अल-फुरकान · 22/77
अनुवाद उच्चारण — अल-फुरकान
يَوْمَ يَرَوْنَ الْمَلَائِكَةَ لَا بُشْرَىٰ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُجْرِمِينَ وَيَقُولُونَ حِجْرًا مَّحْجُورًا ۝٢٢
Yawma yarawnal malaaa `ikata laa bushraa Yawma`izil lilmujrimeena wa yaqooloona hijram mahjooraa
📖 हिंदी अर्थ
जिस दिन ये लोग फरिश्तों को देखेंगे उस दिन गुनाह गारों को कुछ खुशी न होगी और फरिश्तों को देखकर कहेंगे दूर दफान
📜

अनुवाद — Tafsir

शब्दों के अर्थ:

  • حِجْرًا مَّحْجُورًا: यानी पूरी तरह से हराम और मना किया हुआ, ऐसा जिसमें कोई गुंजाइश या राह न हो।

तफसीर (व्याख्या):

उस दिन को याद करो जब अपराधी (मुजरिम) फ़रिश्तों को देखेंगे। यह वह समय होगा जब वे मौत के वक़्त, क़ब्र में, हश्र के मैदान में और जहन्नम की तरफ ले जाते वक़्त फ़रिश्तों को अपनी आँखों से देखेंगे। लेकिन उनके लिए उस दिन कोई खुशखबरी नहीं होगी। मोमिनीन के लिए फ़रिश्तों का दीदार बशारत (खुशखबरी) और सलामती का पैग़ाम लेकर आता है, लेकिन इन मुजरिमों के लिए यही दीदार अज़ाब और रंज का ज़रिया बनेगा। फ़रिश्ते उनसे कहेंगे: "तुम्हारे लिए जन्नत पूरी तरह से हराम कर दी गई है, यह तुम पर सख़्त मना है।" यानी जिस तरह दुनिया में वे अल्लाह की रहमत से महरूम रहे, उसी तरह आख़िरत में भी उनके लिए हर भलाई का दरवाज़ा बंद कर दिया जाएगा।

यह आयत हमें चौंकाती है और सोचने पर मजबूर करती है कि आज हम फ़रिश्तों को नहीं देखते, लेकिन एक दिन ज़रूर देखेंगे। अगर हम नेक और मोमिन बनकर जिएँगे, तो फ़रिश्ते हमें जन्नत की खुशखबरी देंगे और हमारा स्वागत करेंगे। लेकिन अगर हम गुनाहों और सरकशी में डूबे रहे, तो वही फ़रिश्ते हमारे लिए अज़ाब का ज़रिया बन जाएँगे। यह आयत दिल को झिंझोड़ती है कि हम अपनी ज़िंदगी को संवारें, अल्लाह की इबादत करें, उसके हुक्मों पर चलें और अपने आपको उस अंजाम से बचाएँ जो मुजरिमों का इंतज़ार कर रहा है। अल्लाह की रहमत बहुत वसीअ है, और वह चाहता है कि हम उसकी तरफ रुजू करें, तौबा करें और अपने अंजाम को बेहतर बनाएँ। यही हमारी कामयाबी है।

🎧 सुनें

📜 आयत 20-24 — अल-फुरकान

20وَمَا أَرْسَلْنَا قَبْلَكَ مِنَ الْمُرْسَلِينَ إِلَّا إِنَّهُمْ لَيَأْكُلُونَ الطَّعَامَ وَيَمْشُونَ فِي الْأَسْوَاقِ ۗ وَجَعَلْنَا بَعْضَكُمْ لِبَعْضٍ فِتْنَةً أَتَصْبِرُونَ ۗ وَكَانَ رَبُّكَ بَصِيرًا
और (ऐ रसूल) हमने तुम से पहले जितने पैग़म्बर भेजे वह सब के सब यक़ीनन बिला शक खाना खाते थे और बाज़ारों में चलते फिरते थे और हमने तुम में से एक को एक का (ज़रिया) आज़माइश बना दिया (मुसलमानों) क्या तुम अब भी सब्र करते हो (या नहीं) और तुम्हारा परवरदिगार (सब की) देख भाल कर रहा है
21۞ وَقَالَ الَّذِينَ لَا يَرْجُونَ لِقَاءَنَا لَوْلَا أُنزِلَ عَلَيْنَا الْمَلَائِكَةُ أَوْ نَرَىٰ رَبَّنَا ۗ لَقَدِ اسْتَكْبَرُوا فِي أَنفُسِهِمْ وَعَتَوْا عُتُوًّا كَبِيرًا
और जो लोग (क़यामत में) हमारी हुज़ूरी की उम्मीद नहीं रखते कहा करते हैं कि आख़िर फरिश्ते हमारे पास क्यों नहीं नाज़िल किए गए या हम अपने परवरदिगार को (क्यों नहीं) देखते उन लोगों ने अपने जी में अपने को (बहुत) बड़ा समझ लिया है और बड़ी सरकशी की
22يَوْمَ يَرَوْنَ الْمَلَائِكَةَ لَا بُشْرَىٰ يَوْمَئِذٍ لِّلْمُجْرِمِينَ وَيَقُولُونَ حِجْرًا مَّحْجُورًا
जिस दिन ये लोग फरिश्तों को देखेंगे उस दिन गुनाह गारों को कुछ खुशी न होगी और फरिश्तों को देखकर कहेंगे दूर दफान
23وَقَدِمْنَا إِلَىٰ مَا عَمِلُوا مِنْ عَمَلٍ فَجَعَلْنَاهُ هَبَاءً مَّنثُورًا
और उन लोगों ने (दुनिया में) जो कुछ नेक काम किए हैं हम उसकी तरफ तवज्जों करेंगें तो हम उसको (गोया) उड़ती हुई ख़ाक बनाकर (बरबाद कर) देगें
24أَصْحَابُ الْجَنَّةِ يَوْمَئِذٍ خَيْرٌ مُّسْتَقَرًّا وَأَحْسَنُ مَقِيلًا
उस दिन जन्नत वालों का ठिकाना भी बेहतर है बेहतर होगा और आरमगाह भी अच्छी से अच्छी
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अनुवाद — अल-फुरकान 22

सूरा अल-फुरकान आयत 22 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : जिस दिन ये लोग फरिश्तों को देखेंगे उस दिन गुनाह…

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Tuesday, August 18, 2026

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