Mishary Rashid Alafasy
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Mahmoud Khalil Al-Husary
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Abdurrahman As-Sudais
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Mohamed Siddiq Al-Minshawi
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Abdul Basit Abdul Samad
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Ali Al-Hudhaify
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Ahmed ibn Ali al-Ajamy
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Abu Bakr Ash-Shaatree
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Muhammad Ayyoub
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Abdullah Basfar
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Abdullah Al-Juhani
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Maher Al Muaiqly
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अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- अम्तरत मतरस्सौ: यानी उस पर पत्थरों की बारिश की गई।
- मतरस्सौ: बुरी बारिश, यानी पत्थरों की बारिश।
- ला यरजूना नुशूरन: वे पुनर्जीवित होने की उम्मीद नहीं रखते थे, यानी उन्हें क़ियामत और हिसाब पर विश्वास नहीं था।
तफ़सीर:
अल्लाह तआला इस आयत में मक्का के काफ़िरों की उस हालत की ओर इशारा कर रहे हैं जब वे व्यापार के सिलसिले में शाम (सीरिया) की तरफ़ जाते थे। रास्ते में वे उस बस्ती (सदूम) से गुज़रते थे जो हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की क़ौम की बस्ती थी। उस बस्ती पर अल्लाह का अज़ाब नाज़िल हुआ था—उन पर आसमान से पत्थरों की बारिश की गई थी, और उन्हें उलट दिया गया था। यह वह बस्ती थी जिसका विनाश इतिहास में एक सबक़ के तौर पर दर्ज है।
अल्लाह फ़रमाता है: क्या ये लोग उस बस्ती से गुज़रते हुए उसे नहीं देखते थे? क्या वे उसके खंडहरों और तबाही के निशानों से सबक़ नहीं सीखते थे? हक़ीक़त यह है कि वे देखते तो थे, लेकिन उनके दिलों पर मुहर लग चुकी थी। वे सिर्फ़ इसलिए सबक़ नहीं लेते थे क्योंकि उन्हें मरने के बाद दोबारा जीवित होने और हिसाब-किताब पर यक़ीन ही नहीं था। अगर उन्हें यक़ीन होता कि एक दिन उन्हें भी अपने आमाल का हिसाब देना है, तो वे उस बस्ती के हालात से ज़रूर इबरत हासिल करते और अपने कु़फ़्र और गुनाहों से बाज़ आते।
दावती पहलू:
यह आयत हमें सिखाती है कि इतिहास में गुज़री हुई क़ौमों के हालात पर ग़ौर-ओ-फ़िक्र करना ईमान की निशानी है। अल्लाह तआला ने पिछली क़ौमों के विनाश के निशान इसलिए बाक़ी रखे ताकि आने वाली नस्लें उनसे सबक़ सीखें। जो लोग क़ियामत और हिसाब पर ईमान रखते हैं, वे हर निशान से सबक़ लेते हैं और अपनी ज़िंदगी को अल्लाह की रज़ा के मुताबिक़ ढालते हैं। यही ईमान इंसान को गुनाहों से रोकता है और नेकी की तरफ़ राग़िब करता है। हमें चाहिए कि हम अपने आस-पास की निशानियों और इतिहास के सबक़ों से हिदायत हासिल करें, और उस दिन की तैयारी करें जब हर इंसान को अपने आमाल का हिसाब देना होगा। अल्लाह तआला हमें सच्चा ईमान और अमल-ए-सालिह की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।
📜 आयत 38-42 — सूरा अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 40
सूरा अल-फुरकान आयत 40 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : हमने उनको ख़ूब सत्यानास कर छोड़ा और ये लोग (कुफ्फ़ारे…सूरा आयत 40/77 — सूरा अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: सूरा अल-फुरकान सुनें, सूरा अल-फुरकान अनुवाद, सूरा अल-फुरकान mp3, सूरा अल-फुरकान pdf. आयत 38–42. हिंदी अर्थ: اردو.
सूरा अल-फुरकान
पवित्र क़ुरआन
Thursday, October 1, 2026
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