अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- هُزُوًا: मज़ाक़, ठट्ठा, उपहास
- بَعَثَ: भेजा, नियुक्त किया
- رَسُولًا: पैग़ंबर, संदेशवाहक
तफ़सीर:
ऐ नबी! जब ये काफ़िर और झुठलाने वाले लोग आपको देखते हैं, तो वे आपका मज़ाक़ उड़ाते हैं और तंज़ करते हुए कहते हैं: "क्या यही वह शख़्स है जिसे अल्लाह ने हमारी तरफ़ रसूल बनाकर भेजा है?" वे आपकी शान में ऐसे अल्फ़ाज़ इस्तेमाल करते हैं जो उनकी जहालत और अक़्ल की कमी को दर्शाते हैं। वे आपको देखकर आपस में इशारों में कहते हैं कि देखो, यह वही है जो दावा करता है कि अल्लाह ने उसे रसूल बनाकर भेजा है।
हक़ीक़त यह है कि ये लोग आपकी दावत और आपके बयान की क़ुव्वत से इतने प्रभावित थे कि उन्हें डर था कि कहीं आपकी बातें उन्हें उनके बुतों की पूजा से न भटका दें। लेकिन उनका यह उपहास और मज़ाक़ उनकी नादानी और सच्चाई से मुँह मोड़ने की साज़िश थी। वे जानते थे कि आप सच्चे हैं, लेकिन अपनी हठधर्मिता और अहंकार की वजह से आपको झुठलाते रहे।
याद रखें, जब सच्चाई के दावेदार के पास सच्चाई के सिवा कोई जवाब नहीं होता, तो वह उपहास और मज़ाक़ का सहारा लेता है। लेकिन अल्लाह का वादा है कि सच्चाई हमेशा बुलंद रहती है और झूठ मिट जाता है। ये लोग जल्द ही जान लेंगे कि असली गुमराह कौन है — क्या वे जिन्होंने अल्लाह के रसूल को झुठलाया, या वह नबी जो हक़ और हिदायत लेकर आया?
इस आयत में हमारे लिए सबक़ है कि जब हम सच्चाई पर चलते हैं, तो दुनिया के लोग हमारा मज़ाक़ उड़ा सकते हैं, लेकिन हमें डटे रहना चाहिए। अल्लाह की मदद उन्हीं के साथ होती है जो सब्र करते हैं। नबी करीम ﷺ ने इन तंज़ों का जवाब अपने अख़लाक़ और सब्र से दिया, और आज पूरी दुनिया उन्हीं के नाम को सलाम करती है। हमें भी चाहिए कि हम अपने ईमान पर मज़बूती से क़ायम रहें और अल्लाह के दीन की ख़िदमत में कोई कसर न छोड़ें।
📜 आयत 39-43 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 41
सूरा अल-फुरकान आयत 41 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और (ऐ रसूल) ये लोग तुम्हें जब देखते हैं तो…सूरा आयत 41/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 39–43. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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