अल-फुरकान · 41/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
وَإِذَا رَأَوْكَ إِن يَتَّخِذُونَكَ إِلَّا هُزُوًا أَهَٰذَا الَّذِي بَعَثَ اللَّهُ رَسُولًا ۝٤١
Wa izaa ra awka iny yattakhizoonaka illaa huzuwan ahaazal lazee ba`asal laahu Rasoolaa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) ये लोग तुम्हें जब देखते हैं तो तुम से मसख़रा पन ही करने लगते हैं कि क्या यही वह (हज़रत) हैं जिन्हें अल्लाह ने रसूल बनाकर भेजा है (माज़ अल्लाह)

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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • هُزُوًا: मज़ाक़, ठट्ठा, उपहास
  • بَعَثَ: भेजा, नियुक्त किया
  • رَسُولًا: पैग़ंबर, संदेशवाहक

तफ़सीर:

ऐ नबी! जब ये काफ़िर और झुठलाने वाले लोग आपको देखते हैं, तो वे आपका मज़ाक़ उड़ाते हैं और तंज़ करते हुए कहते हैं: "क्या यही वह शख़्स है जिसे अल्लाह ने हमारी तरफ़ रसूल बनाकर भेजा है?" वे आपकी शान में ऐसे अल्फ़ाज़ इस्तेमाल करते हैं जो उनकी जहालत और अक़्ल की कमी को दर्शाते हैं। वे आपको देखकर आपस में इशारों में कहते हैं कि देखो, यह वही है जो दावा करता है कि अल्लाह ने उसे रसूल बनाकर भेजा है।

हक़ीक़त यह है कि ये लोग आपकी दावत और आपके बयान की क़ुव्वत से इतने प्रभावित थे कि उन्हें डर था कि कहीं आपकी बातें उन्हें उनके बुतों की पूजा से न भटका दें। लेकिन उनका यह उपहास और मज़ाक़ उनकी नादानी और सच्चाई से मुँह मोड़ने की साज़िश थी। वे जानते थे कि आप सच्चे हैं, लेकिन अपनी हठधर्मिता और अहंकार की वजह से आपको झुठलाते रहे।

याद रखें, जब सच्चाई के दावेदार के पास सच्चाई के सिवा कोई जवाब नहीं होता, तो वह उपहास और मज़ाक़ का सहारा लेता है। लेकिन अल्लाह का वादा है कि सच्चाई हमेशा बुलंद रहती है और झूठ मिट जाता है। ये लोग जल्द ही जान लेंगे कि असली गुमराह कौन है — क्या वे जिन्होंने अल्लाह के रसूल को झुठलाया, या वह नबी जो हक़ और हिदायत लेकर आया?

इस आयत में हमारे लिए सबक़ है कि जब हम सच्चाई पर चलते हैं, तो दुनिया के लोग हमारा मज़ाक़ उड़ा सकते हैं, लेकिन हमें डटे रहना चाहिए। अल्लाह की मदद उन्हीं के साथ होती है जो सब्र करते हैं। नबी करीम ﷺ ने इन तंज़ों का जवाब अपने अख़लाक़ और सब्र से दिया, और आज पूरी दुनिया उन्हीं के नाम को सलाम करती है। हमें भी चाहिए कि हम अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहें और अल्लाह के दीन की ख़िदमत में कोई कसर न छोड़ें।



📜 आयत 39-43 — सूरा अल-फुरकान

39وَكُلًّا ضَرَبْنَا لَهُ الْأَمْثَالَ ۖ وَكُلًّا تَبَّرْنَا تَتْبِيرًا
और हमने हर एक से मिसालें बयान कर दी थीं और (खूब समझाया) मगर न माना
40وَلَقَدْ أَتَوْا عَلَى الْقَرْيَةِ الَّتِي أُمْطِرَتْ مَطَرَ السَّوْءِ ۚ أَفَلَمْ يَكُونُوا يَرَوْنَهَا ۚ بَلْ كَانُوا لَا يَرْجُونَ نُشُورًا
हमने उनको ख़ूब सत्यानास कर छोड़ा और ये लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) उस बस्ती पर (हो) आए हैं जिस पर (पत्थरों की) बुरी बारिश बरसाई गयी तो क्या उन लोगों ने इसको देखा न होगा मगर (बात ये है कि) ये लोग मरने के बाद जी उठने की उम्मीद नहीं रखते (फिर क्यों ईमान लाएँ)
41وَإِذَا رَأَوْكَ إِن يَتَّخِذُونَكَ إِلَّا هُزُوًا أَهَٰذَا الَّذِي بَعَثَ اللَّهُ رَسُولًا
और (ऐ रसूल) ये लोग तुम्हें जब देखते हैं तो तुम से मसख़रा पन ही करने लगते हैं कि क्या यही वह (हज़रत) हैं जिन्हें अल्लाह ने रसूल बनाकर भेजा है (माज़ अल्लाह)
42إِن كَادَ لَيُضِلُّنَا عَنْ آلِهَتِنَا لَوْلَا أَن صَبَرْنَا عَلَيْهَا ۚ وَسَوْفَ يَعْلَمُونَ حِينَ يَرَوْنَ الْعَذَابَ مَنْ أَضَلُّ سَبِيلًا
अगर बुतों की परसतिश पर साबित क़दम न रहते तो इस शख्स ने हमको हमारे माबूदों से बहका दिया था और बहुत जल्द (क़यामत में) जब ये लोग अज़ाब को देखेंगें तो उन्हें मालूम हो जाएगा कि राहे रास्त से कौन ज्यादा भटका हुआ था
43أَرَأَيْتَ مَنِ اتَّخَذَ إِلَٰهَهُ هَوَاهُ أَفَأَنتَ تَكُونُ عَلَيْهِ وَكِيلًا
क्या तुमने उस शख्स को भी देखा है जिसने अपनी नफ़सियानी ख्वाहिश को अपना माबूद बना रखा है तो क्या तुम उसके ज़िम्मेदार हो सकते हो (कि वह गुमराह न हों)
अल-फुरकानकुरान सूची
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41आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 41

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Thursday, October 1, 2026

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