٣
Wa qadimnaaa ilaa maa `amiloo min `amalin faja`alnaahu habaaa`am mansooraa
📖 हिंदी अर्थ
और उन लोगों ने (दुनिया में) जो कुछ नेक काम किए हैं हम उसकी तरफ तवज्जों करेंगें तो हम उसको (गोया) उड़ती हुई ख़ाक बनाकर (बरबाद कर) देगें

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अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • وَقَدِمْنَا: हम पहुँचे या हमने उसकी ओर रुख किया (यहाँ अर्थ है कि हमने उस कर्म की ओर ध्यान दिया और उसका हिसाब लिया)।
  • هَبَاءً مَّنثُورًا: बिखरी हुई धूल या वह बारीक कण जो सूर्य की किरणों में दिखाई देते हैं और बिखरे हुए होते हैं।

तफसीर (व्याख्या):

यह आयत उन लोगों के लिए एक बहुत बड़ी चेतावनी है जो दुनिया में अच्छे काम तो करते हैं, लेकिन उनके दिलों में ईमान और अल्लाह की रज़ा का जज़्बा नहीं होता। अल्लाह तआला फरमाता है कि जब हम उनके किए हुए कामों की तरफ ध्यान देंगे, तो हम उन सभी अच्छे कामों को—चाहे वह सदक़ा हो, रिश्तेदारों से मेल-जोल हो, या कोई और नेकी—ऐसा बिखरी हुई धूल बना देंगे जो हवा में उड़ जाती है और जिसका कोई निशान नहीं बचता।

इसका मतलब यह है कि जो कर्म ईमान और इख़लास (शुद्ध नियत) से खाली हैं, वे आख़िरत में बिल्कुल बेकार हैं। जिस तरह सूरज की किरणों में दिखने वाली धूल के कण हाथ में नहीं आते और उन्हें पकड़ा नहीं जा सकता, उसी तरह बिना ईमान के अच्छे कामों का कोई वज़न नहीं होगा। यह इसलिए है क्योंकि अल्लाह के यहाँ वही काम क़ुबूल होता है जो ईमान, इख़लास और रसूलुल्लाह ﷺ की सुन्नत के अनुसार हो।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि हमारे कर्मों की क़ीमत उनके दिखावे से नहीं, बल्कि उनकी नीयत और ईमान से है। जो व्यक्ति अल्लाह पर ईमान रखता है, अपने कर्मों को सिर्फ अल्लाह की रज़ा के लिए करता है, और रसूल ﷺ के तरीक़े पर चलता है, उसके कर्म कभी बेकार नहीं होंगे। अल्लाह उन्हें अमूल्य बना देगा और उनका बदला कई गुना बढ़ाकर देगा। यह हमारे लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है कि अगर हम अपने ईमान को मज़बूत करें और अपने कर्मों को अल्लाह के लिए ख़ालिस कर दें, तो हमारी छोटी-छोटी नेकियाँ भी अल्लाह के यहाँ बहुत बड़ी बन जाएँगी। आइए हम अपने दिलों को ईमान की रोशनी से रोशन करें और अपने हर काम को अल्लाह की रज़ा के लिए करें, ताकि क़ियामत के दिन हमारे कर्म बिखरी धूल की तरह न हों, बल्कि हमारी नजात (मुक्ति) का ज़रिया बनें।



📜 आयत 21-25 — सूरा अल-फुरकान

21۞ وَقَالَ الَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْنَا الْمَلَائِكَةُ أَوْ نَرَىٰ رَبَّنَا ۗ لَقَدِ اسْتَكْبَرُوا فِي أَنفُسِهِمْ وَعَتَوْا عُتُوًّا كَبِيرًا
और जो लोग (क़यामत में) हमारी हुज़ूरी की उम्मीद नहीं रखते कहा करते हैं कि आख़िर फरिश्ते हमारे पास क्यों नहीं नाज़िल किए गए या हम अपने परवरदिगार को (क्यों नहीं) देखते उन लोगों ने अपने जी में अपने को (बहुत) बड़ा समझ लिया है और बड़ी सरकशी की
22يَوْمَ يَرَوْنَ الْمَلَائِكَةَ لَا بُشْرَىٰ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُجْرِمِينَ وَيَقُولُونَ حِجْرًا مَّحْجُورًا
जिस दिन ये लोग फरिश्तों को देखेंगे उस दिन गुनाह गारों को कुछ खुशी न होगी और फरिश्तों को देखकर कहेंगे दूर दफान
23وَقَدِمْنَا إِلَىٰ مَا عَمِلُوا مِنْ عَمَلٍ فَجَعَلْنَاهُ هَبَاءً مَّنثُورًا
और उन लोगों ने (दुनिया में) जो कुछ नेक काम किए हैं हम उसकी तरफ तवज्जों करेंगें तो हम उसको (गोया) उड़ती हुई ख़ाक बनाकर (बरबाद कर) देगें
24أَصْحَابُ الْجَنَّةِ يَوْمَئِذٍ خَيْرٌ مُّسْتَقَرًّا وَأَحْسَنُ مَقِيلًا
उस दिन जन्नत वालों का ठिकाना भी बेहतर है बेहतर होगा और आरमगाह भी अच्छी से अच्छी
25وَيَوْمَ تَشَقَّقُ السَّمَاءُ بِالْغَمَامِ وَنُزِّلَ الْمَلَائِكَةُ تَنزِيلًا
और जिस दिन आसमान बदली के सबब से फट जाएगा और फरिश्ते कसरत से (जूक दर ज़ूक) नाज़िल किए जाएँगे
अल-फुरकानकुरान सूची
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23आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 23

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Friday, October 2, 2026

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