अल-फुरकान · 56/77
अनुवाद उच्चारण — सूरा अल-फुरकान
وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا مُبَشِّرًا وَنَذِيرًا ۝٥٦
Wa maa arsalnaaka illaa mubashshiranw wa nazeeraa
📖 हिंदी अर्थ
और (ऐ रसूल) हमने तो तुमको बस (नेकी को जन्नत की) खुशख़बरी देने वाला और (बुरों को अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है

M Mishary Rashid Alafasy ✓
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अनुवाद — Tafsir

शब्दार्थ:

  • मुबश्शिरन (مُبَشِّرًا): खुशखबरी सुनाने वाला, यानी ईमानवालों को जन्नत की खुशखबरी देने वाला।
  • नज़ीरन (نَذِيرًا): डराने वाला, यानी काफिरों और नाफ़रमानों को अल्लाह के अज़ाब से आगाह करने वाला।

तफ़सीर:

ऐ प्यारे नबी! हमने आपको इस दुनिया में एक साधारण इंसान की तरह नहीं भेजा, बल्कि आपके भेजे जाने का एक महान और स्पष्ट उद्देश्य है। अल्लाह तआला ने आपको दो बड़ी ज़िम्मेदारियों के साथ भेजा है:

पहली ज़िम्मेदारी: आप मुबश्शिर हैं, यानी खुशखबरी सुनाने वाले। जो लोग अल्लाह पर ईमान लाएँगे, उसके आदेशों का पालन करेंगे, नेक अमल करेंगे और आपकी लाई हुई शिक्षाओं पर चलेंगे, उन्हें आप जन्नत की उस खुशखबरी सुनाते हैं जो हमेशा रहने वाली है, जहाँ कोई दुख, थकान या मौत नहीं होगी। यह खुशखबरी है अल्लाह की रहमत और उसकी मग़फिरत की।

दूसरी ज़िम्मेदारी: आप नज़ीर हैं, यानी डराने वाले और आगाह करने वाले। जो लोग अल्लाह की नाफ़रमानी करेंगे, कुफ़्र और शिर्क पर क़ायम रहेंगे और आपकी दावत को ठुकराएँगे, उन्हें आप आगाह करते हैं कि अल्लाह का अज़ाब सख्त है, जहन्नम की आग भयंकर है, और वहाँ से बचने का कोई रास्ता नहीं होगा।

यह आपकी रिसालत का मक़सद है — लोगों को जहन्नम के अज़ाब से डराकर जन्नत की राह दिखाना। आपको दुनिया का मालिक बनाने या लोगों पर ज़बरदस्ती हुकूमत करने के लिए नहीं भेजा गया। आपका काम सिर्फ़ पहुँचाना है — खुशखबरी देना और डराना।

दावती पहलू:

यह आयत हमें सिखाती है कि इस्लाम एक आसान और रहमत वाला दीन है। अल्लाह ने हमें डराने के साथ-साथ उम्मीद भी दी है। जैसे एक प्यारा बाप अपने बच्चे को आग से बचाने के लिए डाँटता है और उसे मिठाई देने का वादा करता है, उसी तरह अल्लाह के नबी हमें जहन्नम से डराते हैं और जन्नत की खुशखबरी देते हैं। यह अल्लाह की बड़ी मेहरबानी है कि उसने हमें भटकने के लिए नहीं छोड़ा, बल्कि रहनुमा भेजा। आओ, हम अपने नबी की बात मानें, उनकी सुनाई खुशखबरी पर ईमान लाएँ और उनके बताए डर से बचने की कोशिश करें। यही हमारी कामयाबी है — दुनिया में इज़्ज़त और आख़िरत में जन्नत।



📜 आयत 54-58 — सूरा अल-फुरकान

54وَهُوَ الَّذِي خَلَقَ مِنَ الْمَاءِ بَشَرًا فَجَعَلَهُ نَسَبًا وَصِهْرًا ۗ وَكَانَ رَبُّكَ قَدِيرًا
और वही तो वह (ख़ुदा) है जिसने पानी (मनी) से आदमी को पैदा किया फिर उसको ख़ानदान और सुसराल वाला बनाया और (ऐ रसूल) तुम्हारा परवरदिगार हर चीज़ पर क़ादिर है
55وَيَعْبُدُونَ مِن دُونِ اللَّهِ مَا لَا يَنفَعُهُمْ وَلَا يَضُرُّهُمْ ۗ وَكَانَ الْكَافِرُ عَلَىٰ رَبِّهِ ظَهِيرًا
और लोग (कुफ्फ़ारे मक्का) ख़ुदा को छोड़कर उस चीज़ की परसतिश करते हैं जो न उन्हें नफा ही दे सकती है और न नुक़सान ही पहुँचा सकती है और काफिर (अबूजहल) तो हर वक्त अपने परवरदिगार की मुख़ालेफत पर ज़ोर लगाए हुए है
56وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا مُبَشِّرًا وَنَذِيرًا
और (ऐ रसूल) हमने तो तुमको बस (नेकी को जन्नत की) खुशख़बरी देने वाला और (बुरों को अज़ाब से) डराने वाला बनाकर भेजा है
57قُلْ مَا أَسْأَلُكُمْ عَلَيْهِ مِنْ أَجْرٍ إِلَّا مَن شَاءَ أَن يَتَّخِذَ إِلَىٰ رَبِّهِ سَبِيلًا
और उन लोगों से तुम कह दो कि मै इस (तबलीगे रिसालत) पर तुमसे कुछ मज़दूरी तो माँगता नहीं हूँ मगर तमन्ना ये है कि जो चाहे अपने परवरदिगार तक पहुँचने की राह पकडे
58وَتَوَكَّلْ عَلَى الْحَيِّ الَّذِي لَا يَمُوتُ وَسَبِّحْ بِحَمْدِهِ ۚ وَكَفَىٰ بِهِ بِذُنُوبِ عِبَادِهِ خَبِيرًا
और (ऐ रसूल) तुम उस (ख़ुदा) पर भरोसा रखो जो ऐसा ज़िन्दा है कि कभी नहीं मरेगा और उसकी हम्द व सना की तस्बीह पढ़ो और वह अपने बन्दों के गुनाहों की वाक़िफ कारी में काफी है (वह ख़ुद समझ लेगा)
अल-फुरकानकुरान सूची
77आयत
मक्कीअवतरण स्थान
56आयत

अनुवाद — अल-फुरकान 56

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Friday, October 2, 2026

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