अनुवाद — Tafsir
शब्दार्थ:
- कुल्लन (وَكُلًّا): हर एक (उम्मत) को।
- दरबना (ضَرَبْنَا): हमने बयान किया, पेश किया।
- अम्साल (الْأَمْثَال): मिसालें, सबक़, दलीलें और नसीहतें।
- तब्बरना (تَبَّرْنَا): हमने तबाह कर दिया, बर्बाद कर दिया, सत्यानाश कर दिया।
- तत्बीरन (تَتْبِيرًا): पूरी तरह से, बड़ी सख्ती के साथ विनाश (जैसे काँच या सोने-चाँदी के टुकड़े-टुकड़े कर देना)।
तफ़सीर (व्याख्या):
अल्लाह तआला फ़रमाता है कि हमने हर उस उम्मत (क़ौम) को, जो पहले गुज़री है — जैसे आद, समूद, क़ौमे लूत और मदयन के लोग — उनके पास अपने रसूल भेजे और उन्हें साफ़-साफ़ निशानियाँ और वाज़ेह दलीलें दीं। हमने उनके सामने पिछली उम्मतों के अंजाम की मिसालें पेश कीं, ताकि वे सबक़ हासिल करें, अपनी ग़लतियों से बाज़ आएँ और ईमान ले आएँ। हमने किसी पर भी बग़ैर हुज्जत (प्रमाण) के अज़ाब नाज़िल नहीं किया। हर क़ौम के पास वह सब कुछ पहुँचा दिया गया जो उसे सीधे रास्ते पर ला सकता था।
लेकिन जब उन्होंने हक़ को ठुकराया, नबियों को झुठलाया और अपनी सरकशी और ज़िद पर अड़े रहे, तो हमने उन्हें ऐसी सख्त पकड़ में लिया कि उनका कोई निशान न बचा। उन्हें जड़ से उखाड़ फेंका, उनके घर-बार, उनकी ताक़त और उनकी सल्तनत — सब कुछ तबाह कर दिया। यह तबाही ऐसी थी जैसे काँच या सोने-चाँदी के बर्तन को टुकड़े-टुकड़े कर दिया जाए — कोई चीज़ सलामत न बची।
दावती पहलू (शिक्षाप्रद संदेश):
यह आयत हमारे लिए बहुत बड़ी नसीहत है। अल्लाह रहमान और रहीम है, वह किसी को बग़ैर वजह तबाह नहीं करता। वह पहले सबक़ देता है, रास्ता दिखाता है, और फिर भी अगर इंसान हक़ से मुँह मोड़े, तो उसका अंजाम बहुत बुरा होता है। यह आयत हमें सोचने पर मजबूर करती है कि हम अपनी ज़िंदगी में अल्लाह की दी हुई नेमतों और हिदायतों का कितना एहतिराम करते हैं। क्या हम उन लोगों की तरह हैं जो नसीहत सुनकर भी ग़ाफ़िल रहते हैं? या फिर हम उन लोगों में से हैं जो हर पैग़ाम से सबक़ लेते हैं?
अल्लाह तआला ने हमें क़ुरआन दिया, जो सबसे बड़ी मिसाल और सबसे बड़ी रहमत है। अगर हम इसे पढ़ें, समझें और उस पर अमल करें, तो हम कभी तबाही के रास्ते पर नहीं जाएँगे। यह आयत हमें बताती है कि अल्लाह की पकड़ बहुत सख्त है, लेकिन उसकी रहमत उससे भी बड़ी है। आओ, हम अपनी ज़िंदगी को अल्लाह के हुक्मों के मुताबिक बनाएँ, ताकि हम उन लोगों में से न हों जिनका अंजाम तबाही है, बल्कि उन लोगों में से हों जिनके लिए जन्नत और खुशियाँ हैं।
📜 आयत 37-41 — अल-फुरकान
अनुवाद — अल-फुरकान 39
सूरा अल-फुरकान आयत 39 - पढ़ें, सुनें, अनुवाद, हिन्दी : और हमने हर एक से मिसालें बयान कर दी थीं…सूरा आयत 39/77 — अल-फुरकान الفرقان (मक्की). पढ़ें सुनें अनुवाद (हिन्दी). सुनें: अल-फुरकान सुनें, अल-फुरकान अनुवाद, अल-फुरकान mp3, अल-फुरकान pdf. आयत 37–41. हिंदी अर्थ: اردو.
पवित्र क़ुरआन
Tuesday, August 18, 2026
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