Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- महजूरन (مَهْجُورًا): त्यागा हुआ, छोड़ा हुआ, जिससे किनारा कर लिया गया हो।
तफ़सीर:
अल्लाह के रसूल ﷺ उस दिन (क़ियामत के दिन) अपने रब की दरगाह में अपनी उम्मत की शिकायत करते हुए कहेंगे: "ऐ मेरे रब! मेरी क़ौम ने इस क़ुरआन को त्याग दिया था और इसे बिल्कुल अनसुना कर दिया था।"
यह बात उस समय की है जब रसूल ﷺ अल्लाह के सामने अपनी उम्मत की हालत पेश करेंगे। वे देखेंगे कि जिस क़ुरआन को उन्होंने अपनी पूरी ज़िंदगी में पहुँचाने के लिए हर मुश्किल सही, उसी क़ुरआन को उनकी उम्मत ने पीठ पीछे डाल दिया। उन्होंने इसे न तो पढ़ा, न समझा, न उस पर अमल किया और न ही इसे दूसरों तक पहुँचाया। कुछ लोगों ने तो इसे सुनने से भी इनकार किया, कुछ ने इसका मज़ाक उड़ाया, और कुछ ने इसे अपनी दुनियावी मसरूफ़ियात के पीछे भुला दिया।
यह आयत उन सभी लोगों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो क़ुरआन से किनारा करते हैं। क़ुरआन को त्यागने की कई शक्लें हैं: इसे न पढ़ना, इसे पढ़कर समझना नहीं, समझकर उस पर अमल न करना, अमल करने वालों का विरोध करना, और इसे छोड़कर दूसरी चीज़ों में मशगूल रहना। यह सब "हज्र" (त्याग) की क़िस्में हैं।
प्यारे भाइयो और बहनो! यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम भी उन लोगों में से हैं जिन्होंने क़ुरआन को त्याग दिया? क्या हमारी ज़िंदगी में क़ुरआन सिर्फ़ रस्म बनकर रह गया है? क्या हम इसे सिर्फ़ मुर्दों की क़ब्रों पर पढ़ते हैं और ज़िंदा ज़िंदगी में इसे भुला देते हैं?
आओ, हम अपने रसूल ﷺ की उस शिकायत का सबब न बनें। आओ, हम क़ुरआन को अपनी ज़िंदगी का नूर बनाएं — इसे पढ़ें, समझें, उस पर अमल करें और इसे दूसरों तक पहुँचाएं। याद रखिए, क़ुरआन क़ियामत के दिन हमारे लिए सिफ़ारिशी या गवाह बनेगा। अगर हमने इसे अपनाया, तो यह हमारे लिए रहमत बनेगा; और अगर हमने इसे छोड़ा, तो यह हमारे ख़िलाफ़ गवाही देगा। अल्लाह हमें क़ुरआन से मुहब्बत और उस पर अमल की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 28-32 — सूरा अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 30
सूरा अल-फुरकान आयत 30 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (उस वक्त) रसूल (बारगाहे ख़ुदा वन्दी में) अर्ज़ करेगें…सूरा आयत 30/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 28–32. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-फुरकान
पवित्र क़ुरआन
Friday, October 2, 2026
अपनी नेक दुआओं में हमें मत भूलिए


